…तो भारत निर्वाचन आयोग की विशिष्ट अनुमति के बाद सीएमओ शहडोल बनेंगे श्रीवास्तव!

प्रभार के लिये दिन भर चलता रहा नाटक, आचार संहिता उल्लंघन का आरोप

शहडोल । सरकार बदलने और आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले मनचाही जगह पाने के लिए लगभग विभागों के अधिकारी अपने आकाओं के आशीर्वाद से स्थानांतरण की होड़ में लगे रहे, अधिकांश ने समय रहते अपना जुगाड़ बना लिया और सुरक्षित माद में जाकर बैठ भी गई, लेकिन शनिवार 09 मार्च व रविवार 10 मार्च को अवकाश होने के कारण व रविवार को आदर्श आचार संहिता लागू होने के चलते शक्रवार 08 मार्च को जिनके स्थानांतरण हुए थे, अब उसे रूकवाने व मनचाही जगह पर बैठने के लिए अधिकारियों में आपा-धापी मची हुई है। नगरीय निकाय के अधिकारियों के स्थानांतरण सूची में नाम आने व पद से रिलीव होने तथा प्रभार लेने के इस खेल में सोमवार को संभागीय मुख्यालय की नगरपालिका में दिन भर अफरा-तफरी मची रही। अनूपपुर जिले के पसान नगरपालिका से शहडोल आकर मुख्य नगरपालिका अधिकारी का प्रभार लेने में अजय श्रीवास्तव के पसीने छूट गये, दिन भर नगरपालिका में प्रभार लेने का प्रयास चलता रहा, लेकिन देर शाम तक उस पर अमल नहीं हो पाया, तकनीकी खामियों के कारण अजय श्रीवास्तव का नगर पालिका शहडोल का प्रभार लेना खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। 

यहां फंसा श्रीवास्तव का पेंच

अजय श्रीवास्तव अनूपपुर जिले के पसान नगर पालिका में सीएमओ के पद पर पदस्थ थे, सप्ताह भर पूर्व उनका स्थानांतरण शहडोल जिले के खांड नगर पंचायत के लिए किया गया था, जिसके बाद अजय श्रीवास्तव ने उक्त आदेश के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली थी और शासन के आदेश के खिलाफ  न्यायालय से स्थगन लिया था और पसान में ही अपनी सेवाएं देते रहे, 8 मार्च को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा पुन: 69 कर्मचारियों के स्थानांतरण की सूची जारी की गई, जिसमें अजय श्रीवास्तव को खांड से शहडोल नगरपालिका परिषद स्थानांतरण किया गया, अजय श्रीवास्तव के मामले में विभाग से यह त्रुटि हो गई की, वे खांड में पदस्थ ही नहीं थे तो उनका स्थानांतरण किस नियम व आधार के तहत शहडोल किया गया। इसी बीच अनूपपुर जिला प्रषासन ने 8 मार्च को ही अजय श्रीवास्तव को पसान से शहडोल नगर पालिका के लिए भार मुक्त कर दिया और वे सोमवार को शहडोल नपा में प्रभार लेने आ पहुंचे। सवाल यह उठता है कि अनूपपुर  जिला प्रशासन ने शहडोल जिले के खांड नगर पंचायत से स्थानांतरित व शासन के आदेश में स्पष्ट उल्लेखित होने के बाद भी खांड को पसान कैसे माना और उस आधार पर भार मुक्त कैसे कर दिया। 

यह कहती है स्थानांतरण नीति 

भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा आदर्श आचार संहिता के भाग 16 की कंडिका 16.5.2 में अधिकारियों के स्थानांतरण व नियुक्त के संदर्भ में स्पष्ट व्याख्या की गई है, उक्त कंडिका के बिन्दु क्रमांक 2 में यह उल्लेख है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने व चुनाव की तिथियों की उद्घोषणा से पूर्व जारी स्थानांतरण आदेशों, किन्तु जो उद्घोषणा तक कार्यान्वित नहीं किये गये हैं, को भारत निर्वाचन आयोग की विशिष्ट अनुमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए, सामान्य भाषा में यह अर्थ है कि भले ही स्थानांतरण आदेश आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले हुए हो, लेकिन यदि लोकसेवक ने आदर्श आचार संहिता की उद्घोषणा तक पूर्व में जारी आदेश के तहत भार मुक्त या पद ग्रहण नहीं किया है तो आदेश का पालन बिना भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली की विशिष्ट अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। 

यह हुआ नपा में 

सोमवार को जब अजय श्रीवास्तव नगर पालिका में पदभार ग्रहण करने आये तो नपाध्यक्ष कार्यालय में उपस्थित नहीं थी, मुख्य नगरपालिका अधिकारी कलेक्टर द्वारा आहुत समयसीमा की बैठक में थे, नगरपालिका के कर्मचारी निर्वाचन के कार्यो में व्यस्त थे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के दर्जनों पार्षदों व जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने अजय श्रीवास्तव के प्रभार लेने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया और इसका विरोध किया और यह भी कहा गया कि अजय श्रीवास्तव स्थानीय कांग्रेस के पदाधिकारियों व नपा के पार्षदों की जगह भोपाल से व्यवस्था व सिफारिश कर पैराशूट से यहां पहुंचे, इस कारण भाजपा की अध्यक्ष तो दूर कांग्रेस के ही नेता उन्हें यहां नहीं चाह रहे। 

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