पीएम आवास के लिए जीआरएस ने लिए थे हितग्राही से 25 हजार

कलेक्टर ने 24 घंटे के भीतर महिला को 50 हजार कराये वापस
रिश्वत लेने के बाद भी रोजगार सहायक महिला का नहीं कर रहा था काम
जनसुनवाई में पहुंची थी फरियाद लेकर कलेक्टर दर

उमरिया। मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में करकेली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बड़ागांव में रहने वाली ननकी कोल ने शिकायत दी थी कि रोजगार सहायक सुबोध सिंह ने प्रधानमंत्री आवास बनवाने के लिए 25 हजार रूपये लिए थे, लेकिन आवास नहीं बनवाया गया, आमतौर पर ऐसे मामलों में प्रशासन जांच के आदेश देने के साथ ही अमूमन हितग्राहियों पर विश्वास नहीं करता कि वह सच बोल रहे हैं, कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले तत्काल जांच करवाई, फिर रोजगार सहायक को कार्यालय बुलाकर फटकार लगाई की अगर उसने महिला हितग्राही से रिश्वत ली है तो उसके रूपये लौटा दे, नहीं तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी, जिसका सार्थक परिणाम सामने आया, भयभीत जीआरएस ने 24 घंटे े भीतर महिला हितग्राही को उसके परिवार के सामने रिश्वत से ली गई दुगनी रकम वापस की।
तत्काल कराई जांच
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने पीसीओ रामलखन साकेत को बड़ागांव भेजकर पूरे मामले की जांच कराकर रिपोर्ट तलब की, रिपोर्ट में यह पाया गया कि रोजगार सहायक ने पीएम आवास दिलवाने के लिए महिला से वास्तव में 25 हजार रूपये लिये थे, जिसके बाद कलेक्टर ने रोजगार सहायक को अपने कार्यालय बुलाकर कार्यवाही का भय दिखाकर यह प्रमाणित कराना चाहा कि अगर उसने रिश्वत ली है तो वह खुद ही रिश्वत की राशि महिला हितग्राही को वापस करे, जिससे की अपराध प्रमाणित हो सके, आमतौर पर ऐसे मामलों में शिकायत प्रमाणित नहीं हो पाती।
दिलवाई दुगनी राशि
कलेक्टर ने महिला हितग्राही ननकी बाई को रोजगार सहायक सुबोध सिंह से उसके परिवार और जनपद के आलाधिकारियों की समक्ष ली गई रिश्वत की 25 हजार रूपये की राशि से दुगनी राशि 50 हजार रूपये दिलवाई, यह पूरा निराकरण 24 घंटे के भीतर किया गया, जिससे यह प्रमाणित हो गया कि रोजगार सहायक ने महिला से शासकीय योजना में रिश्वत ली थी, वह भी हितग्राही मूलक योजना के तहत बनने वाले सरकार के महत्वकांक्षी योजना प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत, जो कि दण्डनीय अपराध की श्रेणी में शामिल है।
पद से होगा पृथक
हितग्राही मूलक योजना में रिश्वत लेने का आरोप ग्राम पंचायत बड़ागांव के रोजगार सहायक सुबोध सिंह के द्वारा जांच और दुगनी राशि लौटाये जाने के बाद प्रमाणित होने पर पंचायत राज अधिनियम के तहत कलेक्टर के द्वारा कथित ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को जल्द ही सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जायेगी, जिसके पीछे यह उद्देश्य भी सामने आया कि भविष्य में जिले के कोई भी शासकीय सेवक हितग्राही मूलक योजना में हितग्राहियों से रिश्वत की मांग न कर सकें।
(बॉक्स बनाकर लगाये)
हितग्राही सीधे कर सकते हैं संपर्क
कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने बताया कि अगर जिले भर में शासकीय सेवक चाहे वह अधिकारी हों या कर्मचारी हितग्राही मूलक योजना में किसी भी रूप से रिश्वत की मांग हितग्राहियों से करते हैं तो वह जनसुनवाई के अलावा सीधे उनसे मुलाकात करके इसकी जानकारी दे सकते हैं, ताकि उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जा सके। इसके अलावा सभी ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारियों को भी कलेक्टर ने निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारियों पर हितग्राही मूलक योजना के सफल क्रियान्वयन और गड़बड़ी न करने और नजर रखने के निर्देश जारी किये हैं, ताकि इन योजनाओं में भ्रष्टाचार की दीमक अपने पैर न पसार सके।

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