दो माह के भीतर मिलेगा रोजगार, आश्रित पुत्री भी होगी पात्र, जमीन के क्लाबिंग पर बनी सहमति

एसडीएम की अध्यक्षता में कोल प्रबंधन और किसानों की डीआरसी बैठक सम्पन्न, कई बिंदुओं में किसानों ने दर्ज कराई आपत्ति

(सुधीर शर्मा-9754669649)

शहडोल। सोहागपुर एसईसीएल अंतर्गत दामिनी भूमिगत कोयला खदान द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले रोजगार संबंधी डीआरसी की दूसरी बैठक बुधवार को राजेंद्रा कालोनी स्थित कल्याण मंडप में सम्पन्न हुई। एसडीएम सोहागपुर धर्मेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कोल प्रबंधन की ओर से जीएम सोहागपुर डीके चंद्राकर ने रोजगार संबंधी समस्त प्रक्रिया को विस्तार से किसानों के समक्ष रखा और उनकी सहमति मांगी गई, जिस पर किसानों ने एसआईएल 2012 के प्रावधानों के तहत जमीन के क्लाबिंग पर सहमति जताई है। मंच पर सहायक प्रबंधक भू राजस्व अमित चटर्जी, भू राजस्व अधिकारी सोहागपुर अशोक द्विवेदी, सबेरिया मैनेजर आरूप जगदीश बनर्जी, प्रबंधक दामिनी यूजी माइंस एस आर शर्मा, उपसरपंच खैरहा गंगा प्रसाद कचेर मंचासीन रहे।

312 एकड़ पर 156 नौकरी

बीते सप्ताह दामिनी यूजी कोल माइंस द्वारा अधिग्रहित किसानों की भूमि के बदले रोजगार देने की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए खैरहा के 92 किसानों की डीआरसी बैठक आयोजित कर चुकी है, जिसमे किसानों और कोल प्रबंधन के बीच जमीन के क्लाबिंग पर सहमति बन चुकी है। वहीं कंदोहा में खदान ने 312 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है, जिसमे 156 किसानों को रोजगार प्रदान किया जाएगा, कंदोहा के कास्तकारों ने भी जमीन के क्लाबिंग पर मोहर लगाई है।

ये भी रहा खास….

सीआईएल एक्ट के अंतर्गत क्लाबिंग के तहत भूस्वामियों को नौकरी दी जाएगी, क्लब नही होने की स्थिति में शेष भूमि का कोल प्रबंधन अतिरिक्त मुआवजा प्रदान कर उसके स्वामित्त्व को शून्य कर देगी, कलेक्टर के अदेशानुसार सिचाई विभाग ने नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है इस स्थिति कोल प्रबंधन नहर प्रभावित किसानों की भूमि पर पुनः विचार करेगी। धारा 9(1) के बाद नामांतरण, बटनबारा, फौती आदि विषयों पर गंभीरता से विचार कर वर्तमान भूस्वामी को नौकरी दी जाए, यह मांग नवीन भूस्वामियों के द्वारा रखी गई। हैवी ब्लास्टिंग से दीवारों में दरार, कंपन के कारण दहशत में जीवन जीने को लोग मजबूर है। बुढ़ार-खैरहा मार्ग का एक फिर मुद्दा उठा, स्कूल, और स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएं भी दी जाए।

दोनों गांवों को जोड़कर हो क्लाबिंग

दामिनी यूजी कोल माइंस द्वारा खैरहा और कंदोहा को मिलाकर दो गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया है। कोल प्रबंधन द्वारा दो अलग-अलग गांवों को मानकर क्लाबिंग कर रही है, कंदोहा का किसान कंदोहा की भूमि पर क्लाबिंग कर सकता है और खैरहा का किसान खैरहा की अधिग्रहित भूमि पर क्लाबिंग कर सकेगा, जिस पर ग्राम पंचायत ने एक लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। ग्राम पंचायत की ओर से दिए गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि जब दामिनी कोल माइंस ने अधिसूचना एक साथ जारी किया है, दोनों गांव की भूमि एक साथ अधिग्रहण किया गया, मुआवजा की प्रक्रिया भी दोनों की एक साथ हुई है, दोनों ग्रामो की पंचायत भी एक है, उक्त दोनों गांव की भूमि भी एक ही खदान के द्वारा की गई है तो फिर खैरहा-कंदोहा को दो अगल-अगल गांव क्यो मानकर रोजगार प्रक्रिया में क्लाबिंग नही की जा रहा है। यही नही समस्या उन किसानों के सामने है जिनके पास खैरहा में भी अपूर्ण भूमि है और कंदोहा में भी अपूर्ण भूमि है, भूस्वामी के पास दो गांवों को मिलाकर दो एकड़ भूमि होने के बाद भी वह क्लाबिंग नही कर सकता, यह न्याय संगत नही है इसलिए ग्राम पंचायत ने एक साथ क्लाबिंग करने के लिए एक लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। वही कास्तकारों ने इस नियम को कंपनी हित में व किसान विरोधी बताया है।

सीलिंग प्रभावितों के पास आत्महत्या एकमात्र रास्ता

दामिनी यूजी कोल माइंस द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि में कंदोहा स्थित कास्तकारों की करीब तीस हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर सीलिंग प्रभावित हो गई, कास्तकार अनिल गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कोल प्रबंधन किसानों के साथ छल कर रही है। वर्ष 2010 में जब सीलिंग हेतु जमीनों की लिस्ट जारी कर दी गई, इसके बाद आदेश में संशोधन करते हुए इसी प्रकरण में दोबारा लिस्ट जारी हुई, जो किसान 2010 के विवरणी में सीलिंग प्रभावित नही था, वह वर्ष 2016 के सूची में सीलिंग प्रभावित हो गया, वही वर्ष 2016 के नई विवरणी में जो किसान सीलिंग मुक्त है वह 2010 के सूची में सीलिंग मुक्त था, समस्या यह है कि कोल प्रबंधन किसी एक सूची के आधार पर सीलिंग प्रभावितों का चयन करें, ऐसा न करते हुए कोल प्रबंधन दोनों ही विवरणी को सम्बद्ध करते हुए दोनों सूची में दर्ज खसरे को सीलिंग प्रभावित मान रही है। जबकि यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है। अनिल गुप्ता ने बताया कि मेरे पास साढ़े सात एकड़ भूमि है जो वर्ष 2010 के मुताबिक साढ़े पांच एकड़ भूमि सीलिंग प्रभावित हो गई, शेष 02 एकड़ भूमि सीलिंग मुक्त था। वर्ष 2016 में मूल कास्तकार के द्वारा कमिश्नर न्यायलय के आदेश पर नई विवरणी प्रस्तुत की गई, जिसमे बची दो एकड़ भूमि को भी सीलिंग प्रभावित कर दिया गया। ऐसी स्थिति में किसान दोहरी मार झेलने पर विवश है, उसके पास दो ही रास्ता है या तो वह आत्महत्या कर ले या उम्मीद का गला घोंटकर पलायन कर जाए

आखिर क्यों नही मिलेगी नौकरी

किसानों की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश शुक्ला ने प्रबंधन से सवाल करते हुए कहा कि जमीन पर धारा 9(1) लगाने के बाद कि हुई रजिस्ट्री के आधार पर किसान नौकरी के लिए आखिर क्यों पात्र नही है, जब किसान मुआवजा प्राप्त कर चुका है तो उसे नौकरी की पात्रता क्यो नही दी जा रही है। दो टूक शब्दों में जबाव मांगते हुए अधिवक्ता शुक्ला ने कहा कि कोल बैरिंग एक्ट में कही जिक्र नही है कि भू स्वामी सिर्फ मुआवजा का अधिकारी है, धारा 09 के बाद उसे नौकरी की पात्रता नही होगी, जिसका जबाव मांगने पर जीएम सोहागपुर ने इस सवाल से पल्ला काटते हुए दिखे, और कहा कि आपके इस सवाल का मेरे पास कोई जबाव नही है, यह कंपनी के रूलिंग में नही है इसलिए नौकरी की पात्रता नही दी जाएगी। जिस ब्रजेश शुक्ला ने एक लिखित आपत्ति भी प्रबंधन को सौंपा है। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2012 में धारा 09 लागू कर जमीनों का अधिग्रहण कर लिया गया था तो बाद में रजिस्ट्री क्यो हुई इस पर कोल प्रबंधन ने रोक क्यो नही लगाई, जिस पर जीएम ने कहा कि अधिग्रहण की पूरी जानकारी कलेक्टर के पास थी, इसके पीछे राजस्व विभाग जिम्मेदार है।

ये रहे मौजूद

दामिनी यूजी कोल माइंस द्वारा आयोजित की गई डीआरसी बैठक में मंच का संचालन पवन दीप तिर्की ने किया वही बैठक में सर्वेयर दिवाकर गुप्ता, संजय सोनी, ब्रजेन्द्र तिवारी, हल्का पटवारी ब्रजेन्द्र तिवारी, अमरजीत सिंह, सलीम खान, दीपक शर्मा, मौलाना समसुद्दीन, भरत सोनी, जीतेन्द्र सोनी, विकास सोनी, राजीवलोचन द्विवेदी, हेमंत साहू, रामप्रसाद गुप्ता के अलावा सैकड़ो किसान व एसईसीएल के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

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