जिले भर में छोला-छाप डांक्टर खेल रहे मौत का खेल नागरिको से वसूल रहे दुगनी राशि

संतोष कुमार केवट

जिले भर में झोलाछाप डॉक्टरों का मकडज़ाल फैला हुआ है, हर गांव में करीब 5 अवैध निजी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के पैथॉलाजी और मेडिकल स्टोर्स भी संचालित है। इन क्लीनिकों में मौसमी बीमारियों के इलाज से लेकर बाकायदा डिलीवरी तक हो रही है।

अनूपपुर। एक अनुमान के मुताबिक करीब एक हजार से अधिक झोलाछाप डॉक्टर जिले में मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, फिर भी इन पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अमलाई, विवेकनगर, धिरौल, मेडियारास सहित ग्रामीण अंचल में 3 दर्जन से भी अधिक निजी क्लिीनिक अवैध रूप से संचालित है। वही जैतहरी, चोलना, कोतमा, फुनगा, जैसे कई जगहो पर इनहो ने अपना अंगद अंगत की भाती अपना पाव सदियो से जमाए हुए है।
हो रहे बडे-बडे इलाज
आलम यह है कि ऐसे क्लीनिक में डिलीवरी भी कराई जा रही है, जबकि न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं न दक्ष नर्सिंग स्टाफ। बिना डिग्री के ये डॉक्टर विभिन्न गंभीर बीमारियों का इलाज तक कर रहे हैं, मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। खास बात यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम हो रहा है लेकिन कोई भी अधिकारी इन पर उचित कार्रवाई नहीं कर रहा है।
कोर्ट का है स्पष्ट निर्देश
झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए हाई कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि जिनके पास कोई भी मेडिकल डिग्री नहीं है, अगर वे मेडिकल प्रैक्टिस करते हुए पाए जाते हैं, तो स्टेट मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत उनके खिलाफ कार्यवाई किया जाए, इसके अलावा आयुर्वेद, होम्योपैथी डिग्री के बावजूद एलोपैथिक दवाई की प्रैक्टिस करने वाले झोलाछाप के खिलाफ दिल्ली मेडिकल काउंसिल एक्ट 1998 के क्लाउज 27 के तहत 3 साल की सजा या 20 हजार का जुर्माना या 3 साल की कैद और जुर्माना दोनों के प्रावधान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed