निराधार शिकायतों से त्रस्त हैं एडिशनल एसपी शेन्डे

शशिकांत कुशवाहा
वैढ़न,सिंगरौली। सिंगरौली जिले को चारागाह समझकर विभिन्न विभागों में वर्षों से पदस्थ अधिकारियों पर शिकायतों का कोई असर नहीं पड़ता है। विभागों में पड़े ऐसे बहुत से अधिकारी हैं जो बार-बार अपना स्थानांतरण करवाकर सिंगरौली धमक चुके हैं। कुछ ऐसे भी अधिकारी हैं जिनका कभी स्थानांतरण नहीं होता। उनकी सेहत पर शिकायतों तथा समाचार पत्रों का भी कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन यदि इमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के ऊपर निराधार शिकायतों का आरोप लगा दिया जाये तो उसका मनोबल गिरता है एवं उसके कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है।
जाने पूरा मामला
सिंगरौली जिले में ऐसा ही एक दृष्टांत इन दिनों सिंगरौली जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्तमान समय में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेन्डे पर आरोपों की जोरदार चर्चा का विषय बना हुआ है। बताते चलें कि श्री शेन्डे एक स्पष्टवादी बेवाक तथा मेहनती अधिकारी हैं। उनके ऊपर चौतरफा शिकायतों की बौछार इन दिनों की जा रही है।
आरोपों का अस्तित्व
बताया जाता है कि संघठन द्वारा उनपर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होने शासन अल्ट्रा पावर के राख बंधे के टूटने के समय लॉ एण्ड आर्डर मेंटेन करते हुये महिलाओं से अभद्रता की गयी। जबकि मौके पर मौजूद कई पत्रकारों ने हलफिया बयान दिया है कि ऐसी घटना घटित ही नहीं हुयी। जब श्री शेन्डे सीधी में पदस्थ थे उस समय भारत बंद के दौरान हुयी घटनाओं में भी उनपर निराधार आरोप लगाये जा रहे हैं।
लगे आरोपों पर बोले एडिशनल एसपी
इन आरोपों के बारे में श्री शेन्डे का कहना है कि उन्होंने उस दौरान कोई भी कार्यवाही स्वत: या निर्णय या मनमाने ढंग से नहीं की। सक्षम अधिकारी के निर्देश पर ही उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज एवं गैस के गोले दागे गये थे। श्री शेन्डे पर किसी पत्रकार से जानकारी लेते समय अभद्रता करने का भी कथित आरोप है। जबकि श्री शेन्डे ने बताया कि उक्त पत्रकार ने जानकारी मांगते समय उनसे अभद्रता की थी तथा अमुक समाचार को वायरल करने की धमकी भी दी थी।
बहरहाल मामला जो भी हो वह जांच का विषय है किसी भी सक्षम अधिकारी के ऊपर कथित विद्वेष के चलते सरासर आरोप लगाना लाजिमी नहीं लगता।

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