कच्चे बिल पर हो रहा लाखों का व्यापार

जिम्मेदार भर रहे अपनी जेब, व्यापारियों की चाँदी

(सतीश तिवारी+91 94243 33370)

ब्योहारी । नगर के व्यापारी शासन को लाखों का चूना लगा रहे हैं, इन्कम टैक्स और सेल टैक्स की चोरी नगरीय क्षेत्र में सैकड़ों ऐसे व्यापारी है, जो प्रति दिन लाखों रूपये की बिक्री करते है और ग्राहकों को पक्का बिल तक नहीं देते जिससे बिक्री का कोई रिकार्ड नहीं रहता और करोड़ों का माल बाहर से लाकर धड़ल्ले से लाखों रूपये की बिक्री प्रतिदिन करते हंै। जानकारी का अभावभारत सरकार की जीएसटी योजना यहां पूर्णत: शिथिल और बेअसर हो चुकी है। जीएसटी कर वह टैक्स जो भारत सरकार के खाते में जाना चाहिए। वह दो नम्बर की काली कमाई व्यापारी की जेब में जा रही है। वर्तमान समय में छोटे व्यापारी के पास जीएसटी के विषय में जानकारी का अभाव है, तो वहीं बड़े व्यापारियों द्वारा लेखा विभाग के संबंधित अधिकारियों को नजराना महज इस बात का देकर की दो नम्बर को एक नम्बर में बदला कैसे जाऐ। बिल में क्रय किये गये माल और बिना बिल के बीच का अन्तर सीधे तौर पर जेब में जा रहा है। अधिकारी नहीं करते निरीक्षणसबसे बड़ी बात की जबाबदेह अधिकारी-कर्मचारी कभी अपने दायित्व के निर्वहन हेतु बाजार में औचक निरीक्षण नहीं करते है, ऐसा भी नहीं की जबाब देह अधिकारी-कर्मचारियों की जानकारी में यह माजरा नहीं है किन्तु व्यापारी और अधिकारी के बीच में सूत्रधार का काम करने बाले बिचौलिए अपने दायित्वों का निर्वहन भली भांति कर रहे है। लेकिन जबावदेह विभागीय अधिकारियों के द्वारा अपने कर्तव्यों एवं दायित्व निर्वहन के प्रति घोर लापरवाही के चलते नगरीय क्षेत्र से लाखों रूपये की राजस्व हानि सरकार को उठानी पड़ रही है।जीएसटी में नहीं है रजिस्टर्डयहां के कुछ व्यवसायी बिना जीएसटी नम्बर के अच्छा खासा व्यापार करने के बाद भी जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं हैं और जमकर इसका फायदा उठा रहे है। ये व्यापारी ग्राहकों को कच्चे और पक्के बिल का अन्तर कुछ इस तरह समझाते है कि पक्के बिल के लेन-देन पर 18 प्रतिशत, जीएसटी सहित अन्य कर जुडऩे का डर बता कच्चे बिल पर ही लेन-देन करने और टैक्स से छूट की गणित समझा अधिकतर कच्चे बिल पर ही लेन-देन करते है और ग्राहक भी कुल खरीदी से 18 प्रतिशत की बचत के चलते कच्चे बिल पर ही लेन-देन करता है।कच्चा बिल में लेनदेनसोना-चांदी किराना, कपड़ा, फर्नीचर हार्डवेयर व आटोपार्ट सहित अन्य सामग्रियों के थोक एवं फुटकर विक्रेता जो प्रतिदिन लाखों रूपये का लेन-देन कच्चे बिल या कागज के टुकडे में करते है। इन्हे इन्कमटैक्स सेलटैक्स और जीएसटी जैसे करों की चोरी करते है तथा शासन के इन महत्वपूर्ण वाणिज्यिक विभागों को चुनौती देते हुए उनकी कार्यवाही का कोई डर नहीं रहता। नगर में सैकड़ा भर ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहां रोज लाखों का लेन-देन कागज के छोटे टुकडे में ही किया जाता है। नगर में कई ऐसे होल सेल किराना व्यापारी है जिनसे नगरीय क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के छोटे-मोटे व्यवसायी अपना लेन-देन करते है। यहां पूरा हिसाब-किताब महज एक कागज के टुकडे में ही किया जाता है।

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