सहायक अभियंता सुसील यादव जांच में कर रहे लीपापोती

ह अपने निजी स्वार्थ के लिए सबस्टेशन ऑपरेटर गड़वाये बिजली के 12 खंभे

(शहडोल से शम्भू यादव की रिपोर्ट)
म.प्र.पूर्व क्षेत्र विधुत वितरण कंपनी में सौभाग्य योजना के अंतर्गत अनियमितता को लेकर इन दिनों शहडोल संभाग सुर्खियों में चल रहा है शहडोल संभाग के चीफ इंजीनियर के.के.अग्रवाल के नाक के नीचे सब स्टेशन ऑपरेटर जिसके द्वारा भ्रष्टाचार में पूरी तरह संलिप्तता पाई गई बावजूद इसके चीफ इंजीनियर आखिर क्यों बचा रहे है दर असल कुछ दिनों पूर्व एक मामला शहडोल संभाग के अंतर्गत चचाई के 33 के.वी.सबस्टेशन में पदस्थ ऑपरेटर राजेंद्र चौधरी द्वारा अपने मित्र जियालाल काछी से खेतिहर जमीन लेकर उस जमीन में पानी के बोर के लिए सौभाग्य योजना के तहत अपने उच्च अधिकारी और ठेकेदार से मिलीभगत कर 12 पोल लगवा दिया गया मामले की जानकारी मिलते ही चचाई विधुत वितरण केंद्र में पदस्थ लाइन इंस्पेक्टर कल्लू कोरी द्वारा अनैतिक तरीके से लग रहे पोल का कार्य रोकवा दिया गया था एवं उस पोल में तार नही लगने दिया गया था जो कि आज भी बारह खम्बे बिना तार के ही गड़े हुए देखे जा सकते है यह मामला लगभग एक से डेढ़ साल पहले का है मामला तब प्रकाश में आया जब ग्रमीण निवासी राकेश पटेल द्वारा पूरे मामले की लिखित शिकायत 08 अगस्त को अनूपपुर अधीक्षण यंत्री पी.के.विश्वकर्मा को दी गई | तत्काल इस मामले की जांच अधीक्षण यंत्री द्वारा कोतमा के सहायक अभियंता सुसील यादव को दी गई | परंतु लगभग डेढ़ माह बीत गए अभी तक जांच में कुछ भी जानकारी सामने नही आ पाई है| ज्ञात हो कि बारह खंभे मामले में राजेन्द्र चौधरी के साथ ही कुछ अन्य बिजली अधिकारियों की भी मिलीभगत का अंदेसा जताया जा रहा है जिसको लेकर विभागीय मामले होने के कारण जाँच अधिकारी कोतमा के सहायक अभियंता सुसील यादव की जांच पर सवालिया निशान लग रहे है जानकर तो यह भी बता रहे हैं जिले के कुछ अधिकारियों की भी इस मामले में मिलीभगत होने की वजह से विभागीय जांच को महज खाना पूर्ति ही कि जा रही है | जिसको लेकर ग्रामीणों में असंतोष है और लाजिमी भी है कि जब कोई योजना सरकार से चल कर विभाग के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाना होता है और उस योजना का लाभ यदि सीधे तौर पर गरीब जनता तक न पहुँच कर विभाग के ही कर्मचारी और अधिकारी अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने लगेंगे तब आम जनता को तो अंधेरो की चिमनी में ही दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ेगा|

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