… तो नेता को राहत के फेर में एफआईआर के मायने भूल गये वर्दीधारी

लिखित शिकायत के बाद भी बिजुरी पुलिस ने जांच में अटकाया मामला
४८ घंटो में ४८ किलोमीटर भी नही पहुंच पाई पुलिस की डाक
सायबर सेल के नाम पर जांच को उलझाने में लगे थाना प्रभारी

एफआईआर अर्थात प्रथम सूचना विवरण को बिजुरी पुलिस ने महज सत्ताधारी दल के नेता को बचाने के लिए दर किनार कर दिया। रविवार की दोपहर भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य के खिलाफ थाने में उनके नंबर सहित शिकायत दी गई, दो दिन बाद प्रभारी ने सायबर सेल से जानकारी मिलने के बाद कार्यवाही की बात कही है।

अनूपपुर। शनिवार की रात अर्थात शटर्डे नाइट को १० बजकर ७ मिनट पर संभाग के दिग्गज भाजपा नेता अनिल गुप्ता द्वारा अपने व्यक्तिगत मोबाइल से भारतीय जनता पार्टी बिजुरी वार्ड नंबर-७ नामक गु्रप में अश्लील फोटो डाली गई। रविवार की दोपहर इस मामले की लिखित शिकायत एफआईआर दर्ज करने के लिए बिजुरी थाना प्रभारी को दी गई, लेकिन ७२ घंटे बीतने के बाद भी शायद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नही की। बकौल प्रभारी थाना प्रभारी बिजुरी आर.के. सोनी कहते है कि हमने मोबाइल नंबर की जांच के लिए सायबर सेल को पत्र लिखा है वहां से जानकारी के बाद ही एफआईआर दर्ज की जायेगी।
यह है एफआईआर के मायने
भारतीय संविधान सहित देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में एफआईआर की व्याख्या करते हुए इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि थाने में शिकायत आने पर पुलिस सबसे पहले एफआईआर अर्थात प्रथम सूचना विवरण को दर्ज करे, इसके बाद आवश्यक हो तो पुलिस मामले को जांच में ले ले और जांच के उपरांत समस्त बयानो व सबूतो के दस्तावेजी प्रमाण के साथ न्यायालय में चालान पेश करे, बिजुरी सहित पूरे जिले व देश की पुलिस लगभग मामलों में इन आदशों का अनुसार करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस शायद एफआईआर के मायने ही भूल गई।
४८ घंटे और ४८ किलोमीटर का सफर
संवेदनशील मामलों में बिजुरी सहित मुख्यालय से सैकडा भर किलोमीटर दूर करनपठार और अमरकंटक थाना क्षेत्रों की पुलिस ने भी सायबर सेल से कुछ घंटो में जानकारी लेकर बडे-बडे खुलासे किये है, लेकिन रविवार की दोपहर हुई शिकायत के संदंर्भ में थाना प्रभारी बिजुरी द्वारा सायबर सेल को सिर्फ मोबाइल नंबर के मालिक की जानकारी के लिए भेजा गया पत्र मंगलवार की शाम तक नही पहुंचा। यदि पुलिस इस मामले में कार्यवाही करना चाहती तो नंबर डायल कर अनिल गुप्ता से बात भी कर सकती थी और उससे शिकायत के संदंर्भ में उससे मीडिया की तरह पक्ष भी ले सकती थी, लेकिन मामले को लटकाने के फेर में सायबर सेल को भेजे गये पत्र का सफर कब खत्म होगा, यह भेजने वाले ही जाने।
भाजपा संगठन व राजधानी तक हुई गूंज
रविवार को मामले की शिकायत होने और सोमवार को यह मामला मीडिया की सुर्खी बनने के बाद इसकी गूंज भाजपा तथा संगठन के गलियारो में सुनने को मिली, यही नही भाजपा के वरिष्ठ और जमीनी कार्यकर्ताओं ने इस हरकत का विरोध किया और राजधानी तक शिकायतें भेजी गई, यही नही इस घटना के अलग दो दिनों तक भाजपा के जिलाध्यक्ष और संभागीय संगठन मंत्री की ओर से पक्ष या विपक्ष में न तो कोई बयान जारी किया गया और न ही प्रदेश संगठन में नेता की इस करतूत के खुलासे के बाद पार्टी की ओर से उस पर कोई कार्यवाही की।
उपचुनाव में होगा पार्टी को नुकसान
आने वाले माहों में भारतीय जनता पार्टी को अनूपपुर विधानसभा चुनावो में भी अपने ्रप्रत्याशी को उतारना है, क्योकि भाजपा के संभावित प्रत्याशी के साथ तथाकथित नेता को छाया की तरह देखा जाता रहा है, इस कारण हर आम मतदाता तक पहुंच चुकी तथाकथित नेता की यह छाप पार्टी को चुनावों में नुकसान पहुंचा सकती है। चौराहो पर भी कथित नेता और पार्टी के चाल चरित्र और चेहरे वाले नारे की चर्चाएं एक दूसरे के साथ जोड कर की जा रही है।
इनका कहना है
हमने मामले की जानकारी के लिए सायबर सेल फाइल भेज दिया है, वहां से जानकारी आने के बाद ही कुछ कर पायेंगे।
आर.के. सोनी, थाना प्रभारी बिजुरी
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मेरे पास ऐसी जानकारी अभी नही आई है, फिर भी आवाक-जावक में हो सकता है, मै जानकारी लेकर आपको बता पाऊंगा।
प्रभारी, सायबर सेल, अनूपपुर
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मै पूरे मामले की जानकारी लेकर, कार्यवाही के निर्देश देता हूूं, जल्द ही पूरे मामले की जांच कर प्राथमिकी दर्ज की जायेगी।

अभिषेक राजन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूपपपुर

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