प्राचार्य डाइट श्री मंगलानी को मिला सम्पूर्ण वित्तीय अधिकार

Shirish NandanShrivastava@ 9407070665

   खबर का असर

डाइट संस्थान में वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू
चार माह से वेतन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों  के   वेतन भुगतान की  प्रक्रिया शुरू

शहडोल।   जिला शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान के कर्मचारियों में उस समय ख़ुशी का माहौल निर्मित हो गया जब चार माह से वेतन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को  वेतन भुगतान प्रक्रिया के शुरू होने का समाचार मिला।  उल्लेखनीय है कि  जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान के कर्मचारियों का चार माह से वेतन भुगतान नही हुआ था  जिसके कारण सभी बहुत परेशान थे और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे थे।   लेकिन अब वेतन भुगतान की  प्रक्रिया शुरू हो गई है।  इस संबंध में  सक्षम अधिकारी आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र  के विभागाध्यक्ष  ने पत्र क्रमांक 679 दि 03/06/2020  जIरी कर प्रभारी प्राचार्य को आहरण संवितरण प्रभार सौपने के निर्देश कर  दिए   और इसी आदेश  की तामीली के लिए    नियमानुसार कार्यवाही कर जिला प्रशासन द्वारा प्रभारी प्राचार्य   आर.के. मंगलानी को   पूर्व से प्राप्त वित्तीय अधिकार  यथा स्थिति  बरकरार रखते हुए नियमानुसार  सौपकर    उन्हें प्राप्त आहरण संवितरण अधिकार हेतु अनुमति  देदी  I   बताया जा रहा कि वेतन निकलने में       देरी     प्रभारी प्राचार्य को आहरण संवितरण अधिकार नियमानुसार पूर्व से प्राप्त होने पर भी प्रभार नहीं  सौपने के कारण  रहा था जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने पिटीशन 3379/2020 पर स्थगन प्रदान कर  यथा स्थिति  का निर्णय दिया था

नियमो की अवहेलना कर कनिष्ट को दिया था प्रभार

माननीय उच्च न्यायालय ने  १० फरवरी  को तत्कालीन कलेक्टर के  १ फरवरी   को दिए गए  आदेश पर नियमानुसार  न  होने पर भी   और  म.प्र वित्तीय शक्ति पुस्तिका के तहत प्रदत्त  नियमों की अवेहलना  कर    संस्थान में कनिष्ठ पद पर होते हुए भी जूनियर व्यक्ति फतेह सिंह को प्रभारी   बनाया जाना समझ से परे था।    कुर्सी की चाह के कारण वे  चर्चा में आ गये थे   इसी कारण   निर्मित  परिस्थिति  के चलते संस्थान के  कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा था।    इस पूरे मुद्दे में शासन के दखल एवं    कलेक्टर  के नियमानुसार ट्रेज़री अधिकारी से प्राप्त नियम एवं टीप को मद्देनजर रखते हुए म.प्र वित्तीय शक्ति पुस्तिका के उल्लेखित नियम के अनुसार एवं शासन के आदेशों के अनुरूप  आर.के मंगलानी को  समस्त  आहरण संवितरण अधिकार की अनुमति प्रदान  कर दी है  Iमाननीय उच्च न्यायालय के स्थगन उपरांत यथास्थति अनुसार एवं राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशानुसार हुई नियमानुसार प्रक्रिया से वेतन भुगतान की कार्यवाही  प्रारम्भ हो गई है जबकि अब जब सब सामान्य हो गया है तब भी कुछ  , असामाजिक तत्व एवं उदासीन व्यक्ति अब भी डाइट के बारे में फैला रहे अर्नगल बातें कर भ्रमित कर रहे है।

प्राचार्य को प्राप्त है समस्त वित्तीय अधिकार

वरिष्ठता क्रम को दरकिनार कर और  नियमों को न मानते हुए  कनिष्ठ कर्मचारी श्री सेहरा  कलेक्टर के आदेशों को नहीं मानना चाहते जिस कारण जिला प्रशासन की शाखाओं एवं इकाईओं पर सवाल उठा रहे हैं और म.प्र सेवा  आचरण नियम-1965 के सेक्शन 3 का उल्लंघन किये जा रहे हैं।   परन्तु नियमों की माने तो विगत दो वर्षों से डाइट प्राचार्य (कार्यालय प्रमुख) के प्रभार का वहन सक्षम अधिकारी राज्य शिक्षा केंद्र विभागाध्यक्ष ,स्कूल शिक्षा विभाग प्रशासकीय विभाग,भोपाल म.प्र शासन के आदेश दिनांक 07 जनवरी  के अनुरूप एवं तब के कलेक्टर नरेश पाल के आदेश दिनांक 04 अप्रैल  उपरांत  पदस्थ  वरिष्ठ एवं विज्ञप्त राजपत्रित अधिकारी वरिष्ठ व्याख्याता   आर.के मंगलानी द्वारा किया जा रहा है ।  चूँकि शासन द्वारा डाइट प्राचार्य के प्रभारी पद को मप्र. वित्तीय शक्ति पुस्तिका के सेक्शन-1 के उल्लेखित अनुक्रम के अनुसार आहरण संवितरण अधिकारी पूर्व में घोषित किया जा  चुका है और प्राचार्य का प्रभार ग्रहण करते ही आहरण संवितरण अधिकार स्वतः ही प्रत्यावर्तित हो जाते हैं  क्योंकि समस्त अधिकार  प्राचार्य के पद में प्राप्त व निहित हैं जो  कि  प्राचार्य का प्रभार ग्रहण करते ही आर.के मंगलानी को   प्राप्त हो गए थे और वर्तमान में भी प्राप्त है।   इस बात का  उल्लेख राज्य शिक्षा केंद्र म.प्र.राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद् ,स्कूल शिक्षा विभाग भोपाल मध्यप्रदेश के आदेश क्रमांक 16114 दिनांक 08.07.1993 में भी स्पष्ट रूप से किया गया है ।      जिस कारण से   तत्कालीन  कलेक्टर नरेश पाल के आदेश में किसी अवधि का उल्लेख भी नही था एवं इसी कारण से माननीय उच्च न्यायालय ने कलेक्टर नरेश पाल के आदेश दिनांक 04/04/2018 को सही मान कर 01 फरवरी के नियम विरुद्ध आदेश पर पर 10 फरवरी   को स्थगन आदेश दिया I

राज्य शिक्षा केंद्र  को नहीं थी खबर

१ फरवरी  को न जाने कौन सी आपात की स्थति   थी  कि  शासन , स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य शिक्षा केंद्र (एस.सी.ई.आर.टी) के नियमों के विपरीत जाकर म.प्र वित्तीय शक्ति पुस्तिका के नियमों का उल्लंघन करके जूनियर को प्राचार्य का प्रभार मिला जबकि सक्षम अधिकारी आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र (विभागाध्यक्ष),स्कूल शिक्षा विभाग,भोपाल के आदेश पत्रांक/101/02/2003/82 दिनांक-07/01/2004 के अनुसार प्राचार्य के पदीय दायित्वों का निर्वहन संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किये जाने का निर्देश है परन्तु सूत्रों की माने तो उस दिन प्रभारी प्राचार्य बनने की जल्दी में संस्थान में वरिष्ठता क्रम में  तीसरे नंबर पर होते हुए भी फतेह सिंह  सेहरा ने नियम विरुद्ध तरीके से शिक्षा विभाग की संरचना की गलत व्याख्या की और खुद को सीनियर बताकर स्थापना को अँधेरे में रख कर आदेश टाइप करवाया जबकि नस्ती ओआईसी को देखने के लिए थी  जिसे भ्रमित कर   एवं कलेक्टर के दस्तखत करवाकर जल्दबाजी में आदेश  करवाए गए  और नस्ती ओआईसी को मार्क करवा दी जबकि इन नियम विरुद्ध कारनामो में कोषालय से भी टिप नहीं ली गई और पूर्व की तरह आहरण संवितरण भी म.प्र वित्तीय शक्ति पुस्तिका के नियमों का उल्लंघन करवाकर छः माह की गलत व्याख्या करके फतेह सेहरा ने प्राप्त कर लिए, जबकि डाइट शहडोल संस्थान काफी पुराना है एवं काफी वर्षों से सेवा में है जिसके  किसी को भी आहरण संवितरण अधिकारी घोषित करने की जरुरत नहीं  है ऐसा किया जाना   नियम विरुद्ध था।

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