कोयलांचल नगरी में मरीजों की जान से खिलवाड़

झोलाछाप डॉक्टर पर प्रशासन मेहरबान

(कमलेश मिश्रा-9644620219 )
बिजुरी। न्यायालय के आदेश बावजूद स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप डॉक्टर्स पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हुआ है। यही कारण है कि आज बिजुरी सहित अंचल भर में झोलाछाप डॉक्टर की दुकानेें कुकुरमुत्तों की तरह खुल गई हैं। झोलाछाप डॉक्टर आए दिन मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग सहित प्रशासनिक अमला इस ओर कोई ठोस एक्शन नहीं ले रहा है।जब कभी जिम्मेदारों से इस सम्बंध में शिकायत की जाती है तो जिम्मेदार कार्यवाही की जगह शिकायत कर्ताओं से ही झोलाछापो कि लिस्ट मांगने लगते है ,जबकि बिजरी नगर के किसी वार्ड गांव पँहुच जाए तो ये झोलाछाप आप को हर मर्ज का इलाज करते मिल जॉयेगे।परन्तु स्वास्थय विभाग अनूपपुर को ही नही मालूम कि यंहा झोलाछापो का कहर जारी है।
झोलाछाप डॉक्टर्स पर अंकुश नहीं लगा पाया
जानकारी के मुताबिक बिजुरी ,माईनस कपिलधारा कालोनी में दर्जन भर झोलाछाप बेखौफ क्लिनिक खोलकर स्वास्थ्य विभाग अनूपपुर की कृपा इलाज कर रहे है। जानकारी के अभाव में यह झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण मरीज को गलत दवा देकर उसके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं जब गलत इलाज की वजह से मरीज की मौत भी हो चुकी है। यही नहीं मामला थाने तक जा पहुंचा है। इसके बावजूद प्रशासन झोलाछाप डॉक्टर्स पर अंकुश नहीं लगा पाया है।
कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित
झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्रवाई करने सुप्रीम कोर्ट कई साल पहले शासन को आदेशित कर चुका है। इसी क्रम में शासन भी प्रशासन को लिखित में आदेशित कर चुका है। प्रशासन ने कार्रवाई को लेकर लिखित आदेश स्वास्थ्य विभाग को दे दिए लेकिन आज तक धरातल पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। हर साल स्वास्थ्य विभाग एक टीम गठित करता है, यह टीम कार्रवाई करने जाती भी है लेकिन अधिकांश मौकों पर खाली हाथ ही लौट आती है। कई बार सिर्फ झोलाछाप डॉक्टर्स को नोटिस देकर ही कार्रवाई की इतिश्री समझ ली जाती है। इसी तरह का सिलसिला लगातार जारी है
यह है झोलाछाप की श्रेणी
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक वह डॉक्टर जो स्वास्थ्य विभाग में रजिटर्ड नहीं हैें। जिनके पास इलाज करने की उपयुक्त डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। यही नहीं वे डॉक्टर भी झोलाछाप की श्रेणी में आते हैं जो अपनी पैथी छोड़ दूसरी पैथी में मरीज का इलाज करते हैं। जैसे कि ऐलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेद की दवा नहीं लिख सकता तो वहीं आयुर्वेदिक डॉक्टर ऐलोपैथिक दवा नहीं लिख सकता है।
क्लीनिक पर न पंजीयन न डिग्री चस्पा
नियमानुसार क्लीनिक चलाने के लिए न सिर्फ सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन होना अनिवार्य है। बल्कि क्लीनिक में पंजीयन नंबर सहित उपयुक्त योग्यता के दस्तावेज चस्पा होना जरूरी है। लेकिन बिजुरी नगर में ही दर्जनों क्लीनिक ऐसी चल रही हैं जहां कोई भी जरूरी सूचना अंकित नहीं है। ऐसी क्लीनिक कार्रवाई से बचना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही हैं।

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