शासकीय राशि की जली होली, अब धुरेडी की तैयारी, ग्राम पंचायत करपा में जनवरी माह से लगा है ताला

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करपा। जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम पंचायत करपा इन चार वर्षों के दरमियान लगभग सुर्खियों में रहा है। अखबार की प्रतियां अगर पलटी जाय तो पुष्पराजगढ़ मे हो रहे भ्रष्टाचार के पायदान पर ग्राम पंचायत करपा अव्वल नम्बर में रहा है। पुष्पराजगढ़ में हो रहे गोलमाल की भनक जिले के आला अधिकारियों के साथ कमिश्नर से मंत्री तक सभी को हो रहे भष्टाचार की जानकारी है। लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ कार्यवाही की रस्मअदायगी कर जांच को संम्पन्न करा दिया जाता है। इसके बाद शुरु होता है रस्मअदायगी और जेब भराई का भव्य कार्यक्रम। कार्यक्रम में सभी की भागीदारी सुनिश्चित रहती है। शिकायते होती हैं और होती रहती हैं, लेकिन पुष्परजगढ़ में सचिवों की तूती बोलती है।
न कानून डर न कार्यवाही का भय
ग्राम पंचायत करपा में पदस्थ सचिव भुजलु प्रसाद कुरमेश्वर के हौसलों की दाद देनी होगी। तभी तो ग्राम पंचायत करपा में जंगल राज का आलम व्याप्त है। और इस आपदा के शिकार ग्राम पंचायत करपा के आम नागरिक को होते देखा जा सकता है। सरकार लाख कोशिस कर ले, लेकिन इन भ्रष्ट सचिवों के ऊपर लगाम कसना इतना आसान नही है। जब तक कि कड़ी से कड़ी कार्यवाही नही हो जाती।
घपलों से नही उठा पर्दा
ग्राम पंचायत करपा में अनियमित्तताओ का दौर थमने का नाम नही ले रहा है। जिसे माह अक्टूबर से लगातार करपा में हो रहे भृष्टाचार के मामलों को समय-समय पर उठाता रहा है, और प्रशासन कुंम्भनिद्रा में सोता रहा है। तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत अनूपपुर के अदेसानुसार वसूली हेतु सरपंच-सचिव को छब्बीस लाख की नोटिस जारी कर वसूली को कहा गया था। लेकिन आज तक किसी को ये नही पता कि 26 लाख की वसूली क्या शासन कर पाई और यदि नही तो क्यों नही। सवाल उठता है की अमानत में खयानत के मामले में क्या 420 का मामला पंजीबद्ध नही होना चाहिए। तभी जाके जनता को योजनाओं का लाभ मिलेगा व विकास संभव है।
जनता ने किये सवाल, तो लगा दिया ताला
ग्राम पंचायत करपा में 26 जनवरी को विशेष ग्राम सभा के दौरान जनता ने सचिव के कार्यकाल में हुवे कार्यों की जानकारी व फर्जी रूप से हुये आहरण के सम्बंध में जब सचिव से सवाल जवाब होने लगा तो कूट रचित शिकयत 100 डायल कर अपने आपको को पाक साफ साबित करने का असफल प्रयास किया गया। जिससे आज दिनाँक तक ग्राम सभा की कार्यवाही अभी तक नही हुई। जिसका जिम्मेदार सचिव खुद है जो कि पंचयात में ताला लगा रखा है।
नही मिली आकस्मिक सहायता निधि
दिनाँक 26 जनवरी 2019 से लगातार पंचायत में तालाबन्दी के चलते ग्रामीणों की समस्यों का अम्बार दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की योजनाओं में शामिल महत्वपूर्ण योजना, आकस्मिक मृत्यु सहायता निधि जिससे ससम्मान अंत्येष्टि किया जा सके। ग्राम पंचायत करपा में निवासरत लोग छोटी सी छोटी योजनाओं के लाभ लेने को मोहताज हैं। दिनाँक 26 जनवरी से 6 मार्च 2019 के बीच तीन लोगों का आकस्मिक निधन हो चुका है। जिन्हें तत्काल शासन के अदेशानुसार मुहैया कराना परम आवश्यक है जिसमे से पांच हजार रूपये देने का प्रावधान है। तानाशाह सचिव के चलते गरीब परिवारों को उक्त योजना का लाभ नही मिल पाया है। मृतकों में मंगल बैगा पिता फारसी बैगा, रामिहा पति बल्ली बैगा एवं मजसा पिता हनमत सिंह गोंड हैं जो कि सभी पात्र हैं फिर भी इनका दु:ख दर्द समझने वाला कोई नही हैं।
साहब के बहाने अनेक
अपने कार्यप्रणाली के चलते अखबार की सुर्खियों में बने रहने का अंदाज भी निराला है। कथित तौर पर ये कहा जा रहा है कि तबियत का हवाला देकर सीईओ पुष्पराजगढ़ को आप बीती सुना रहें हैं। मेडिकल के बहाने घर बैठे फर्जी ईपीओ करने से तबियत मस्त हो जाती है। फिलहाल अभी आराम है। ग्राम पंचायत करपा अन्तर्गत लोहारीन टोला में सीसी रोड बनना था। जिसकी लागत 8 लाख 16हजार रूपये है जो की जनपद स्तर का पहला मॉडल रोड कहने पर मजबूर कर देगा। क्योंकि सरकार के सभी काम ऑनलाइन होते हैं लेकिन ग्राम पंचायत करपा में अर्थवर्क भी ऑनलाइन होने लगे हैं। तभी तो 26 जनवरी से लगातार अनुपस्थित होते हुवे भी सचिव 8लाख 16 हजार रूपये की राशी गबन कर धुरेड़ी खेलने के फिराक में है।
पहले भी हो चुकी जांच
पंचयात में हो रहे भृष्टाचार को उजागर करते हुए शासन को आइना दिखाने का एक छोटा सा प्रयास रहा है। 28 जनवरी को (सचिव के मनमाने रवेये के आगे नतमस्तक है प्रशासन) नामक शीर्षक से प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुवे नवागत कलेक्टर अनूपपुर के द्वारा जांच कमेटी कर रिपोर्ट सौपने को कहा गया है। जांच अधिकारी राम रहीस मिश्रा, पीसीओ द्वारा ग्राम पंचायत करपा का आकस्मिक निरीक्षण व जांच किया गया जांच में पाया कि भुजलु प्रसाद कुरमेश्वर 26 जनवरी से आज तक पंचयात से नादरत है। सचिव द्वारा पंचायत में ताला बंद कर रखा गया है व लगातर अनुपस्थित होते हुवे भी क्रमश: वित्तीय भुगतान किया गया है जो कि प्रमाणित भ्रष्टाचार को दर्शाता है
गेंद नवागत के पाले में
22 मार्च 2017 से लगातार शासन-प्रशासन को लिखित, मौखिक रूप में पंचायत में हो रहे अनियमितता के बारे में शिकायत की गई लेकिन हर बार नतीजा सिफर रहा है। अब मामला नवागत कलेक्टर के संज्ञान में देखना होगा कि क्या कार्यवाही होती है य फिर अभयदान देकर बख्स दिया जाता है। फिलहाल पंचायत की रायसुमारी ये है कि ऐसे भ्रष्ट सचिव को पंचायत में नही होना चाहिए।

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