अर्दली से वर्ग दो तक पहुंचे गणेश चला रहे जिपं

Ajay Namdev- 7610528622
अर्दली से वर्ग दो तक पहुंचे गणेश चला रहे जिपं
जिपं सीईओ को हर मामले में गुमराह कर रहे बाबू
 1981 में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के माध्यम से भृत्य के पद पर भर्ती हुए गणेश आज जिला पंचायत में वर्ग-2 का पद संभालते हुए सीईओ के रथ को दिशा देने वाले कृष्ण बनें हुए हैं, 4 लाख की कुल सम्पत्ति दर्शाने वाले कथित लिपिक ने बीते डेढ़ दशक के दौरान जिपं में रहकर लाखों की माया बनाई है।
अनूपपुर। जिला पंचायत अनूपपुर में जब से सरोधन सिंह नये सीईओ के पद पर स्थानान्तरित होकर यहां आये हैं, तब से चंद बाबुओं के घेरे से खुद को नहीं निकाल पा रहे हैं, यही नहीं अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय से पंचायतों के सरपंच व सचिवों के खिलाफ कार्यवाही करने के अधिकार शासन ने जब से स्थानान्तरित कर जिला पंचायत को सौंपे हैं, तभी से यहां बाबुओं का कद इतना बढ़ गया है कि उनके कद के आगे जिपं सीईओ भी बौने नजर आने लगे हैं। वर्ष 1981 में भृत्य से भर्ती होकर जैतहरी, शहडोल और डेढ़ दशक से जिला पंचायत में अपनी सेवाएं दे रहे गणेश प्रसाद श्रीवास का नाम ऐसे ही लिपिकों की सूची में सबसे ऊपर है, जो पंचायत प्रकोष्ठ की शाखा के माध्यम से हर माह लाखों का न सिर्फ जुगाड़ बना रहे हैं, बल्कि जिले के चारों ब्लाकों में बैठे सीईओ भी इनके सामने छोटे नजर आने लगे हैं।
4 लाख का दावा, लाखों की काया
आरोप है कि गणेश प्रसाद श्रीवास पंचायत प्रकोष्ठ शाखा के माध्यम से जिले भर के विभिन्न सरपंच व सचिवों के ऊपर दबाव बनाकर उनसे अवैध वसूली कर रहे हैं, यही नहीं इसके लिये उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में दलाल तब बना रखे हैं, जो सरपंच व सचिवों के शुभचिंतकों को तलाश पहले शिकायत करवाते हैं और फिर खुद गणेश श्रीवास के पास आकर जिपं सीईओ के नाम पर सौंदेबाजी करते हैं, बकौल गणेश प्रसाद श्रीवास 31 मार्च 2019 को शासन को दिये गये हलफनामें में कुल सम्पत्ति 4 लाख के आसपास दर्शाई गई है, लेकिन उनकी लाखों की काया और माया किसी से छिपी नहीं है।
इस तरह पहुंचे वर्ग-2 तक
लगभग 38 वर्ष पहले सामाजिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से गणेश प्रसाद श्रीवास जैतहरी में भृत्य के पद पर भर्ती हुए थे, यहां से वे जिला विकास अभिकरण शहडोल में शामिल हुए और कई वर्षों तक वहां सेवा देने के बाद वर्ष 2003 में जब अनूपपुर जिला बना तो उनकी किस्मत का सितारा भी चल निकला, शहडोल से यहां अर्दली के रूप में पहुंचे श्रीवास यहां जिपं में आवक-जावक सम्हालते रहे, इस दौरान उसके संबंध जिले के लगभग सरपंच, सचिवों, पीसीओ व तमाम शिकायतपुत्रों से हो गये, 2009 में वर्ग-3 और फिर 2016 में पदोन्नवत होकर वर्ग-2 में कर्मचारी बनें श्रीवास की किस्मत फिर एक बार पल्टी जब पंचायत प्रकोष्ठ की शाखा के विहिप प्राधिकारी अनुविभागीय दण्डाधिकारी की जगह जिपं सीईओ बनें, फर्जी शिकायत करवाना, आई शिकायतों का जुगाड़ बताना और फिर साहब का भय दिखाकर समझौता करवाना अब श्रीवास की दिनचर्या में शामिल हो चुका है।
और भी है इनके साथ
जिला पंचायत को अपने जुगाडू सिस्टम से चलाने वाले और हर मामले में जुगाड निकाल कर अपने काम को साधने में केवल गणेश ही नही बल्कि और भी कनिष्ठ मौजूद है। पंचायत के कार्यो व सचिव को इधर-उधर करने में भी इनका बखूबी योगदान रहता है, कुल मिलाकर जिला पंचायत में प्रवेश करने वाले इनके गिरोह से बाहर इतनी आसानी से नही निकल सकता।
.. तो यू चलेगा जिला पंचायत
किस्मत या फिर जुगाड से पंचायत प्रकोष्ठ की शाखा तक पहुंचे गणेश का कारोबार यूं चलता रहेगा या फिर नियम कानून को भी अधिकारियों द्वारा ध्यान दिया जायेगा। वर्षो से चांदी काट रहे कुछेक बाबू व कनिष्ठ कर्मचारियों पर जब तक विवेकपूर्ण निणर्य नही लिया जायेगा तब तक उच्चाधिकारियों को गणेश जैसे कर्मचारी भ्रमित कर पंचायत के कार्यो को कमाई का धंधा बनाते रहेंगे।

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