हैवी ब्लास्टिंग के कारण पूरा गांव दहसत में, क्रेशर मालिक राजेश जैन की मनमानी चरम पर

Ajay Namdev-7610528622

अनूपपुर। मुख्यालय पुष्पराजगढ़ आदिवासी मैकलांचल जो चारो ओर मैकल पर्वतों से घिरा हुआ है एक समय था कि लोग मिनी काश्मीर के नाम से भी जाना जाता था परंतु कुछ बाहरी तत्वों के द्वारा इन खूबसूरत वादियों के हवा में जहर घोल रहे है और धमाको से दहलाने का काम कर रहे है यंहा पर बसे भोले-भाले गरीब आदिवासियों को चन्द सिक्को की खनक दिखाकर उनका शोषण बड़े पैमाने पर कर रहे है पुष्पराजगढ़ के कोने कोने में इन नुमाइंदों ने चन्द ही दिनों में अपनी पकड़ मजबूत बनाने का कार्य तेजी से किया है अब ये इन भोले भाले अदिवासियो के घर जमीन से उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखाने में कोइ कोर कसर नही छोड़ रहे है ताकि इनकी आमदनी दिन दुगनी और रात चौगनी हो सके और जिले में उच्च पदों पे बैठे इनके आंका भी इनका बराबर साथ दे रहे है और इनकी जुगलबंदी का नतीजा गरीबों को अपने खून पसीने से चुकानी पड़ती है।
चार गांव के लोगों ने जताया विरोध
मुख्यालय पुष्पराजगढ़ के अंतिम छोर में बसे बड़ीतुम्मी जंहा पर सरस्वती माइनिंग जिसके मालिक राजेश जैन हैं जो उमरिया जिले के पाली ग्राम निवासी हैं जिनके मनमानी के सामने सरकारी अमला नतमस्तक नजर आता है ग्रामीणों ने बताया कि उनके रहने वाले मकान कच्चे हैं जो हैवी ब्लास्टिंग के वजह से पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े हवा में तैरते हुए उनके घर छत आँगन और खेत खलिहानों में पानी की तरह बरसते हैं जिससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है और ग्रामीणों को अपनी जान से हाँथ धोकर चुकाना पड़ सकता है पत्थर खदान में सैकड़ो फिट गहरा हो चुका है जिसके कारण कई बार बेजुबान जानवरों की जान भी जा चुकी है जब क्रेशर मालिक के द्वारा ब्लास्टिंग की जाती है तो पुरा का पूरा गांव डर के एक जगह सिमट जाता है गरीब अदिवाशियो के घर से लगे होने कारण क्रेशर की गडग़ड़ाहट और उससे निकलने वाला धूल के कण हवा में जहर घोलने काम कर रहा है जिससे ग्रामीणों को शुद्ध हवा भी नशीब नही होता है जिसकी वजह से ग्रामीडो का जिना दुर्भर रहता है पर इससे माइनिंग विभाग को क्या लेना देना वो तो कुम्भकर्ण की निद्रा में सोता रहे है ऐसे ही क्रेशरो की जनसंख्या बढ़ती रही तो एक दिन आम जनता का रहने जीने खाने के लाले पड़ जाएंगे जिसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ये कौन तय करेगा।
जल संसाधन की भूमिका संदिग्ध
बड़ीतुम्मी में एक मात्र जलासय हैजिसपे हजारो ग्रामीडो का अस्तित्व निर्भर है का संसाधन जिसका अस्तित्व अब खतरे में है बांध से 10 मीटर दूरी पर लगी हुई पत्थर खदान और क्रेसर जो सरस्वती माइनिंग की मनमानी और हैवी ब्लास्टिंग के कारण कभी ढह सकती है या पानी का स्तर इतना नीचे जा सकता है कि गांव वालो को पीने का पानी बमुश्किल से मिल सके नियमानुसार किसी भी जलासय से 500 मी की दूरी होनी आवश्यक है आश्चर्य की बात तो ये है कि इतना बड़ा बांध आखिर जल संसाधन विभाग को क्यो नजर नही आई अब सवाल ये है कि क्या अनापत्ति प्रमाण पत्र देते समय अधिकारी नशे में थे सवाल तो बहुत सारे है पर चांदी के चंद सिक्को की खनक के सामने सारे नियम कायदे कानून बौने नजर आ रहे है।
प्राधानमंत्री ग्रमीण सडक़ के उड़े परखच्चे
बड़ी तुम्मी पुष्पराजगढ़ की आखिरी छोर में बसा है जो विकास की धारा से कोसो दूर खड़ा है किसी तरह से एक प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत गांव के लोगो ने पहली बार सडक़ तो देखा था पर इन खनिज माफियों को ये रास नही आया और अपने फायदे के लिए 40 से 50 टन ओवर लोड गाडिय़ों से परिवहन करते हैं जिससे ग्रमीणों का पक्की सडक़ का सपना चूर चूर हो चुका है क्या वजह है कि प्रधानमंत्री गा्रमीण सडक़ के नुमाइंदे भी चुप बैठे हैं अगर इसी तरह से जिला प्रशासन चुप रहा तो आम जनता का भगवान ही मालिक होगा
ग्रमीणों की जमीन हो रही बंजर
ग्रामीणों ने बताया कि क्रेशर से निकलने वाली धूल के साथ पत्थर के कण दिन रात उड़ता है जिससे गरीब किसानों की जमीन में परत दर परत धूल का गुब्बार बैठता जा रहा है और उपजाऊ जमीन बंजर होते जा रहे हैं जिसको देखते हुए ग्रमीणों ने शहडोल कमिश्नर से माँग किया है कि तत्काल इन क्रेशरों को बंद कराया जाये ताकि आम जनता चैन से जी सके।
ग्रामीणों ने सौपा ज्ञापन
पुष्पराजगढ़ के अंतिम छोर बड़ी तुम्मी के ग्रामीणों ने राजेन्द्रग्राम पहुच कर तहसीलदार पंकज नयन तिवारी को ज्ञापन के माध्यम से केसर संचालको के मनमानी और लगातार किये जा रहे अवैध रूप से हो रहे ब्लास्टिंग के बारे में बताया और अब किस तरह से ग्रामीण पलायन की स्थिति में आ गए है।

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