यहां कोरोंना सर्वे नहीं संक्रमण बटोर रही एएनएम और आशा कार्यकरता.!

यहां कोरोंना सर्वे नहीं संक्रमण बटोर रही एएनएम और आशा कार्यकरता
शहडोल। जिले में कोरोना संक्रमण का खतरा दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों पर एक नहीं दो नहीं तीसरी बार सर्वे कराया जा रहा है। लेकिन ये सर्वे संक्रमण को फैलाने के लिए तो नहीं किया जा रहा है!
बगैर सुरक्षा व्यवस्था के मैदान में सर्वे टीम
शहर और ग्रामीण इलाकों में कोरोनावायरस के संक्रमण के खतरे के बीच शुरुआत में सर्वे और टेक होम राशन किया जा रहा था। इसमें जुटीं अधिकांश आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के पास न मास्क रहे न ही ग्लब्ज और सैनिटाइजर। किसी के पास मास्क है तो ग्लब्ज और सैनिटाइजर नहीं है। क्योंकि विभाग ने ये सामग्री उन्हें उपलब्ध नहीं कराई है। यही स्थिति अब जिलेभर में बढ़ते पॉजिटिव केशो के कारण फिर करानी पड़ी है। जहां स्वास्थ्य विभाग की एएनएम और आशा कार्यकरता के जरिए किया जा रहा है। खतरे भरे इन हालात में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एएनएम और आशा कार्यकर्ता जान जोखिम में डालकर काम कर रहीं हैं। मास्क, ग्लब्ज और सैनिटाइजर नहीं होने के कारण उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें कपड़ा मुंह पर बांधना पड़ रहा है।

सही जानकारी देने से कतराते लोग

कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे सर्वे के तहत सर्दी-जुकाम और बुखार से पीडि़त लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। लेकिन अधिकांश लोग यह जानकारी देने से बच रहे हैं। उनके मन में यह डर है कि बीमारी की बात बताने पर कहीं उन्हें 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में न रहना पड़े। लोगों द्वारा सही जानकारी नहीं देने पर भी आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं वे बिना सुरक्षा साधनों के काम कर रहीं हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है उन्हें मास्क, ग्लब्ज और सैनिटाइजर उपलब्ध कराया गया। लेकिन वास्तविकता यह है कि जितनी मात्रा में यह होना चाहिए उतना नहीं है।
आखिर कहा जा रहें मास्क, ग्लब्ज और सेनेटाइजर
सूत्रों की माने तो जो कोरोना योद्धा का नाम दे कर इन्हे घर घर तो भेज दिया जा रहा है। लेकिन इन योद्धाओं को दिए जाने वाले टूल्स आखिर कहा रख लिए जा रहे हैं। जिला अस्पताल के स्टोर रूम में रखी जरूरी सामग्री क्यों नहीं दी जा रही हैं। ये कार्यकर्ता क्यों अपनी और घरों में करने वाले लोगों को संकट में डालने का काम कर रही है। वहीं आज पांडवनगर के वार्ड नं 5/7 में लगी दर्जनों लोगो की टीमों में एक दो लोगों के पास ही ग्लब्ज देखा गया बाकी सारे करता धर्ता बगैर सुरक्षा व्यवस्था के ही भूखे प्यासे घरों में सर्वे करते देखे गए। कार्यकर्ता ने बताया कि हम सुबह 9 बजे से ही सर्वे के कार्य में वार्ड में लग जाते हैं जो की दोपहर के 2 बजे तक यह कार्य किया जाता है।
कौन है जिम्मेदार….?
बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर के आदेश से दोबारा चिन्हित इलाकों में सर्वे कराया जा रहा है। जहा पहले से ही अंदेशा होने पर घर घर भेजने वाली सर्वे टीम को अधूरी व्यवस्था के साथ मैदान में उतारा जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं। लेकिन इस गैर जिम्मेदारी से विभाग को लेने के देने न पड़ जाए। इस पूरे काम कि सुपरवाईजरी ही एहतियात बरतने में बड़ी लापरवाही कर रही है।

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