ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ने पकड़ी रफ्तार

अर्थव्यवस्था में कैश के इस्तेमाल में इजाफा

नई दिल्ली। नोटबंदी के फैसले ने अब जा कर राहत की सांस ली है, नोटबन्दी को लेकर अब तक कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठाने वालों का कहना है कि नोटबंदी के बावजूद अर्थव्यवस्था में कैश के इस्तेमाल में इजाफा हुआ है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कैश के इस्तेमाल में तेजी आई है, लेकिन तेजी की रफ्तार पर ब्रेक जरूर लगा है। वित्त वर्ष 2016-17 में नोटबंदी का फैसला लिया गया था। 2014-15 में करंसी सर्कुलेशन 10 लाख करोड़ था। अगले वित्त वर्ष (2015-16) में इसमें तेजी आई, लेकिन 8 नवंबर को 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया गया। इस फैसले के कारण 2016-17 में इसमें गिरावट आई। नोटबंदी का असर अगले वित्त वर्ष 2017-18 में नहीं दिखा और इसमें तेजी आई। उसके बाद 2018-19 में यह और बढ़ गया और 20 लाख करोड़ पर पहुंच गया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2018-19 के बीच करंसी सर्कुलेशन में तेजी की रफ्तार 10.20 फीसदी रही। अगर नोटबंदी का फैसला नहीं लिया गया होता तो 2018-19 में करंसी सर्कुलेशन 3.5 लाख करोड़ ज्यादा होता।
एटीएम और नगद लेनदेन में कमी..
डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में भी विविधता आई है। कैश निकालने के अलावा दूसरे तरह के पेमेंट्स में इसके इस्तेमाल में तेजी आई है। 2014-15 में डेबिट कार्ड का 83 फीसदी इस्तेमाल सिर्फ कैश निकालने में और 17 फीसदी इस्तेमाल अन्य तरह के ट्रांजैक्शन में किए जाते थे। 2018-19 में 50 फीसदी इस्तेमाल कैश निकालने के लिए और 50 फीसदी इस्तेमाल अन्य तरह के पेमेंट्स के लिए किया गया।
पैटर्न पर ध्यान दें
कैश के इस्तेमाल के पैटर्न पर ध्यान दें तो 2017 में फिजिकल ट्रांजैक्शन में सबसे ज्यादा, 72 फीसदी कैश का इस्तेमाल किया गया था। ई-मनी 7 फीसदी, डेबिट काड्र्स से 11 फीसदी, क्रेडिट काड्र्स से 9 फीसदी और बैंक ट्रांसफर 0 फीसदी है। साथ ही ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर भी 19 फीसदी कैश ऑन डिलिवरी का इस्तेमाल किया जाता है। ई-मनी 28 फीसदी, डेबिट काड्र्स से 15 फीसदी, क्रेडिट काड्र्स से 16 फीसदी और बैंक ट्रांसफर 19 फीसदी इस्तेमाल किया गया था।
यूजर्स संख्या बढ़ाई
क्रेडिट कार्ड यूजर्स की संख्या पिछले पांच सालों में दो गुनी हुई है। 2014-15 में कुल क्रेडिट कार्ड की संख्या 211 लाख थी जो 2018-19 में बढ़कर 553 लाख पर पहुंच गई। इस दौरान डेबिट कार्ड की संख्या 55.30 करोड़ से बढ़कर 90.60 करोड़ पर पहुंच गई। हालांकि दिसंबर 2019 तक इसकी संख्या में गिरावट (80.50 करोड़) आई क्योंकि पुराने कार्ड को सुरक्षा के लिहाज से डी-ऐक्टिवेट किया गया है।
ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में तेजी
नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन के वॉल्यूम और वैल्यू में काफी तेजी आई है। 2016-17 में डिजिटल ट्रांजैक्शन का वॉल्यूम 978 करोड़ था जो 2018-19 में बढ़कर 2339 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें 140 पर्सेंट की तेजी आई है। वैल्यू की लिहाज से यह 1122 लाख करोड़ से बढ़कर 1638 लाख करोड़ पर पहुंच गई। वैल्यू की लिहाज से इसमें 46 पर्सेंट की तेजी आई है।

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