असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति पर रोक

जबलपुर। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के लिए की जा रही असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति पर रोक लगा दी। कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए राज्य सरकार सहित अन्य से जवाब मांगा है। पीएससी के माध्यम से ली गई सहायक प्राध्यापक परीक्षा में दिव्यांगों को निर्धारित मापदण्ड से दोगुना आरक्षण देने के मामले को चुनौती देते हुए मुरैना की अंबवाह तहसील निवासी राकेश कुमार तोमर, सीहोर जिला निवासी घनश्याम चैकसे व अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट चीफ जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की है। याचिका में कहा गया कि सहायक प्राध्यापक और अन्य पदों की नियुक्तियों में दिव्यांगों के लिए कुल 6 फीसदी आरक्षण निर्धारित है। लेकिन सहायक प्राध्यापक परीक्षा में दिव्यांगों को निर्धारित आरक्षण से दोगुना से भी ज्यादा आरक्षण दिया जा रहा है। पद कैरीफॉरवर्ड होने से सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिल पाएगी। ये अगले बैकलॉग हो जाएंगे, जिन पर दिव्यांगो का अधिकार हो जाएगा। यह अनुचित व नियमों के खिलाफ है। लिहाजा इसे निरस्त किया जाए। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने तर्कों से सहमत होते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया में आगामी आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
अधिवक्ता उदयन तिवारी, ब्रह्मानंद पाण्डेय, नित्यानंद मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि राज्य लोक सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापक परीक्षा के दौरान इसे अंग्रेजी विषय में 13 और अन्य विषय में 18 फीसदी तक कर दिया। लेकिन परीक्षा में जब पर्याप्त संख्या में दिव्यांग नहीं मिले तो आयोग ने बिना किसी कानून के आधार पर 7 सीट भूगोल में और 33 सीट अंग्रेजी में सामान्य केटेगिरी से कैरीफारवर्ड करने की योजना बना डाली।

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