अस्पताल के साथ पैरामेडिकल और अन्य संस्थाएं चलाने वाले डॉक्टर त्रिपाठी का हलफनामा


शहडोल। गुरूवार को देवांता अस्पताल के ने सिर्फ खुद को ईमानदार बताया और पूरे प्रशासन सहित संभाग के हर शख्स को कटघरे में खड़ा कर दिया। अनूपपुर जिले के जैतहरी अंतर्गत ग्राम चोरभठी निवासी पुष्पा राठौर की मौत के मामले में कलेक्टर और पुलिस की संयुक्त टीम अस्पताल पहुंची थी, दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार इस मामले पर नजर रखी और एडीएम जैसे वरिष्ठ अधिकारी ने स्वास्थ्य अमले की टीम के साथ मिलकर लगभग 5-7 घंटों तक बिन्दुवार जांच भी की। इस मामले में तथाकथित दोनों के खिलाफ आपराधिक मामले कायम हुए और अस्पताल सील कर दी गई। गुरूवार को तथाकथित दोनो चिकित्सकों ने 8 से 10 पन्नों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित भोपाल भेजे गये प्रेस नोट को 14 बिन्दुओं में विभाजित किया, हर बिन्दु में उन्होंने खुद को निर्दाेष साबित करने के साथ प्रशासनिक अधिकारियों तथा मृतिका और उसके पति को दोषी करार दे दिया।
दोनों चिकित्सकों ने खादी की आड़ लेकर 14 बिन्दुओं के प्रेस नोट तो बांट दिये, लेकिन उनकी अस्पताल आज भी निजी अस्पतालों के संचालन के मानकों को न तो पूरा करती है और न ही उन पर खरी उतरती है, भाड़े पर लिये गये आधे-अधूरे भवन में संभाग के सबसे उत्कृष्ट अस्पताल का दावा करने वाले तथाकथित नटवरलालों ने अस्पताल संचालन के समय जिन लोगों के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया था और जिन लोगों के नाम अस्पताल संचालन के लिए फार्म में भरे थे, आज उनमें से कितने अस्पताल में कार्यरत हैं, कार्य के दौरान उन्हें कितना पीएफ और वेतन किस-किस खाते में दिया गया, इसकी जानकारी नटवरलालों ने पत्रकारवार्ता के दौरान 14 बिन्दुओं में कहीं भी नहीं दी।

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