झोलाछाप डॉक्टर के आगे बेबस चिकित्सा विभाग

सड़क किनारे खुलेआम बांट रहे मौत

(Amit Dubey-8818814739)
शहडोल। शहर की गलियों से लेकर मुख्य मार्केटों तक झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। आलम यह है कि एक-एक गली में चार-चार क्लीनिक चल रहे हैं। बिना किसी डिग्री के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हर मर्ज का इलाज इनके यहां होता है। अगर मरीज थोड़ा ठीक भी है और इनके इलाज अगर वो बीमार पड़ जाए तो इससे इनको कोई परवाह नहीं है। इन झोलाछाप डॉक्टरों का लक्ष्य सिर्फ चंद पैसे कमाना ही होता है। यही वजह है कि आए दिन गरीब तबके के लोग इन डॉक्टरों के शिकार हो जाते हैं। जिससे वे अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। इसके बावजूद भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
स्वास्थ्य विभाग का भी नहीं है कोई खौफ
जिला मुख्यालय में बड़ी संख्या में झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। उन्हें पता है कि विभाग कभी छापेमारी करने नहीं आएगा चूंकि विभागीय अधिकारियों के साथ उनकी सांठ-गांठ रहती है। किसी शिकायत पर अगर छापेमारी हो भी जाती है तो इसकी जानकारी इन्हें पहले ही मिल जाती है। अवैध क्लीनिकों के अलावा अवैध मेडिकल स्टोर भी सैकड़ों की संख्या में चल रहे हैं। यही नहीं इन मेडिकल स्टोर पर उन दवाइयों को भी आसानी से लिया जा सकता है जिन पर बैन है।
गांव वाले होते हैं इनके शिकार
झोलाझाप डॉक्टरों का शिकार शहर में काम करने आने वाले मजदूर और गांव में रहने वाले गरीब लोग हो रहे हैं। ये लोग इन डॉक्टरों से 20 से 50 रुपये में दवाई ले लेते हैं। जिसका खामयाजा कई बार उन्हें अपनी मौत को गले लगाकर चुकाना पड़ता है। अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें झोलाझाप डॉक्टरों की दवाई से लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
बस्ती सहित कल्याणपुर में सजती है दुकान
झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ जब भी किसी के द्वारा शिकायत करने पर छापेमारी की जाती है। तो इससे पहले ही उन्हें इस छापेमारी की जानकारी मिल जाती है। इसी का फायदा उठाकर ये झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकान बंद कर मौके से गायब हो जाते हैं। लगभग झोलाछाप डॉक्टर अंडर ब्रिज रोड से कल्याणपुर जाने वाले मार्ग पर अपनी दुकाने संचालित कर रहे हैं, ऐसा नहीं है कि जिम्मेदारों को जानकारी नहीं है, लेकिन झोलाछाप डॉक्टरों के आगे जिम्मेदारों के हौसले खुद पस्त होते नजर आ रहे हैं।
डॉक्टरों की कमी का फायदा
प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी है और जो हैं वे गांवों में जाना नहीं चाहते। इसका फायदा ये झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों को पैदा करने वाले संस्थानों की भी कमी नहीं है। जहां से डिग्री या प्रमाण पत्र के आधार पर ये अपनी दुकानदारी चलाते हैं। हालांकि न तो ये डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान की कोई अहमियत है और न इन डिग्रियों की क्योंकि ये संस्थान सक्षम अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त नहीं होते।

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