मुख्यालय का कबाडी बना करोड़ो का कारोबारी

Ajay Namdev-7610528622

जिलेभर के कबाडियों का किंग है जानू
ठेका होने के बाद सुस्त गति से उठ रहा मोजर बेयर से स्क्रैप

जिले ही नही बल्कि संभागभर के कबाड के ठीहो का सरगना बने मुख्यालय के जानू नामक कारोबारी के आगे सभी थानो के वर्दीधारी नतमस्तक से नजर आ रहे है। जुगाड का आलम यह है कि मोजर बेयर में स्क्रैप का कारोडो का ठेका मिलने के बाद, वर्तमान में लोहे के दामों में गिरावट होने के कारण माल नही उठाया जा रहा है, यही नही जिलेभर की कबाडी खरीदा हुआ कबाड किसे और किस दर पर देंगे यह भी जानू ही तय करता है।

अनूपपुर। दशकों से जिला मुख्यालय में कबाड के कारोबार का केन्द्र बिन्दु रहे जानू को यह कारोबार विरासत में मिला है। पहले सिर्फ अनूपपुर शहर तक सीमित रहे धोखधडी के इस कारोबार में अब शहर सहित जिले की सीमाएं लाघ ली है। हालात यह है कि मुख्यालय का काम अब जानू के गुर्गे देख रहे है और जानू खुद बुढार में स्थित संभाग के सब से बडे कबाड के ठीहे का केन्द्र बिन्दु बन बैठा है। साझे के इस कारोबार में जानू अनूपपुर जिले की लगभग कबाड दुकानों के साथ ही शहडोल की भी कुछ कबाड दुकानों को अपनी मोबाइल से ही संचालित कर रहा है। किस दुकान में कितना चोरी का माल खरीदा गया और वह किस गाडी से किस दर पर कहां पलटी होगा और जबलपुर की मंडी में कैसे पहुंचेगा यह सब जानू के इशारो पर होता है, यहीं नही जानू के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज पांच से छ: वर्ष पहले छोटी सी चाल में कबाड खरीदने वाले जानू ने मोजर बेयर प्लांट के स्क्रैप खरीदने का लाखों का ठेका हासिल किया हुआ है। यहां से निकलने वाले एक नंबर के स्कै्रप की आड में क्या-क्या खेल होते है यह वर्दीधारियों से छिपा नही है।

मुख्यालय में भी सजी दुकान
जिला मुख्यालय में इन दिनो कबाड के व्यापार पुलिस के शह पर जोरो पर है। जिला मुख्यालय मे स्थित जानू कबाडी के अड्डे में कोयलंचल क्षेत्रों से पिछले कई सालों से कॉलरी के कलपूर्जो, कबाड़ आदि की बदतस्तुर चोरी कर लाया जाता है। देखा जाये तो अनूपपुर में पुलिस के नाक के निचे कबाड़ का गोरख धंधा पिछले कई वर्षो से चल रहा है। एैसा नहीं है कि पुलिस को इस बात कि जानकारी नही है। बंड़े-बड़े ट्रक और गाडिय़ों में हर तीसरे और चौथें दिन कबाड़ से भरी गाडी जाति है। पुलिस की मिली भगत से यह खेल चलता है। जिससे बड़े कबाडीयों द्वारा खदान के आय दिन लोह सामग्री वह बेशकिमती मशीन उपकरण कि चोरी करवाया जाता है। तथा दिन दहाड़े ही गाड़ी में लोड कर अन्य स्थानों के लिए निकल जाते है। वैसे तो कहने को जानू का एक ही ठीहा जिला मुख्यालय में है परन्तु जिले भर मे जानू के कई अवैध ठीहे संचालित हो रहें है।

चोरी का समान को ठिकानें लगाता है जानू
शहर में इन दिनों चोरी के सामान का ठिकाना लगाने का काम धड़ल्ले के साथ किया जा रहा है। पुलिस के आंखों के नीचे कबाड़ी दुकानों की आड़ में इस गोरखधंधे का संचालन किया जाता है। शहर में दर्जनों कबाड़ की दुकाने खुली हुई है। कहने के लिए तो दुकान पुरानी कबाड़ खरीदने व बेचने का दुकान बताया जाता है, पर दुकान के अंदर मेन धंधा चलता है। इन कबाड़ दुकान में भारी मशीनो के पार्ट और तांबे, सिल्वर के तार के साथ अन्य समानों को डिस्मेंटल करनें का कार्य किया जाता है।

पुलिस नहीं करती है कार्रवाई
शहर में खुले कबाड़ी दुकानों की जांच पुलिस द्वारा नहीं की जाती है। कोतवाली अंतर्गत कबाड के ठीहों में प्रतिदिन लाखों के चोरी का सामान आता है, जिसे डिसमेंटल कर बेच दिया जाता है। वहीं कोतवाली से महज ५०० मीटर की दूरी पर स्थित कबाड के ठीहे में पुलिस की नजर नही पडती है। बताया जाता है की बकायदा सेटिंग के बूते जानू अपनी कबाड की दुकान धड़ल्ले से चलाता है। कुछ महीने पहले ही जानू के यहां से एक पिकअप में लोड चोरी के तार पाया गया था, पुलिस गाडी को थाने तक ले गई और कार्यवाही के नाम पर औचारिकताएं पूर्ण कर जानू को फिर कारोबार में चलता कर दिया।

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