बडे हादसो के रोकथाम हेतू इंजीनियरिंग के दो बच्चो ने किया कमाल

इंदौर(सम्भु यादव)। आईआईटी मद्रास से पासआउट हुये विकास पोद्दार और आईआईटी खड़गपुर से पासआउट आशुतोष उपाध्याय ने किया इनोवेशन ,आईआईटी मद्रास से पासआउट इंदौर के रहने वाले विकास पोद्दार और आईआईटी खड़गपुर से पासआउट उज्जैन के आशुतोष उपाध्याय ने तैयार किया है।आईआईटी के दो इंजीनियरों ने सेल्फ बैलेंस स्कूटर तैयार किया है। यह वॉइस कमांड यानी आपकी आवाज से कंट्रोल होगा। साथ ही इसे वॉइस कमांड से ही पार्क कर सकेंगे और पार्किंग से बाहर भी निकाल सकेंगे।
यह स्कूटर के असंतुलन से होने वाले हादसे रोकने में मददगार है। स्कूटर की खासियत यह है कि बैलेंस बनाने के लिए आपको जमीन पर पैर टिकाने की जरूरत नहीं होगी।
दोनों ने साथ में मुंबई में लाइगर मोबिलिटी स्टार्टअप शुरू किया। विकास ने भास्कर को बतायाए ज्यादातर दुर्घटनाएं गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ने से होती है। इस समस्या के समाधान के लिए हमने यह स्कूटर डिजाइन किया है। आशुतोष ने बतायाए हमारी तकनीक के जरिए स्कूटर खुद बैलेंस हो सकता हैए इसलिए स्कूटर चलाने वाले को पैरों के सहारे स्कूटर का बैलेंस बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं होगी।

प्रोडक्शन और लॉन्चिंग की तैयारी में युवको के साथी लगे जोरो से

आईआईटी मुंबई से हमें दो राउंड में फंडिंग मिली। अब हम इसके प्रोडक्शन और लॉन्चिंग की तैयारी में लगे हैं।
विकास के मुताबिकए इससे भीड़ भरी सड़कों पर गाड़ी चलाना आसान होगा। हमारे प्रोजेक्ट के लिए आरंभिक पूंजी लाइगर मोबिलिटी के संस्थापकों ने लगाई।
बैलेंसिंग तकनीक ऐसे काम करेगी
इस तकनीक में काफी बडे- बडे गाड़ी में लगे सेंसर गाड़ी से जुड़े डेटा प्रोसेसर को भेजते हैंए जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिथ्म का इस्तेमाल करता है। यह प्रति सेकंड एक हजार से ज्यादा बार होता हैए ताकि स्कूटर बंद रहे तब भी बगैर स्टैंड के संतुलित खड़ा रहे।

स्कूटर को खड़ा करने जमीन पर पैर टिकाने की जरूरत नहींए गाड़ी में लगे सेंसर बिना स्टैंड के ही नियंत्रित करेंगे

बडे हादसो के रोकथाम हेतू इंजीनियरिंग के दो बच्चो ने किया कमाल

इंदौर(सम्भु यादव)। आईआईटी मद्रास से पासआउट हुये विकास पोद्दार और आईआईटी खड़गपुर से पासआउट आशुतोष उपाध्याय ने किया इनोवेशन ,आईआईटी मद्रास से पासआउट इंदौर के रहने वाले विकास पोद्दार और आईआईटी खड़गपुर से पासआउट उज्जैन के आशुतोष उपाध्याय ने तैयार किया है।आईआईटी के दो इंजीनियरों ने सेल्फ बैलेंस स्कूटर तैयार किया है। यह वॉइस कमांड यानी आपकी आवाज से कंट्रोल होगा। साथ ही इसे वॉइस कमांड से ही पार्क कर सकेंगे और पार्किंग से बाहर भी निकाल सकेंगे।
यह स्कूटर के असंतुलन से होने वाले हादसे रोकने में मददगार है। स्कूटर की खासियत यह है कि बैलेंस बनाने के लिए आपको जमीन पर पैर टिकाने की जरूरत नहीं होगी।
दोनों ने साथ में मुंबई में लाइगर मोबिलिटी स्टार्टअप शुरू किया। विकास ने भास्कर को बतायाए ज्यादातर दुर्घटनाएं गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ने से होती है। इस समस्या के समाधान के लिए हमने यह स्कूटर डिजाइन किया है। आशुतोष ने बतायाए हमारी तकनीक के जरिए स्कूटर खुद बैलेंस हो सकता हैए इसलिए स्कूटर चलाने वाले को पैरों के सहारे स्कूटर का बैलेंस बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं होगी।

प्रोडक्शन और लॉन्चिंग की तैयारी में युवको के साथी लगे जोरो से

आईआईटी मुंबई से हमें दो राउंड में फंडिंग मिली। अब हम इसके प्रोडक्शन और लॉन्चिंग की तैयारी में लगे हैं।
विकास के मुताबिकए इससे भीड़ भरी सड़कों पर गाड़ी चलाना आसान होगा। हमारे प्रोजेक्ट के लिए आरंभिक पूंजी लाइगर मोबिलिटी के संस्थापकों ने लगाई।
बैलेंसिंग तकनीक ऐसे काम करेगी
इस तकनीक में काफी बडे- बडे गाड़ी में लगे सेंसर गाड़ी से जुड़े डेटा प्रोसेसर को भेजते हैंए जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिथ्म का इस्तेमाल करता है। यह प्रति सेकंड एक हजार से ज्यादा बार होता हैए ताकि स्कूटर बंद रहे तब भी बगैर स्टैंड के संतुलित खड़ा रहे।

स्कूटर को खड़ा करने जमीन पर पैर टिकाने की जरूरत नहींए गाड़ी में लगे सेंसर बिना स्टैंड के ही नियंत्रित करेंगे

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