कुपोषित को सुपोषित बनाने महिला बाल विकास ने उठाया बीड़ा

( पुष्पेन्द्र रजक+91 94258 30248)
पुष्पराजगढ़ । महिला बाल विकास परियोजना पुष्पराजगढ़ में अटल बाल मिशन एवम पोषण अभियान अंतर्गत परिजोजना स्तरीय स्नेह सरोकार सम्मेलन का आयोजन किया गया उक्त आयोजन में कुपोषित बच्चों और उनके अविभावकों को आमंत्रित किया गया तथा कुपोषण के कारण और कुपोषण को दूर करने के उपाय एवम सरकार की तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं की बिस्तृत जानकारी प्रदान की गई तथा कुपोषित बच्चों को उपस्थित जन प्रतिनिधियो द्वारा गोद भी लिया गया कार्यक्रम में मुख्यरूप से परियोजना अधिकारी नीरज सिंह गुर्जर के द्वारा अतिकुपोषित बच्चों को NRC में भर्ती कराने हेतु अभिभावकों को प्रेरित किया तथा कुपोषण को दूर भगाने में सामाजिक निगरानी को भी श्रेय दिया।

क्या है स्नेह सरोकार योजना

अति-कुपोषित बच्चों को सामान्य-स्तर पर लाने के लिये कोई भी व्यक्ति, संस्था मध्यप्रदेश के किसी भी आँगनवाड़ी केन्द्र के संचालन में सहयोग कर सकता है। योजना में आँगनवाड़ी केन्द्र में प्रत्येक माह बच्चों का नियमित वजन लिया जायेगा। वजन के आधार पर अति-कम वजन वाले बच्चों की सूची तैयार की जायेगी। सूची विभिन्न माध्यम से शासकीय सेवक, जन-प्रतिनिधि, स्थानीय समुदाय, औद्योगिक घरानों और संस्थाओं को उपलब्ध करवाई जायेगी। उन्हें प्रेरित किया जायेगा कि वे अति-कम वजन वाले बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी लें।
सहयोगकर्ता को अपनी दी गयी राशि, सामग्री या अन्य सहयोग का उपयोग क्या हुआ, इसके बारे में जानने का अधिकार होगा। योजना में सहयोग करने वाले लोगों को उनके द्वारा दिये गये सहयोग का पूरा ब्यौरा समय पर दिया जायेगा। जिन बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी समाज के लोग लेंगे, उसमें उनके द्वारा दिये गये सहयोग के बाद बच्चे के वजन में आये सुधार की जानकारी उन्हें दी जायेगी। योजना को पारदर्शी बनाये जाने के उद्देश्य से संबंधित जिले के कलेक्टर योजना में मिले सहयोग की समीक्षा नियमित रूप से करेंगे। समीक्षा बैठक में दान-दाता और सहयोगकर्ता को बुलाया जायेगा।

कुपोषण एक गंभीर समस्या

कुपोषण एक गंभीर स्थिति है। कुपोषण तब होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों में पर्याप्त मात्रा नहीं होती भोजन आपको स्वस्थ रखने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करता है। यदि आपको प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन और खनिजों सहित पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो आप कुपोषण से पीड़ित हो सकते हैं।आबादी के कुछ समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कम होने के कारण, उनके आहार में अक्सर गुणवत्ता और मात्रा दोनों में कमी होती है। जो महिलाएं कुपोषण से पीड़ित उनके शिशुओं की स्वस्थ होने की संभावना नहीं होती है। गरीबी की वजह से हर रोज़ भोजन में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा आदि जैसे आवश्यक तत्वों की कमी होती है, इसलिए बच्चों में कुपोषण होना स्वाभाविक है।

कुपोषण के रोकथाम एवं स्वस्थ संतुलित आहार

उपस्थित जनो को कुपोषण की रोकथाम के लिए स्वस्थ संतुलित आहार की सलाह भी दी गई जिसमें प्रमुख खाद्य पदार्थो को समूह में शामिल कर उनके तत्त्वों के बारे में विस्तार से समझाया गया जिसमे ब्रेड चावल आलू और अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ को शामिल कर बताया गया कि यह आहार का सबसे बड़ा हिस्सा है। जो ऊर्जा और कार्बोहाइड्रेट के लिए कैलोरी प्रदान करते हैं। जो कि शुगर में परिवर्तित होते है जिससे ऊर्जा मिलती है।
दूध और डेयरी खाद्य पदार्थ वसा और वास्तविक शुगर के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। जैसे कि – लैक्टोस और कैल्शियम जैसे खनिज फलों और सब्जियां विटामिन और खनिजों के महत्वपूर्ण स्रोतों के साथ ही बेहतर पाचन स्वास्थ्य के लिए फाइबर और स्थूलखाद्य
मांस मछली अंडे सेम और प्रोटीन के अन्य गैर-डेयरी स्रोत – शरीर को बनाने में इनका बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। और यह कई शारीरिक और एंजाइम कार्यों में सहायता करते हैं।



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