कलेक्टर-कप्तान को चकमा दे गये रेत माफिया

फर्जी दस्तावेज दिखाकर ले गये वाहन
बिना खनिज पंजीयन के हो रहा था परिवहन
सिंगरौली जिले की खदानों की टीपी के सहारे उत्खनन और परिवहन
व्यौहारी अंचल में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी चकमा देने में पीछे नही हट रहे है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे रेत का परिवहन कर रहे है, रविवार को अधिकारी जब मार्ग से गुजर रहे थे तो मौके पर वाहनों को रोककर रेत के परिवहन के दस्तावेजों की जांच की, इस दौरान जो दस्तावेज उपलब्ध कराये गये, उसमें से यूपी के एक वाहन का ई-खनिज में पंजीयन ही नही है तो फिर सवाल यह खडा होता है कि उक्त वाहन की ईटीपी कैसे जनरेट हो गई। खबर यह है कि सिंगरौली की खदानो की ईटीपी के सहारे अवैध उत्खनन और परिवहन फिर से अपनी चरम सीमा पर है।
शहडोल। जिले की ब्यौहारी तहसील के बुढवा में कोरोना पॉजीटिव केस आने के बाद कलेक्टर सतेन्द्र सिंह और पुलिस अधीक्षक सतेन्द्र कुमार शुक्ला ग्राम धारी नंबर-2 से लौट रहे थे तभी बुढवा-पसगढी मार्ग पर रेत परिवहन करते दो वाहनों को रोका गया, जिनसे रेत परिवहन के दस्तावेज मंगवाये गये, चालकों ने परिवहन संबंधित ईटीपी तो दिखाई, जिसके बाद अधिकारियों ने वाहन को सिंगरौली से सतना रेत लेकर जाना पाया और ईटीपी के आधार पर वाहनों को छोड दिया। मौके पर अधिकारियों को वाहन क्रमांक- यूपी-93-एटी-7673 व एमपी-18-एच-4918 मिला। अधिकारियों ने वाहन के कागजात और परमिट आदि की संपूर्ण जानकारी लेने के बाद वाहनों को छोड दिया।


फर्जी ईटीपी के सहारे परिवहन
अवैध रेत के कारोबार से ब्यौहारी क्षेत्र का पुराना नाता रहा है, पहले भी दूसरी खदानों की ईटीपी लेकर रोजाना यहां से रेत का उत्खनन और परिवहन किया जाता रहा है। टै्रक्टरो के माध्यम से प्रतिबंधित क्षेत्र सोन घडीयाल अभ्यरण से रेत की निकासी की जाती है, उसके बाद मशीन के माध्यम से हाईवा वाहनों में रेत लोड करके रीवा, सतना सहित यूपी के अन्य हिस्सों में रेत को ऊंचे दामों में भेजने का काम अर्सो से संचालित हो रहा है, लेकिन रेत के इस कारोबार में शामिल माफियाओं ने फर्जी ईटीपी का सहारा भी लेना शुरू कर दिया है।
आलाधिकारियों को भी कर दिया गुमराह
इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत माफियाओं के हौसले कितने बुलंद है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ही गुमराह कर रहे है, फर्जी ईटीपी के सहारे वाहनों को पार कराने में कोई कसर नही छोड रहे है। बताया गया है कि कईयों ने तो सिंगरौली की खदानो की ईटीपी ले रखी है और रेत का उत्खनन और परिवहन ब्यौहारी क्षेत्र से कर रहे है, वही कुछ एकाध बार अपने भेज देते है, उसके बाद कई चक्कर ब्यौहारी और उसके आस-पास के क्षेत्र से उत्खनन और परिवहन करते है। पुराने माफिया इस कारोबार में फिर से कूद चुके है।
बिना ई-पंजीयन का वाहन


राज एक्सप्रेस ने जब वाहन क्रमांक- यूपी-93-एटी-7673 की पडताल ई-खनिज के पोर्टल में की तो उक्त वाहन खनिज विभाग में किसी भी प्रकार के खनिज के परिवहन के लिए पंजीकृत ही नही है। जब वाहन विभाग में पंजीकृत नही है तो फिर उक्त वाहन की ईटीपी जारी ही नही हो सकती। कुल मिलाकर अवैध रूप से रेत का परिवहन किया जा रहा था, या तो यह काम वाहन मालिक के द्वारा किया जा रहा था या फिर सिंगरौली की जिस खदान से रेत यह वाहन लेकर आ रहा था, उस खदान संचालक ने जानबूझ कर अपने आर्थिक लाभ के चलते ऐसी गलती की। वही एनजीटी के निर्देश के बाद सिया ने पूरे प्रदेश में बडे वाहनों से रेत के परिवहन पर रोक लगाई है, जिसके बावजूद सिंगरौली में कथित ठेकेदार की मनमानी भी उजाकर हुई है।
फिर से शुरू हुआ अवैध कारोबार
ब्यौहारी क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार फिर से संचालित हो चुका है, टै्रक्टरो के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर रेत भंडारित की जाती है, जिसके बाद मशीन लगाकर वाहनों में लोड की जाती है, इस पूरे अवैध कारोबार में माफिया चांदी लूट रहे है। स्थानीय मैनेजमेंट एक बार फिर से हावी हो चुका है। बताया गया है कि बुढवा, पसगढी, झिरिया सहित अन्य क्षेत्रों में इन दिनों यह अवैध कारोबार पूरे शबाब पर है। क्षेत्र में इस बात की भी चर्चा है कि ब्यौहारी क्षेत्र में पडने वाले हर थाने में 10 हजार रूपए प्रतिवाहन के हिसाब से मैनेजमेंट तय है, वही अनुविभाग स्तर पर बैठे राजस्व विभाग के अधिकारी भी मैनेज है, जिसके चलते कार्यवाही नही हो पा रही है।
इनका कहना है
अगर इस मामले में गडबडियां मिलती है तो कार्यवाही होगी, सभी थाना प्रभारियों को रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के निर्देश जारी किये गये है।
सतेन्द्र शुक्ला, पुलिस अधीक्षक शहडोल
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अगर वाहन का खनिज पंजीयन नही है, जो दस्तावेज वाहन चालकों ने उपलब्ध कराये थे, उसका एक प्रति ली गई है, इस मामले की जांच खनिज विभाग के माध्यम से कराई जायेगी, अगर गडबडी मिली तो आपराधिक प्रकरण भी दर्ज होगा।
डॉ. सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर शहडोल

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