गुस्सा या फिर अब अनूपपुर में बचे एक ही लाल

(सीताराम पटेल+91 99779 22638)
अनूपपुर। लगभग बरस पहले विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनूपपुर सीट के लिए जिस भाजपा प्रत्याशी रामलाल रौतेल के साथ मंच साझा कर जय श्री राम व अनूपपुर विकास के नारे लगाये थे, दो सालों में राजनीति के समीकरण ऐसे बदले कि मुख्यमंत्री ने जिसे हराने की अपील की थी, आज उसे ही जिताने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया। यही नहीं अनूपपुर में ऐतिहासिक सम्मेलन करवाने वाले पूर्व भाजपा प्रत्याशी व पूर्व विधायक रामलाल रौतेल आज मुख्यमंत्री के अनूपपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर नहीं चढ़े।

भले ही यह खबर आम होने के बाद वे खुद को जनता जनार्दन के बीच रहने और उनके बीच का आदमी बताकर मामले पर पर्दा डाले, लेकिन मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने से पहले पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रामदास पुरी के द्वारा 2 से 3 बार सार्वजनिक रूप से ध्वनि विस्तारक यंत्र से श्री रौतेल को मंच पर आमंत्रित किया गया, लेकिन वे नीचे कुॢसयों पर मास्क लगाकर बैठे रहे, इस दौरान उनके इर्द-गिर्द उनकी स्लीपर सेल भी बैठी रही।
मंच पर जिले सहित आस-पास के जिलो के अध्यक्षों और प्रमुखजनों के बैठने के लिए तीन पंक्तियों पर 20 कुर्सियां रखी गई थी, इसमें प्रथम पंक्ति में ही रामलाल रौतेल के लिए उनका नाम चस्पा कर क्षेत्रीय सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह के बगल वाली कुर्सी रिक्त रखी गई थी, बाद में उनके यहां न आने पर किसी अन्य को बैठा दिया गया।
रामलाल रौतेल का मंच पर न जाना और अपने गुस्से का प्रदर्शित करना जायज भी है। रामलाल बीते 2 दशको से अनूपपुर विधानसभा में भाजपा का झण्डा उठाने वाले अकेले योद्धा रहें है, जिन्होंने अपनी मेहनत से यहां भाजपा की जमीन को तराशा है, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय जनता पार्टी में कम्यूनिस्ट पार्टी से पहुंचे रामलाल का विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे जिले में अपना अलग प्रभाव है और गांव-गांव तक उनकी अपनी टीम भी है, यह अलग बात है कि प्रदेश स्तर पर फरवरी-मार्च माह के दौरान बदले समीकरणों व राजनैतिक उठा-पटक ने उनके धुर राजनैतिक विरोधी बिसाहूलाल सिंह को प्रदेश के राजनैतिक पटल पर अलग स्थान दे दिया और इस उठा पटक ने रामलाल के कैरियर को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया।
बीते 2 दशकों से अनूपपुर में रामलाल और बिसाहूलाल सिर्फ दो ही लालों की चर्चा और जिले की राजनीति इनके इर्द-गिर्द ही रही है, सत्ता के इन दो केन्द्र बिन्दुओं व विरोधी धुरों के एक मंच पर आने के बाद राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले बिसाहूलाल सिंह ने एक ही दांव में अपनी सरकार और अपने स्थानीय धुर विरोधी को पटखनी देकर सत्ता की बुलंदिया पा ली और यह भी साबित कर दिया कि अनूपपुर के दो नहीं बल्कि एक ही लाल है। अपने राजनैतिक धुर विरोधी और पूर्व में चार बार मंत्री रह चुके बिसाहूलाल सिंह को अपनी पार्टी के मुखिया और पार्टी जनों के साथ देखकर रामलाल का मन खट्टा होना लाजमी है।

इतिहास में लौटिए…

देखिए 1 अगस्त 2018 को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान शिवराज और रामलाल रौतेल के छाया चित्र


आज से लगभग 25 माह पहले 1 अगस्त 2018 की दोपहर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा अनूपपुर पहुंची थी, इस दौरान मुख्यमंत्री ने रामलाल के लिए मतदान की अपील की थी, उस समय मुख्यमंत्री के साथ रामलाल रौतेल के छायाचित्र आज भी सोशल मीडिया में जिंदा हैं। लगभग 2 वर्ष पहले के छायाचित्र आज 7 सितम्बर 2020 के छायाचित्रों ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में न तो कोई दोस्त होता है, न ही कोई दुश्मन।

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