अब घर पर ही लगेगा विद्यालय

पालकों की सक्रिय सहभागिता से घर पर ही उपलब्ध होगा विद्यालय का वातावरण
भोपाल। कोरोना संकट काल में विद्यार्थियों की शैक्षिक नियमितता बनाए रखने के लिए, राज्य शिक्षा केन्द्र ने ‘‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’’ योजना तैयार की है, जिसमें बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में अध्यापन कराया जाएगा। मध्यप्रदेश के अनेकानेक घरों में 6 जुलाई से स्कूल की घंटी सुनाई देने लगेगी। बच्चे पढेंगे, योग करेंगे, लिखेंगे और कहानियॉ भी सुनेंगे और उन पर नोट्स तैयार करेंगे।
प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी ने कहा है कि बच्चे हर अवसर से कुछ न कुछ सीखते हैं। अगर बच्चा अपने पिता के साथ खेत में बोनी करने भी जाता है तो भी वह एक नया हुनर प्राप्त करता है और इस काम में दूरी और माप की गणितीय शिक्षा तथा पर्यावरण की शिक्षा प्राप्त करता है। हर कार्य उन्हें अनुभव प्रदान करता है। विभाग का दायित्व है कि स्कूल बंद होने पर भी बच्चों को हर तरह से सीखने में सहयोग करें। उन्होंने पालकों से आव्हान किया है कि बच्चों को घर पर भी अध्ययन का वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्हें घर में ही एक उचित स्थान दें जहाँ वे बिना किसी व्यवधान के अपनी पढ़ाई कर सकें।
श्श्हमारा घर-हमारा विद्यालयश्श् योजना ऐसी ही एक भावनात्मक पारिवारिक पहल है जो बच्चों को परिवार के सहयोग से घर पर ही पढ़ाई को सुचारु रखने में सहयोगी होगी। ‘‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’’ योजना प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है। विद्यार्थी अब अपने घर पर ही विद्यालय के वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे। घर के स्कूल में प्रातः 10 बजे पालक द्वारा घण्टी/थाली बजाकर स्कूल प्रारम्भ किया जाएगा, इसी प्रकार दोपहर एक बजे घण्टी/थाली बजाकर अवकाश किया जाएगा। इससे बच्चों को घर में ही विद्यालय का आभास होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा एक सुझावात्मक समय-सारणी भी पालकों और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके अनुसार सोमवार से शुक्रवार प्रातः 10 से दोपहर एक बजे तक विषयानुरुप अध्ययन होगा तथा शनिवार को मस्ती की पाठशाला के तहत मनोरंजनात्मक गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। वहीं शाम को 2 घंटे विद्यार्थी अपने पारिवारिक बड़े-बुजुर्गों से कहानियां सुनकर उन पर नोट्स तैयार करेंगे और योग तथा अन्य खेलकूद की गतिविधियों का आयोजन अपने घर पर ही करेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा इस संबंध में अनेक पारंपरिक गतिविधियों के सुझाव भी दिए गए हैं।
डीपीसी हेमंत खैरवार ने बताया कि कोरोना काल में सतत रूप से शिक्षा प्रदाय सुनिश्चित करने हेतु डिजीलेप के माध्यम से अध्ययन सामग्री बच्चों तक पहुँचायी जा रही है। जिस पर शिक्षकों द्वारा व्हाट्सप्प ग्रुप के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का समाधान भी किया जा रहा है। आपने बताया कक्षा-1 से 8 तक के जिले के लगभग 42 प्रतिशत छात्र ग्रुप से जुड़ चुके हैं। शिक्षा प्रदाय की नियमित रूप से जन शिक्षा केंद्रवार समीक्षा की जाती है। प्रत्येक जन शिक्षा केंद्र में 5 पालकों/अभिभावकों को भी समीक्षा बैठक में शामिल किया जाता है। ऐसे छात्र जहाँ नेटवर्क अथवा मोबाइल सुविधा नही है उन्हें पाठ्यपुस्तक एवं अभ्यासपुस्तिका के माध्यम से शिक्षा प्रदाय किया जाएगा। श्री खैरवार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 4 जुलाई तक सभी छात्रों को पाठ्यपुस्तक एवं अभ्यास पुस्तिका प्रदान कर दी जाएगी।

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