राष्ट्रीय योजनाओं के प्रचार के लिए बिहार से आया ठेकेदार

संयुक्त कलेक्टर के आदेश के बाद जारी हुए थे कार्य
मकानों में नंबर प्लेट चस्पा करने की निर्धारित की थी दर
अवैध वसूली की शिकायत के बाद निरस्त हुआ आदेश

(Amit Dubey-8818814739)
उमरिया। जिले भर के ग्रामीण अंचलों में मकानों पर प्रधानमंत्री के द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार, मकान नंबर प्लेट के माध्यम से कराये जाने का एक फरमान संयुक्त कलेक्टर के द्वारा जिले की जनपद पंचायतों को जारी किया गया। आदेश मिलने के बाद ही जनपद पंचायतों ने ग्राम पंचायतों को आदेश जारी कर दिया, साथ में सहयोग के लिए कोटवार, मेट, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशाकार्यकर्ताओं को सहयोग के लिए आदेशित किया गया। जिला मुख्यालय से खेले गये इस खेल में जो आदेश जारी किया गया, उसमें उक्त कार्य बिहार के एक व्यक्ति को सौंपा गया, काम शुरू भी हो गया, लेकिन कुछ दिनों के बाद उक्त आदेश को निरस्त कर दिया गया। कुल मिलाकर पूरी प्रक्रिया कटघरे में खड़ी होती नजर आ रही है और इसमें प्रशासन के बड़े अधिकारी की भी भूमिका संदेह के दायरे में हैं।
30 रूपये निर्धारित की दर
जनपद पंचायत करकेली के द्वारा जारी किये आदेश में उल्लेख किया गया है कि पंचायतराज्य अधिनियम 1993 की धारा 57 के तहत ग्राम पंचायतों में निवासरत ग्राम वासियों के भवन पर नंबर प्लेट लगाया जाना है। जिस पर शासन द्वारा निर्धारित योजनाओं का प्रचार-प्रसार, स्लोगन आदि अंकित रहेगा। उक्त राशि का भुगतान भवन मालिक के द्वारा किया जायेगा। जिसकी कीमत प्रति नंबर प्लेट स्टील (चादर) 30 रूपये निर्धारित की गई, शासन द्वारा किसी भी प्रकार से भुगतान मान्य नहीं किया जायेगा।
बिहार से आया ठेकेदार
जिले में केन्द्र सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए जो प्रयोग किया गया, शायद ही देश या पूरे प्रदेश में न हुआ हो, लेकिन उमरिया में इसकी शुरूआत कर दी गई, चौकाने वाली बात यह है कि उक्त कार्य बिहार के रहने वाले रघुपति उपाध्याय निवासी ग्राम पोस्ट तोरना, थाना शिवनगर जिला रोहतास (सहासाराम) को जिला प्रशासन के द्वारा सौंपा गया, उक्त कार्य कथित ठेकेदार के आवेदन पर ही स्वीकृत कर दिया गया। अचरज की बात यह है कि पूरे प्रदेश या जिले में क्या उक्त कार्य करने वाले अनुभवी लोग नहीं है या फिर यह कार्य स्थानीय स्तर पर नहीं हो सकते, जिसके लिए बिहार से ठेकेदार को बुलाकर काम दिया गया। जानकारों का कहना है कि अगर इस मामले में सूक्ष्मता से जांच हुई तो नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है, उक्त कार्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के जीरो टॉलरेंस को भी चुनौती दे रही है।
12 दिनों तक चला लूट का खेल
12 सितम्बर को उक्त कार्य कथित ठेकेदार के माध्यम से कराये जाने का आदेश जारी होता है, जिसके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रूपये लेकर पर्चियां बांटी जाती हैं, गुणवत्ता विहीन प्लेट लगाने का भी खेल जमकर खेला गया, मामला सामने आने के बाद प्रशासन अपने आपको फंसता देख 24 सितम्बर को उक्त आदेश को निरस्त कर देता है, ग्रामीणों का कहना है कि कहीं पर निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूल किये गये, गुणवत्ता की भी अनदेखी की गई, कुल मिलाकर अपने जुगाड़ के लिए संयुक्त कलेक्टर ने पूरे खेल को अंजाम दिया।
निरस्त कर दिया आदेश
24 सितम्बर को जारी किये गये पत्र में उल्लेख किया गया है कि संयुक्त कलेक्टर के द्वारा योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आवासों में नंबर प्लेट लगाने के लिए जो कार्य आवंटित किया गया था, उसे जिला प्रशासन के द्वारा जारी किये गये आदेश को निरस्त कर दिया गया है। इसलिए उक्त कार्य को निरस्त किया जाता है, इसकी प्रतियां सभी ग्राम पंचायतों को भी भेज दी गई। सवाल यह खड़ा होता है कि चाहे वो केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए वह खुद ही राशि खर्च करती हैं। ये मामला पहली बार आया कि शासन की योजनाओं का प्रचार-प्रसार भवन मालिकों को ही वहन करना पड़ेगा, क्या इस संबंध में केन्द्र या राज्य सरकार ने कोई आदेश जारी किया या नहीं इस मामले की जांच के बाद ही पूरा मामला साफ हो सकेगा।
इनका कहना है…
संयुक्त कलेक्टर के पत्र के बाद ही बिहार के ठेकेदार को काम सौंपा गया था, कुछ दिनों बाद कार्य निरस्त करने का पत्र संयुक्त कलेक्टर के द्वारा जारी किया गया, जिसके बाद कार्य को निरस्त कर दिया गया है।
आर.के.मंडावी
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जनपद पंचायत करकेली

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