ईश्वर बिना मांगे ही सब कुछ दे देता है: शीघ्रता त्रिपाठी

(सुधीर शर्मा-9754669649)

 सुदामा चरित्र सुन भाव विभारे हुए श्रोता

शहडोल।  कथा के सातवें दिन कृष्ण रुकमणी विवाद उत्सव के बाद सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया जिसको उपस्थित श्रोता कथा सुनकर भाव विभोर हो गए। सुदामा गरीब जरूर थे लेकिन दरिद्र नहीं थे, मन और विचारो में असंतुष्टि रखने वाला व्यक्ति दरिद्र कहलाता है। उक्त बात खैरहा गांव में चल रहे भागवत कथा के दौरान वृंदावन धाम से पधारी कथा वाचक बाल विदुषी शीघ्रता त्रिपाठी ने कहा। उन्होंने कहा कि सुदामा एक संतोषी ब्राम्हण थे, उन्होंने अपने मित्र कृष्ण से कभी भी कुछ मांगने की चेष्टा नहीं की वो तो पत्नी के बार-बार आग्रह पर द्वारिका गए। संकोची ब्राम्हण होने के कारण सुदामा ने भगवान से उनके धाम में भी कुछ नही मांगा। ईश्वर बिना मांगे ही सब कुछ दे देता है, उनके सामने झोली फैलाने की जरूरत नही है। वहीं व्यासपीठ से कथा वाचक श्रीकांत त्रिपाठी ने मौजूद श्रोताओं को भागवत का रसपान कराते हुए कहा कि यदुवंश को संतो का श्राप लगा और सभी नष्ट हो गए। भागवत में उल्लेख किया गया है कि कलयुग का अंत करने के लिए भगवान कलगी रूप अवतरित होंगे। कथा के दौरान दत्तात्रेय जी के 24 गुरूओं का वर्णन, भगवान द्वारा उद्धव को दिए गए उपदेश का वर्णन, परीक्षित मोक्ष, शुकदेव जी की विदाई सहित अन्य कथाओं का श्रवण कराया गया। वहीं भगवान सूक्ष्म रूप लेकर भागवत में प्रवेश कर गए। जिसके बाद कथा का विश्राम किया गया। कार्यक्रम में एसडीओपी धनपुरी भरत दुबे, खैरहा थाना प्रभारी शिवनारायण मिश्रा, जिला रोगोपचार अधिकारी राकेश श्रीवास्तव, अनुचित जनजाति अध्यक्ष नरेंद्र मरावी सहित सैकड़ों की संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

कन्या पूजन और भंडारा कल

चैत्र नवरात्र के अवसर पर दुर्गा मंदिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा की शुरूआत 06 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया था, नौ दिवसीय इस आयोजन का समापन रविवार को विशाल भंडारे और कन्या पूजन के साथ किया जाएगा। इस आयोजन में गांव सहित आसपास के सभी धार्मिक लोगो का अपार सहयोग मिला, वहीं आयोजको ने समस्त धर्मानुलंबियो को कार्यक्रम में पहुचंने की अपील की है। 

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