वन विभाग के गले की फांस बना मुनारा फरियादी पर फर्जी मामला कायम कर किया जा रहा परेशान

जिले के अधिकांश भाग में वन विभाग की संपदा मौजूद है और इस संपदा पर वैध और अवैध रूप से कब्जा किए जाने की बातें अक्सर सामने आती हैं लेकिन कुछ ऐसे भी मामले होते हैं जिनमें नाहक ही वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी आम जनता को परेशान करके मोटी रकम वसूलने का प्रयास करते हैं ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जहां पर वन विभाग के अधिकारी अपने ही कार्रवाई की जाल में हंसते गए और अब उन्हीं के गले की फांस एक मुनारा बना हुआ है उस मुनारा को अब ना हटाते बन रहा है और ना ही कार्रवाई करते क्योंकि यहां पर सच्चाई की जीत हो रही है और असत्य अब परेशान होते दिखाई दे रहा है हम बात कर रहे हैं। कोयलांचल क्षेत्र से लगे हुए ग्राम पंचायत छोरी में बनी मंगलम आईटीआई के अंदर वन विभाग के मुनारा को लेकर जिसको लेकर इन दिनों वन विभाग का अमला परेशान नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत होने के बाद से अधिकारी कर्मचारी चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका
अनूपपुर। विगत कुछ वर्षों पहले ग्राम पंचायत छोरी निवासी मोहन आहिर की भूमि जमुना कॉलरी निवासी ओपी रजक ने 2013 में खरीदी थी और इसके पश्चात उन्होंने आईटीआई खोलने के लिए अपना भवन निर्माण कार्य शुरू कराया और इससे पहले राजस्व विभाग के अधिकारियों से जमीन का सीमांकन कराया जहां पर राजस्व विभाग के अधिकारी पहुंचकर जमीन का सीमांकन किया तो वहां पर बगल में स्थित वन विभाग की जमीन होने के नाते वन विभाग के कर्मचारी भी सीमांकन के दौरान मौके पर मौजूद रहे। सभी के समक्ष पंचनामा तैयार किया गया और ओपी रजक के भूमि के अंदर मौजूद वन विभाग के मुनारे को हटाने के लिए निर्देशित किया गया, इसके पश्चात फरियादी ओपी रजक ने अपनी जमीन से वन विभाग कारनामा हटाने के लिए 9 अप्रैल 2013 को लिखित आवेदन वन विभाग के सभी अधिकारियों तथा अनूपपुर कलेक्टर को दिया, लेकिन वन विभाग के अधिकारी मुनारा हटाने के बजाय फरियादी को ही परेशान करने की नियत से चक्रव्यू रचने लगे।
बना दिया फर्जी मामला
राजस्व विभाग की जमीन में दर्ज वन विभाग के मुनारे को हटाने के बजाय फरियादी ओपी रजक के खिलाफ तत्कालीन कोतमा रेंजर तथा एसडीओ ने मिलकर फर्जी पीओआर काटते हुए मामला बना दिया जिसको लेकर आरोपी लगातार परेशान रहा, लेकिन उसकी फरियाद कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ शिकायत पर होती रही। फर्जी मामले को लेकर फरियादी लगातार वन विभाग तथा जिला प्रशासन को पत्र लिखता रहा, लेकिन ना तो मुनारा हटाया गया और ना ही फरियादी ओपी रजक को कोई राहत दी गई यहां तक कि लगातार अवैध वसूली के चक्कर में वन विभाग के अधिकारी उसको परेशान करते रहे इस दौरान उससे मोटी रकम भी वसूल किए सब कुछ सहन करते हुए फरियाद इनके जुल्मों का शिकार होता रहा।
लिया सीएम हेल्पलाइन का सहारा
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की हिटलर शाही और अवैध वसूली से परेशान होकर अपने बचाव के लिए फरियादी ओपी रजक ने 12.02.2018 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज करते हुए न्याय की गुहार लगाई। इसके पश्चात वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों में इस मामले को लेकर आंख खुली और फिर शुरू हुआ समझौते का दौर, लेकिन तब तक मामला काफी आगे निकल चुका था और वन विभाग की कथनी और करनी में काफी अंतर सामने आने लगा जिसको लेकर अब मामला उलझ गया है।
कैसे बना दिया प्रकरण
सवाल ये उठता है कि जब राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के समक्ष मुनारा को लेकर पंचनामा तैयार किया गया की मुनारा गलत जगह पर बना हुआ है और उसे वन विभाग को हटाना है तो फिर ओपी रजक के खिलाफ वन विभाग ने प्रकरण कैसे कायम कर दिया और आज उसी मुनार एको हटाने की बात अब वन विभाग कैसे करने लगा सवाल कई हैं लेकिन वन विभाग के पास जवाब कुछ भी नहीं है।
चोरी से तोड़ने पहुंचे मुनारा
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत का निपटारा करने के लिए अब वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी फरियादी के पास चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन मामला अब काफी उलझ चुका है, क्योंकि मुनारा हटाना बिना परमिशन के वन विभाग के लिए आसान नहीं है और फरियादी की मांग है कि परमिशन के उपरांत मुनारा को हटाया जाए लेकिन यहां पर 30 अगस्त 2019 को वन विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी चोरी और बिना किसी पूर्व सूचना के आकर ओपी रजक के मंगलम आईटीआई परिसर के अंदर स्थित वन विभाग के मुनारे को तोड़ने लगे जब वहां जब वहां छात्रों ने वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे तो वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी बहस करते हुए आधा मुनारा तोड़ कर रफूचक्कर हो गए।
इनका कहना है
पूर्व में गलती के कारण मुनारा राजस्व विभाग मैं बना दिया गया था जिसे परमिशन के उपरांत हटाया जाएगा। हमारे किसी भी कर्मचारी के द्वारा मुनारा को तोड़ा नहीं गया है।
रवि शंकर त्रिपाठी
वन परिक्षेत्र अधिकारी, कोतमा

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