दुल्हरा में मजदूर बन रहे ठेकेदार

नल आपरेटर को रोजगार सहायक के बराबर मिल रही मजदूरी

अनूपपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यो सहित विभिन्न खरीदी के फर्जी बिलों की भरमार है, जिले की कोई भी पंचायत इन फर्जी बिलों से अछूती नहीं है, इसमें पंचायत स्तर के पंच, उपसरपंच से लेकर सरपंच, सचिव व जनपद व जिला पंचायत तक के अधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल हैं। मजे की बात तो यह है कि कागज के टुकड़ों पर प्रिंट फर्जी फर्मों के नाम पर लाखों के भुगतान हो रहे हैं और ये न तो जीएसटी का पालन कर रहे हैं और न ही वाणिज्य कर व आयकर विभाग को इसकी खबर है।

रामनारायण के नाम पर निकाली राषि
जिले की जैतहरी जनपद की विभिन्न पंचायतों हुए भ्रष्टाचार किसी से छुपे नहीं है, वहीं ताजा मामला जैतहरी जनपद की दुल्हरा पंचायत का है, सूत्रों की माने तो यह पदस्थ सचिव और ग्राम की जनता द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों द्वारा ग्राम के लोगों के लिए आनी वाली विकास राषि में जमकर सेंध लगाई जा रही है, जहां एक ओर सरकार जीरो टाॅलरेंस की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधि और सचिव भोला सिंह द्वारा रामनारायण पटेल नल-जल चालक को 300 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से रोजी दे रहे हैं, मजे की बात तो यह है कि मनरेगा के तहत अगर मजदूर काम करता हैं तो उसे पंचायत द्वारा मात्र 172 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है, लेकिन पंचायत के नुमाईंदों द्वारा किस नियम के तहत मजदूरी भुगतान की जा रही है, यह तो समझ से परे है।

चपरासी के लग रहे बिल
जैतहरी जनपद की पंचायतें इन दिनों इतनी भ्रष्ट हो चुकी हैं कि जहां सचिव द्वारा नल चालक को 300 रूपये दिये जा रहे हैं, वहीं इसी पंचायत में चपरासी के पद पर पदस्थ ओमप्रकाष प्रजापति को महज 3000 हजार रूपये महीने में रखा गया है, यहां यह समझ से परे है कि चपरासी को नल चालक से कम और नल चालक को रोजगार सहायक से ज्यादा तनख्वाह क्यों दी जा रही है, ऐसा नहीं हैं पंचायत में पदस्थ सचिव द्वारा ओमप्रकाष को नाराज किया जा रहा है, यहां के सचिव भोला सिंह द्वारा लोकसभा निर्वाचन व्यवस्था प्राथमिक षाला के लिए उक्त चपरासी से सामग्री लेकर उसे भी खुष करने में लगे हुए हैं।

दीपक के नाम पर जलाये दिये
ग्राम पंचायत दुलहरा एक ऐसी पंचायत है जहां मजदूरों के विकास पर इतना ध्यान दिया जा रहा है कि जो मजदूर पंचायत में एक बार काम कर लेता है, यहां कुछ ही दिनों में वह सप्लायर बन जाता है, सूत्रों का कहना है कि सचिव द्वारा दीपक कोल द्वारा अगर पंचायत में सामग्री सप्लाई की है या सीएम के कार्यक्रम भाड़े पर वाहन लगाया है तो वह पंचायत में मजदूरी क्यों कर रहा है। वहीं लोगों का यह भी कहना है कि अगर दीपक मजदूर है तो दुल्हरा पंचायत में सभी को मजदूरी करनी चाहिए, जिससे जल्द से जल्द वह ठेकेदार बन जाये।

क्या है अधिकारियों की जिम्मेदारी
पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार के लिए पूरी तरह जनपद में बैठे अधिकारी जिम्मेदार है, जहां एक ओर षासन-प्रषासन उन्हें मोटा वेतन देकर षासन द्वारा संचालित होनी वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और षासकीय कोष की जिम्मेदारी सौंपता है कि इसका दुरूपयोग न हो सके, लेकिन जनपद में बैठे जिम्मेदार सब जानकर भी अंजान बने बैठे हैं, अगर इनसे बात भी की जाये तो इनका कहना होता है कि षिकायत मिलने पर कार्यवाही की जायेगी, इसी का फायदा उठाकर सचिव, सरपंच भ्रष्टाचार करने के बाद भी बच निकलते हैं, वहीं षिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सेटिंग कर कोई कार्यवाही नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि इस मामले में जनपद में बैठे जिम्मेदारों को जांच कर न्यायोचित कार्यवाही करनी चाहिए, जिससे आने वाले समय मे दुबारा इस की पुर्नावृत्ति न हो।

सरपंच से बात करो, सचिव से बात करो
इस संबंध में जब पंचायत सचिव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा पहले तो सबकुछ सुना गया, उसके बाद सरपंच से बात करने की बातें कहीं गई, सरपंच ने सचिव से बात करने की बातें कहीं, लेकिन जब दोबारा सचिव से बात करने की कोषिष की गई तो पहले तो उनका फोन किसी व्यक्ति ने उठाया, उसके बाद फोन रिसीव करने से बचते रहे।

इनका कहना है…
आप मुझे रसीद उपलब्ध कराईये, मैं तत्काल ही इस मामले को दिखवाता हंू।
इमरान सिद्धकी
सीईओ
जनपद, जैतहरी

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