आक्सीजन के अभाव में दो वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम

दो घंटे बाद निर्दयी डाॅक्टरो ने कहाः आई एम साॅरी

आक्सीजन के अभाव में दो वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम
सरकारी सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली के कारण अक्सर जिला चिकित्सालय में मासूम बच्चे दम तोड़ रहे है तो वहीं घटना के उपरांत जाॅंच कार्यवाही का हवाला देकर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। आज तक जो भी घटनाएं हुई उन घटनाओं में कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से जिला चिकित्सालय में पदस्थ डाॅक्टरो के हौसले बुलंद है और वह मरीजो के साथ ऐसा व्यवहार करते है मानो कि मानवता उनके लिए मर गई हो। आॅक्सीजन के अभाव में दो वर्षीय मासूम बच्चा पिता के सामने दम तोड़ देता है और वहीं पिता बच्चे को बचाने के लिए हाथ जोड़कर मिन्नत करता रहा, लेकिन निर्दयी डाॅक्टर और स्टाफ की नींद देर से खुली जिसका परिणाम यह हुआ कि बच्चे की मौत हो गई। मृतक बच्चे का पिता बेटे को कंधे पर लेकर जिला कलेक्टेªट पहुॅचकर कलेक्टर के दर पर न्याय की गुहार लगाई।

बच्‍चे के उपर रोते बिलखते पिता का तस्‍वीर

रिपोर्ट-राजेश सिंह
अनूपपुर। जिला चिकित्सालय में डाॅक्टरो की लापरवाही के कारण सोमवार के दिन आॅक्सीजन के अभाव में एक दो वर्षीय मासूम बच्चे की जान चली गई। जमुना काॅलरी के रहने वाले कल्लू केवट का दो वर्षीय पुत्र रामकृपाल केवट की अचानक तबियत खराब होती है और वह सोमवार के दिन सुबह 11 बजे अपने बच्चे को लेकर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराने पहुॅचता है भर्ती करने के पष्चात् ड्यिूटी पर मौजूद डाॅ. बृजेष पटेल बच्चे का उपचार शुरू किया। कुछ ही देर बाद डाॅक्टर ने अपने कर्तव्यो की इतिश्री करते हुए चले गये। सर्दी बुखार से पीड़ित बच्चे को आॅक्सीजन की आवष्यकता थी और आॅक्सीजन भी डाॅक्टरो द्वारा लगाया गया था,लेकिन जीवन के आधे सफर में ही आॅक्सीजन खत्म हो गया जिससे बच्चे की मौत हो गई।
लापरवाही से हुई मौत
पीड़ित पिता ने बताया कि सुबह 11 बजे जिला चिकित्सालय में दो वर्षीय मासूम बच्चे को पिता ने भर्ती कराया तो डाॅक्टर ने ड्रिप और आॅक्सीजन लगाकर सिस्टर के भरोसे चले गये और दोबारा देखने तक नहीं आये, आॅक्सीजन चल ही रहा था,लेकिन कुछ ही देर बाद आॅक्सीजन खत्म हो गया जब आॅक्सीजन खत्म होने की जानकारी ड्यिूटी पर मौजूद सिस्टर को हुई तो उसने आॅक्सीजन न होने का हवाला देकर पिता को बच्चा लेजाने की नसीहत देने लगी। जब पिता कल्लू केवट बच्चे की जान बचाने को लेकर हल्ला मचाने लगा तब फिर घंटो बाद आॅक्सीजन की व्यवस्था बनाई गई तब तक बच्चे की जान जा चुकी थी।
नहीं पहुॅचा कोई डाॅक्टर
जिस समय आॅक्सीजन के अभाव में दो वर्षीय मासूम जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था उस समय उसका पिता कल्लू केवट अपने बच्चे की जान बचाने के लिए डियूटी पर मौजूद सिस्टर से गुहार लगाता रहा,लेकिन कोई भी डाॅक्टर मौके पर नहीं पहुॅचा। जब बच्चे की मृत्यु हो गई उसके बाद सिविल सर्जन एस.आर.परस्ते ने पहुॅचकर कहा आई एम साॅरी।
कौन होगा जिम्मेदार?
इस तरह की लापरवाही के कारण बच्चो की जान जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले भी जिला चिकित्सालय में कई घटनाएं घटित हो चुकी है,लेकिन जाॅंच कार्यवाही के नाम पर केवल खानापूर्ति ही की जाती है। जिस कारण से गरीबो को न्याय नहीं मिल पाता है। अब इस मामले में देखना यह होगा कि क्या जिला प्रषासन उन दोषी डाॅक्टरो के खिलाफ कार्यवाही करेगा या फिर मामले को दफन कर दिया जायेगा।
दी गई आर्थिक सहायता
बच्चे की मौत होने के बाद जिला चिकित्सालय में पिता कल्लू केवट रोते-बिलखते दो वर्षीय मासूम को कंधे पर लेकर पैदल ही जिला कलेक्टेªट के लिए निकल पड़ा, रास्ते से आॅटो के माध्यम से कलेक्टर चन्द्रमोहन ठाकुर से मिलने पहुॅचा, जहां पर चल रही मीटिंग के कारण कलेक्टर ने अपना प्रतिनिधि के रूप में अपर कलेक्टर को मामले को देखने के लिए भेजा। जहां पर अपर कलेक्टर ने पीड़ित पिता की फरियाद सुनी और कार्यवाही की भरोसा देते हुए उसे 11 हजार रूपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
इनका कहना है
बच्चे का पिता डाॅक्टरो की लापरवाही को लेकर हमारे पास आया हुआ था जिसका हमने बयान लिया है जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
बी.डी.सिंह
अपर कलेक्टर, अनूपपुर
बच्चे की भर्ती डाॅक्टर के द्वारा की गई थी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई आॅक्सीजन की कमी नही थी।
एस.आर.परस्ते
सिविल सर्जन,जिला चिकित्सालय अनूपपुर

उपचार के दौरान बच्‍चे की बेड में मृत्‍यु की तस्‍वीर

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