मंत्री ने दिया 1 मिनट का समय, निराश हुए अतिथि शिक्षक

15 वर्षो की समस्या सुनाने पहुंचे थे अतिथि शिक्षक, 1 मिनट में पूरी हुई बात
मंत्री के बुलावे पर सुबह 8 बजे उनके घर पहुंचे थे अतिथि शिक्षक

यूं तो भारतीय संस्कृृति व परम्परा में अतिथि को देव का दर्जा दिया गया है, इसलिए अतिथि देवो भव: हमारी परम्परा है, लेकिन मंत्री बिसाहूलाल ङ्क्षसह ने अतिथि शिक्षकों को बुलाकर 1 मिनट में 15 सालों से चल रही उनकी मांग को कैबिनेट में रखने की बात कहकर फिर उन्हे निराश लौटा दिया।

अनूपपुर। पूरे प्रदेश में अतिथि शिक्षकों के हालत दिन-ब-दिन दयनीय होते जा रहे है, उच्च शिक्षा गृहण करने के बाद शिक्षक के रूप में अतिथि का दर्जा पाकर भी वह अपने आप को आत्मनिर्भर समझते है, लेकिन जब उन्हे किसी राजनीतिक के द्वारा आश्वासन पर आश्वासन देकर छला जाता है तो वह विवश होकर आंदोलन के लिए खडे होते है, अनूपपुर के अतिथि शिक्षकों का हाल किसी से छिपा नही है, इसके बावजूद उन्हे अनूपपुर से भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने बिसाहूलाल से काफी कुछ उम्मीदे थी, लेकिन मुलाकात के पहले ही 10 जुलाई को उनके साथ नेताओं ने अपमानित भाषा का प्रयोग कर उन्हे मिलने से रोक दिया, यह बात अलग थी कि मंत्री के कानो तक उनकी आवाज पहुंची और मंत्री जी ने अपने जन्म दिवस 1 अगस्त को उन्हे अपने फार्म हाउस पर मिलने को बुलाया।


जिलेभर से पहुंचे थे अतिथि शिक्षक
अतिथि शिक्षकों को मंत्री बिसाहूलाल ङ्क्षसह ने एक अगस्त को मिलने का समय दिया था, तो अतिथि शिक्षक 10 जुलाई से 1 अगस्त तक इंतजार करने के बाद शनिवार को उनके फार्म हाउस पहुंचे, जहां घंटो इंतजार के बाद मंत्री जी से उनकी मुलाकता हुई, लेकिन बीते 15 सालो से चल रहे अतिथि शिक्षकों के मामले मंत्री बिसाहूलाल ने 1 मिनट में यह बात कहकर पूरा कर दिया कि मैं कैबिनेट में आपकी बात रखूंगा। कैबिनेट में कब मंत्री जी रखेंगे यह तो वही जान सकते है, लेकिन 8 बजे से दोपहर तक उनके दर पर कई किलोमीटर का सफर कर पहुंचे अतिथि शिक्षकों के संबंध में तनिक भी मंत्री जी ने नही सोचा।
सोचने को मजबूर अतिथि शिक्षक


2018 के विधानसभा आम चुनाव में अतिथि शिक्षको का नारा पूरे प्रदेश में गंूजता रहा। ‘दिग्गी भी पछताया था, मामा भी पछतायेंगे’ परिणाम सबके सामने आ गया, लेकिन 15 माहों में राजनैतिक उठापटक के बीच एक बार फिर मामा को मुख्यमंत्री का ताज मिल गया, लेकिन पूरे प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के साथ मंत्रियों का वर्ताव अपने उस नारे को एक बार फिर गुंजायेमान करने को विवश होता दिखाई पड रहा है, बहरहाल बिसाहूलाल ङ्क्षसह से मिलने के बाद लौटे अतिथि शिक्षक विचार मंथन करते हुए में खडे रहे।
उलझ सकता है गणित
चुनावी दृष्टिकोण से हम अनूपपुर विधानसभा उपचुनाव में अतिथि शिक्षको की भूमिका पर जनर डाले तो यहां लगभाग 2200 से ज्यादा अतिथि शिक्षक है ओर उनके परिवार को जोडा जाये तो आंकडा 10 हजार के आस-पास मतदाताओं का पहुंच जायेगा, पहले तो भाजपा नेताओं ने अतिथि शिक्षको का अपमान किया, अब फिर मंत्री ने निर्धारित समय व उनकी बात पूरी न सुनकर उन्हे निराश लौटा दिया, ऐसे में समय रहते शीर्ष नेतृत्व ने कमान नही संभाली तो गणित उलट सकता है।
उपचुनाव के पहले हो निराकरण
अतिथि शिक्षक संघ के द्वारा परासी में ही रास्ते में बैठक आयोजित का निर्णय लिया कि उनकी समस्याओं का निदान अगर उपचुनाव के पहले नही किया गया तो वह आंदोलन की राह पकडेंगे, इतना ही नही यह भी तय किया कि अगर किसी भी पार्टी ने साथ नही दिया तो वह स्वयं प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतरेंगे, अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनलाल साहू ने कहा कि हर बार हमें निराशा ही हाथ लगती है, इसलिए इस उपुनाव के पहले हमारी समस्याओं का निराकरण होना चाहिए।
बैठक सैकडों अतिथि हुए उपस्थित
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बिसाहूलाल सिंह के गृह ग्राम परासी स्थित फार्म हाउस में मुलाकात करने के बाद सभी अतिथि शिक्षकों ने रास्ते में ही बैठक आयोजित की, बैठक में जिला उपाध्यक्ष लोकनाथ कोल, सक्रिय पदाधिकारी रावेन्द्र उपाध्याय, विपिन तिवारी के साथ सदस्य अमित पटेल, अनिल तिवारी, रामचंद्र तिवारी, अरविन्द पटेल, रामजी शर्मा, उमा सोनी, नेहा दुबे, वंदना साकेत, घनश्याम मिश्रा, प्रभात नामदेव, आंचल तिवारी, वीरेन्द्र तिवारी, प्रवीण उपाध्याय, प्रदीप सोनी, हरीश चौधरी, रामनरेश राठौर, छत्रपाल केवट, प्रीतम प्रजापति, मोहन प्रजापति, विवेक पटेल, परीक्षित सिंह सहित सैकडों अतिथि शिक्षक मौजूद रहे।

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