33 सालों पहले दोस्तो ने की थी 15-15 हजार की मदद @ तब शुरू हो सका था,आज के सबसे बड़े टेंट कारोबारी का व्यवसाय

87 में दोस्तों ने करवाई थी शुरूआत, आज बने मिसाल
(अनिल तिवारी)
शहडोल। 1987 के 18 अप्रैल को बचपन के मित्र मनीष जैन और शांति स्वरूप जगवानी के साथ रोजाना की बैठक में जब इलेक्ट्रानिक के व्यवसाय की मंदी पर चर्चा हो रही थी, इसी दौरान उन्होंने टेंट का कारोबार करने की सलाह दी, यही नहीं रूपयों के आभाव के चलते दोनों मित्रों ने 15-15 हजार रूपये भी 17 साल के युवा मित्र को दिये। बीते 33 सालों में चंद शामियानों व मु_ी भर बर्तनों के साथ शुरू हुआ, बलराम गुप्ता (बल्लू भईया) का ”दुर्गा लाईट हाऊसÓÓ कारोबार आज उनकी मेहनत व स्वभाव के चलते शहडोल ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के दर्जनों जिलों तक फैल चुका है। सरल व सहज व्यक्तित्व के धनी बलराम गुप्ता का जन्म 20 अगस्त 1968 को घरौला मोहल्ला में हुआ था, उनके पिता नौमीदीन गुप्ता उस समय के उंगलियों में गिने जाने वाले शहडोल के टॉप इलेक्ट्रिशयन में थे। उनके पुत्र आज 33 वर्षाे के कारोबार के बाद बलराम गुप्ता शहडोल टेंट एसोशिएसन के लगातार 7 सालों से अध्यक्ष हैं।
मैं अकेला ही….
उर्दू के मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी की ये पंक्तियां ”मैं अकेला ही चला था, जानिब-ए-मंजिलÓÓ लोग साथ आते गये और कारवां बनता गया। शायद बलराम गुप्ता के लिए ही लिखी गई थी, दोस्तों के 15 हजार के सहयोग से 33 साल पहले अकेले यह कारोबार शुरू किया था, उस समय वे खुद टेंट लगाने से लेकर, घर तक ले जाने व सब काम खुद करते थे। आज उन्होंने करीब डेढ़ सौ मजदूरों को इसमें लगाया हुआ है, जिनके परिवार इन पर निर्भर हैं। यही नहीं शहडोल में 1998 में बलराम गुप्ता ने अपनी शादी के दिन से ही कैटरिंग की शुरूआत की थी, फिर चाहे स्टेज, साज-सज्जा, हाईड्रोलिक जयमाला, बारात, इंट्री से लेकर महानगरीय सुविधाएं शहडोल संभाग ही नहीं, बल्कि आस-पास के दर्जनों जिलों में भी, इतना ही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कार्यक्रमों से लेकर राहुल गांधी और तीन से चार बार आस-पास के जिलों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रमों का जिम्मा भी प्रशासन ने बलराम गुप्ता को ही हर बार सौंपा, यह उनके कुशल मैनेजमेंट का नतीजा था।
गमीं-पूजा, भण्डारा में सेवा
बलराम गुप्ता संभवत: शहडोल सहित आस-पास के जिलों में अकेले ऐसे टेंट कारोबारी हैं, जिन्होंने फर्श से अर्श का सफर अपने बूते तय किया, यही नहीं उनकी सहभागिता टेंट यूनियन के अलावा दुर्गाेत्सव, मोहर्रम, बैसाखी और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भी रहती है। खास बात यह है कि किसी भी के परिवार में गमीं के दौरान टेंट और मजदूरों का कोई शुल्क नहीं लेते, यही नहीं गरीब बच्चियों की शादी का आयोजन हो या फिर दुर्गोत्सव या सार्वजनिक लंगर, इन सब में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के साथ ही नि:शुल्क सेवाभाव अब दुर्गा लाईट हाऊस की पहचान बन चुकी है।
कुशल मैनेजमेंट के धनी
मैनेजमेंट गुरू से संभाग के सबसे बड़े टेंट कारोबारी को देखकर कोई भी इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकता कि उन्होंने महज 9 वीं तक शिक्षा अर्जित की है, हालाकि 1983-84 में जब उन्होंने रघुराज स्कूल 9 वीं पास कर छोड़ा था, उन दिनों में 9 वीं तक पढऩा ही, अपने आप में बड़ी पहचान थी। खाने और खिलाने के शौक के साथ बलराम गुप्ता कहते हैं कि उन्हें घूमने का बड़ा शौक है, अपने परिवार के साथ उन्होंने कई बार विदेश यात्रा भी की है, लेकिन हर बार वहां से वे शहडोल के टेंट कारोबार को नई दिशा देने का मंत्र लाना भी नहीं भूले, यही कारण है कि आज न्यू दुर्गा लाईट टेंट एण्ड कैटर्स और बल्लू टेंट वाला इतना ही कहना काफी होता है।

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