स्टिंग ऑपरेशन में देखिये पूरे Video @ खून चाहिए : 3 हजार में जिम्मेदार कर रहे हैं सौदा

खून का सौदा: गंदा है पर, अब धंधा है यह
ब्लड बैंक के पिछले दरवाजे से हो रही भावनाओं की दलाली
वीटी वैन चालक सहित अन्य कर्मचारी हैं दलाली में शामिल
मुखिया कोरोना में व्यस्त, यहां खुली खून की दुकान

शहडोल स्थित ब्लड बैंक खून की दलाली का अड्डा बन चुका है, शिविरों के नाम पर रक्तदान और फिर जरूरत मंदों को मुफ्त में रक्त देने की व्यवस्था के बीच एक पूरी चैन खून की दलाली कर रही है। लगातार आ रही खून के सौदों की खबरों के बाद हमारी टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो, ब्लैड बैंक से होते हुए तार वार्ड तक पहुंचे और खबरे सच साबित हुई।

(अमित दुबे)
शहडोल। बीते 3 महीनों से प्रशासनिक अमले के साथ ही स्वास्थ्य अमला कोरोना वॉयरस की महामारी से जूझ रहा है, उसी बीच ब्लड बैंक से खून की सौदेबाजी और जिला चिकित्सालय सहित अन्य अस्पतालो में भर्ती होने वाले मरीजों तक खून के सौदे ने इस पूरे पेशे को दागदार कर दिया। ब्लड बैंक में बैठे जिम्मेदारों और उनके साथ जुड़े चालकों की चैन जो नीचे जाकर जिला चिकित्सालय के वार्डाे व मुख्यालय में स्थित अन्य निजी चिकित्सालयों तक फैली हुई है, लगातार शिकायतें आने के बाद हमारी टीम की टीम ने मामले की पड़ताल की और जल्द ही एक ऐसा मामला हमारे कैमरे में कैद हो गया, जिसमें मरीजों के परिजनों से खुलेआम खून के सौदे किये गये। ब्लड बैंक में कार्यरत कर्मचारी वीटी वैन के चालक राकेश कुशवाहा व अस्थाई चालक झुर्रू नामक चालक से होती हुई वार्ड तक पहुंची और 3 हजार रूपये में खून का सौदा हुआ, खून बिकने के बाद आई राशि को सभी ने मिलकर बांट लिया।
ऐसे करते हैं सौदा
बीते दिवस जिला चिकित्सालय के फीमेल सर्जिकल वार्ड में डिण्डौरी जिले से नर्मदा नामक आदिवासी युवक ने अपनी पत्नी नैनसी को भारी रक्तस्त्राव के दौरान यहां भर्ती कराया था, चिकित्सक ने खून की आवश्कता बताई, ब्लड बैंक ने अनुपलब्धता बताई, फिर ब्लड बैंक से सूचना मिलने पर दलालों ने संपर्क किया, दो वार्ड ब्वॉय इस सौदे में शामिल हुए, 3 हजार में सौदा हुआ, इसके बाद यह कहानी झुर्रू नामक अस्थाई चालक के पास पहुंची। उसने वीटी वैन चालक राकेश को जिम्मेदारी सौंपी, अनाधिकृत तौर पर ब्लड बैंक में दिन भर बैठने वाले राकेश ने वहां के जिम्मेदारों से सेटिंग कर 1400 में रक्त उपलब्ध कराया। वार्ड ब्वॉय रक्त लेने आया, मरीज के पति से रूपये लिये गये और वापस झुर्रू व राकेश से होता हुआ पैसा ब्लड बैंक के जिम्मेदारों तक पहुंचा, पूरी कहानी हमारी  टीम ने अपने कैमरे में कैद की।
खुद कबूला गुनाह
खून की दलाली का यह कारोबार इतनी बेफिक्री से होता है कि इस सौदेबाजी में लगे लोगों को किसी की फिक्र तक नहीं रहती, स्वयंसेवी संगठन के नाम पर रक्तदान की जब हमने दोनों वार्ड ब्वॉय से इच्छा जताई तो, वह बिल्कुल तैयार हो गये, स्टिंग ऑपरेशन में उन्होंने यह खुद कबूला कि राकेश को दिये जाने वाले 1400 भी अब बच जायेंगे, अपना नंबर दीजिए, अब तो पूरा पैसा हमको मिलेगा। मिलकर पार्टी करेंगे, हमें न कलेक्टर की फिक्र न किसी डॉक्टर की चिंता।

खाली है जेब, तो भटकते रहेंगे
जिला चिकित्सालय सहित अन्य निजी चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों के परिजनों की जेब अगर भरी नहीं है तो, उनकी यहां नहीं सुनी जायेगी, भले ही शासन व चिकित्सालय प्रबंधन ने एक वर्ग के लिए मुफ्त में रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की हुई है, लेकिन यह व्यवस्था अन्य शासकीय योजनाओं के जैसे ही महज कोरम पूरा करने जैसी है। यदि आपकी जेब में रूपये नहीं है तो फिर आपकी मदद करने वाला यहां कोई नहीं है।

ब्लड बैंक की मुखिया भी कटघरे में
ब्लड बैंक में खुलेआम खून सौदे हो रहे हैं और इसकी खबर यहां के मुखिया को न हो, यह अपने आप में विचारणीय प्रश्न है, सवाल यह भी है कि ब्लड बैंक कार्यालय के प्रतिबंधित व कार्यालयीन कक्षों में वीटी वैन चालक सहित अनाधिकृत लोग किसी सह पर प्रवेश करते हैं, यह भी जांच का विषय है। मुफ्त के नाम पर जिन लोगों को रक्त जारी होता है, उनकी जमीनी स्तर पर पुष्टि की भी जाती है या नहीं, स्वास्थ्य विभाग तथा राजनैतिक स्तर पर शहडोल से लेकर कटनी तक अपने रसूख का जलजला दिखा चुके साहब पर पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं।

एम्बुलेंस की भी दुकान परिसर में
वीटी वैन के चालक राकेश के साथ इस पूरे कारोबार में आधा दर्जन से अधिक स्वास्थ्य कर्मी व बाहरी लोग जुड़े हुए है, इन लोगों का यहां अनाधिकृत तौर पर खड़े आटो व अन्य वाहनों में डेरा भी सहज ही देखा जा सकता है। खून की दलाली के साथ राकेश और झुर्रू जैसे लोग एम्बुलेंस व शव वाहन तक की दलाली खुलेआम कर रहे हैं।

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