सरकार बदली, लेकिन नहीं बदला विनीत का रसूख?

प्रदेश के हर जिलों से पहुंचती है चढ़ोत्तरी
नीति और आदेशों में सीधे तौर पर अनदरूनी दखल

(रामेश्वर सिंह परमार+7477296505)
भोपाल। 15 सालों के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन जरूर हुआ, लेकिन रसूखदार अधिकारियों का जलजला अभी भी बरकरार है, सूत्रों की माने तो सफेदपोश, नौकरशाह भले ही इन दिनों हनी के ट्रैप में चिंतित हैं कि कहीं जांच में उनका नाम सामने न आ जाये, लेकिन कुछ ऐसे अधिकारी हैं, जो कि लगातार मलाईदार पदों पर जमें हुए हैं, मानसिकता भले ही पुरानी हो, लेकिन दुधारू गाय सभी को पसंद है। खनिज संसाधन विभाग में 2013 से पदस्थ संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म विनीत कुमार ऑस्टिन की भी कहानी कुछ इसी तरह है, सूबे में सत्ता चाहे भाजपा की हो, या कांग्रेस की, नीति और आदेशों में कथित अधिकारी का पूरा रोल-कॉल रहता है। इतना ही नहीं विभागीय मंत्री बिना इनकी सलाह के कोई भी मसौदा तैयार नहीं करते। जिसके पीछे का कारण यह है कि संचालक की 6 सालों से पूरे प्रदेश के खनिज से जुड़े कारोबारी, माफिया और खनिज कार्यालयों में ऊंची पैठ है।
बौने साबित होते अधिकारी
राजधानी की गलियारों से लेकर प्रदेश के जिलों तक यह चर्चा है कि साहब की मर्जी के बिना छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी और अधिकारियों की पोस्ंिटग नहीं की जाती। भाजपा शासन काल में खनिज मंत्री के खासमखास रहे संचालक सत्ता परिवर्तन के बाद भी वर्तमान खनिज मंत्री के खास माने जाते हैं। खनिज संसाधन विभाग कमाऊ विभागों में सम्मलित है, जिसमें भारी मात्रा में राजस्व के साथ ही जुगाड़ भी शामिल रहता है।
नीति में किया खेल
विभाग से जुड़े जानकारों की माने तो विधानसभा चुनाव 2018 से पहले शिवराज सरकार ने रेत खनन नीति 2017 लागू की थी, जिसमें पंचायतों के माध्यम से खदानों के संचालन की स्वीकृति दी गई थी, 2018 में रेत नियम लागू किये गये थे, जिसमें भाजपा को चुनाव से पहले फायदा पहुंचाने के लिए काम करने के लिए कथित अधिकारी का अहम योगदान रहा, नीति और नियम को कथित अधिकारी ने जनता के हित में बताकर ऐसी व्यूह रचना रची की, तात्कालीन खनिज मंत्री सहित मुख्यमंत्री को मसौदा पसंद आया कि सुगम तरीके से आम लोगों को रेत मुहैया हो सकेगी, नतीजा यह निकला कि जहां प्रदेश को रेत से मिलने वाले करोड़ों के राजस्व जो कि प्रतिवर्ष 500 से 600 करोड़ रूपये पहुंचता था, वह महज वर्ष 2018-19 में 69 करोड़ तक सीमित रह गया।
फिर नई नीति का झांसा
सूबे के मुखिया और राजस्व मंत्री को खुश करने के लिए नवीन रेत नियम 2019 लागू किये गये, जिसमें ई-टेण्डरिंग से खदानों की नीलामी करने के प्रावधान जारी किये गये, विधान सभा चुनाव से पहले रेवड़ी की तरह बांटे गये भण्डारण में कथित नौकरशाह ने जमकर मलाई छानी, जिन्हें निरस्त करते हुए नये नियम जारी किये गये, सरकार को आंकड़ों की जादूगरी दिखाते हुए 1400 से अधिक खदानें दर्शाई गई, जिससे होने वाली कमाई करोड़ों में सीएम और मंत्री को बताई गई, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पूर्व में घोषित खदान और नवीन घोषित खदानों का अगर आंकलन किया जाये तो कानूनी पेंच फंसने पर प्रदेश सरकार कटघरे में खड़ी हो सकती है, फिर भी कथित अधिकारी ने सिर्फ अपना ओहदा और मलाईदार पद बचाने के लिए पूरी व्यूह रचना रची।
कर्मचारी हुआ शिकार
रेत नियम 2019 लागू होने के बाद सभी पूर्व में स्वीकृत भण्डारणों को निरस्त कर दिया गया, आंकलन करके एक माह के भीतर भण्डारणों को चालू करने की कार्यवाही अधिसूचना में जारी की गई, इसी बीच प्रमुख सचिव के द्वारा 16 सितम्बर को रेत भण्डारणों के पर्यावरण विभाग से जल एवं वायु सम्मति लेने के लिए अनिवार्यता की गई, तब तक सभी भण्डारण बंद करने के निर्देश प्रमुख सचिव के द्वारा जारी कर दिये गये, लेकिन प्रदेश के छिंदवाड़ा और होशंगाबाद जिलों में भण्डारण चालू रहे, मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग के मुखिया के द्वारा ई-खनिज का कार्य देखने वाले कृष्णा नामक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया, संचनालय में इस बात की चर्चा सरगर्म है कि कथित अधिकारी के इशारे पर ही पूरा खेल-खेला गया, लेकिन शिकार सिर्फ प्यादा हुआ, लेकिन वजीर अभी भी अपनी चाले चल रहा है।
सरकार बदली, लेकिन नहीं बदली मानसिकता
पिछली सरकार को अपने मसौदे में फायदा दिखाकर पूरे प्रदेश को राजस्व के मामले में मिलने वाली रॉयल्टी की राशि में जो कमी आई, उसके बाद भी मौजूदा सरकार आने के बाद भी कथित अधिकारी की भगवाधारी मनसिकता नहीं बदली, जैसे की शिवराज सरकार और उनकी कैबिनेट को धोखे में रखा गया, इस बार भी 6 सालों से जमे संचालक ने मौजूदा सरकार को राजस्व वसूली के मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखा दिये। अगर जमीनी हकीकत पर जाये तो राजस्व मिलने से पहले सिया, वन विभाग, एनजीटी, सर्वाेच्च न्यायालय के कई निर्णय पेंच फंसा सकते हैं, लेकिन अपने ओहदे को बचाने के लिए विनीत ने एक बार फिर जीरो टॉलरेंस वाली सरकार को दांव पर लगा दिया है।
तबादले से लेकर वसूली में दखल
प्रदेश के जिले स्तर पर होने वाले खनिज संसाधन विभाग के तबादले में संचालक का सीधे तौर पर दखल रहता है, ऑफ द रिकार्ड अनुशंसा के बाद ही विभाग के आलाधिकारी कलम चलाते हैं, इतना ही नहीं सूबे के प्रत्येक जिले से सूत्रों के मुताबिक कथित अधिकारी को मासिक चढ़ोत्तरी भी चढ़ाई जाती है, खदान संचालकों से लेकर खनिज माफियाओं से सीधा संपर्क जुड़ा हुआ है, नियम और न्यायालयों के आदेशों के विरूद्ध चांदी के चंद सिक्कों के खातिर संचनालय में सारी चीजें तोड़ दी जाती हैं। सवाल यह है कि पूरी सरकार को जहां विपक्ष ने तबादलों की सरकार की संज्ञा दे दी, वहीं विनीत को तबादलों वाली सरकार भी उनके मलाईदार पद से नहीं हिला सकी, सूत्रों की माने तो कथित अधिकारी द्वारा सत्ता परिवर्तन से पहले व बाद में सत्ता पक्ष को पीछे के दरवाजे से खुला लाभ पहुंचाया हुआ है।
इनका कहना है…
अभी मैं व्यस्त हंू, इस मामले में बाद में बात होगी।
विनीत कुमार ऑस्टिन
संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म
भोपाल

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