नपा की दुकान किसी की, लाखों में किसी और को दिया बेच

खाते में लिया भुगतान, देने से मुकर रहे नीरज
13 लाख 60 हजार रूपये कर दिये खुर्दबुर्द
पीडि़त ने कोतवाली में शिकायत दे मांगा न्याय
नगर पालिका कार्यालय के ठीक नीचे नपा द्वारा नीलामी में बेची गई दुकान क्रमांक 24 को नटवरलालों ने मूल स्वामी को बिना खबर दिये बेच दिया, 13 लाख 60 हजार लेने के बाद पजेशन देने में आनाकानी की जाने लगी, अंतत: दुकान के मालिक हंसराज चौधरी सामने आये, महिला ने अपनी रकम वापिस मांगी तो, आनाकानी होने लगी, अंतत: मामला कार्यवाही के लिए कोतवाली जा पहुंचा।

शहडोल । गांधी चौराहे के समीप ऋषिका कंस्ट्रक्शन के नाम पर अपना कारोबार संचालित करने वाली महिला श्रीमती ज्योति मिश्रा ने कोतवाली पुलिस को 13 लाख 60 हजार रूपये की धोखाधड़ी की शिकायत देते हुए कार्यवाही की मांग की है, महिला ने आरोप लगाये हैं कि अनूपपुर जिले के चचाई थाना अंतर्गत अमलाई कालरी क्षेत्र में रहने वाले नीरज मिश्रा एवं शहडोल में रहने वाली साहू नामक महिला द्वारा षड्यंत्र रचकर 13 लाख 60 हजार रूपये ले लिये गये, दुकान बेचने के नाम पर हुए सौदे में इतनी बड़ी राशि लेने के बाद जब पजेशन नहीं दी गई तो, बात आगे बढऩे लगी, अंत में इस बात की पुष्टि हुई कि दुकान उनकी है ही नहीं। रूपये मांगे गये तो तारीखें दी जाने लगी, जिससे परेशान होकर महिला ने कोतवाली पुलिस को शिकायत सहित आपस में किये गये सौदे के शपथ पत्र की प्रतिलिपि और खातों में दिये गये रूपयों की डिटेल देते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
यह किया नटवरलाल ने
शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि वह नगर के वार्ड नंबर 14 शारदा कालोनी की निवासी है, अमलाई में रहने वाले नीरज मिश्रा पिता राजभान मिश्रा और साहू नामक महिला उनसे पूर्व में परिचित थे, दोनों ने मुख्य डाक घर के बगल में नपा कार्यालय के नीचे दुकान नंबर 24 का मालिक होना बताया। मौके पर जाकर दुकान खोलकर दिखा दी, जिसके बाद सौदा हो गया, पूरी राशि चेक और खातों सहित नगद में भी ली गई, लेकिन जब दुकान का कब्जा लेने पहुंचे तो, हंसराज चौधरी नामक व्यक्ति विवाद करने लगे, नगर पालिका से जब जानकारी ली तो, दुकान हंसराज चौधरी की होना पाया गया। दुकान न मिलने पर राशि वापस मांगी तो, तारीखें देने लगे। प्रार्थी से 13 लाख 60 हजार रूपये की ठगी की गई।
इस तरह ली राशि
प्रार्थिया ने बताया कि 1 लाख रूपये अग्रिम राशि ली गई थी और उसके बाद 8 लाख 50 हजार रूपये अलग-अलग किश्तो में लिये गये, 12 अगस्त 2019 को शपथ पत्र निष्पादित किया गया, जिसमें 9 लाख 50 हजार रूपये प्राप्त करना स्वीकार किया गया। बाद में 13 अगस्त 2018 को एचडीएफसी बैंक के खाते से 1 लाख 80 हजार रूपये और यूनियन बैंक के खाते से 1 लाख 20 हजार रूपये और इसके बाद 7 सितम्बर को एचडीएफसी बैंक से 1 लाख 10 हजार रूपये कुल 13 लाख 60 हजार रूपये लेने के बाद न तो दुकान मिली और न ही राशि वापस हो रही है।
खुलेआम घूम रहे नटवरलाल
आवेदिका ने बताया कि उसने कई बार नीरज मिश्रा और कथित महिला से संपर्क कर रूपये वापिस करने की गुजारिश की, लेकिन उन्हें केवल गुमराह किया जाता रहा, उन्होंने बताया कि पहले फोन पर बातचीत हो जाती थी, लेकिन अब फोन उठाना बंद कर दिया है। संपर्क करने जब उनके घर जाओ तो वे मिलते भी नहीं है। आवेदिका ने पुलिस को दिये गये आवेदन में वॉटसएप चैटिंग के दौरान नीरज मिश्रा के द्वारा जल्द पैसे वापस करने के मैसेज के स्क्रीन शॉट दिये हैं, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि रूपये लिये गये थे।

आवंटित दुकान बेचना भी गलत
यह बात भी सामने आई की नीरज मिश्रा और कथित महिला द्वारा जिस दुकान का सौदा ज्योति मिश्रा से किया गया था, वह दुकान उनके स्वामित्व की नहीं थी, यदि होती भी तो नगर पालिका द्वारा जिन नियमों के तहत बोली में वह तथा अन्य दुकाने आवंटित की गई है, वह किसी भी स्थिति में अन्य को विक्रय या किराये नामें में नहीं दी जा सकती, सबकुछ जानते हुए दोनों ने धोखाधड़ी कर लाखों रूपये ठग लिये

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