अन्नदाता परेशान: सत्यनारायण कथा सुन रहे अधिकारी

किसानों को नहीं मिल रहा नगद ऋण

वसूली के बाद डीएमआर एकाउण्ट खाली, शिकायत के बाद विभाग मौन

शहडोल। जिले के जयसिंहनगर जनपद क्षेत्र अंतर्गत बनसुकली समिति में उचित मूल्य दुकानों एवं ऋण वितरण एवं वसूली आदि के कार्याे में व्यापक पैमाने पर अनियमितता की गयी है, कैश बुक अधूरी, ऋण वसूली से जो राशि किसानों द्वारा दी गई, उसे जिला सहकारी बैंक के डीएमआर एकाउण्ट में जमा नहीं किया गया, लेकिन प्रबंधक सत्यनारायण गुप्ता द्वारा किसानों को चेक काटकर दे दिया गया, लेकिन जिला सहकारी बैंक शाखा जयसिंहनगर में उनके चेक पास नही हुए। जिससे परेशान होकर अब अन्नदाता साहूकारों से ब्याज पर कर्ज उठाने को मजबूर है, वहीं जिम्मेदारों ने शिकायत के बाद भी कथित प्रबंधक पर कार्यवाही करने की जहमत नहीं उठाई।
गंभीर हैं आरोप
समिति प्रबंधक करकी में पदस्थ सत्यनारायण गुप्ता एवं उनके पुत्र तरूण गुप्ता पर कई आरोप लगाये गये हैं, समिति प्रबंधक बनसुकली में तरूण गुप्ता की नियुक्ति पिता सत्यनारायण गुप्ता द्वारा अवैध रूप से कर ली गई। बनसुकली में व्यापक पैमाने पर उचित मूल्य दुकानों एवं ऋण वितरण एवं वसूली आदि के कार्याे में व्यापक पैमाने पर अनियमितता की गई है। कैश बुक अधूरी है, ऋण वसूली के बाद किसानों के खाते में राशि जमा नहीं की गई, जिस वजह से बैंक शाखा से किसानों के चेक वापस हो रहे हैं।
कर ली ऋण की वसूली
सत्यनारायण गुप्ता समिति प्रबंधक करकी पर आरोप है कि किसानों से मई से जुलाई माह में ऋण की वसूली की गई, लेकिन डीएमआर एकाउण्ट में राशि नहीं डाली गई। खबर है कि जो किसान पढ़े-लिखे हैं, उन्हें चेक के माध्यम से दोबारा ऋण मिल गया, लेकिन दर्जनों किसान ऋण लेने के बाद समिति के प्रबंधक को ऋण वापस जमा कर दिया गया, जिसके बाद किसानों को रसीद भी दी गई, लेकिन कई किसानों के खातें में राशि जमा नहीं की गई, जिससे किसानों को दोबारा ऋण नहीं मिल पा रहा है। मजे की बात तो यह है कि पूरे मामले की जानकारी विभाग के मुखिया को होने के बावजूद कार्यवाही नहीं हो पा रही है।
लगता है बाद में ब्याज
खेती-किसानी के लिए किसानों को 0 फीसदी ब्याज पर ऋण मिलता है। यह ऋण किसानों को उनकी जमीन और पात्रता कि हिसाब से मिलता है। एक किसान को अधिकतम 3 लाख रुपए तक का ऋण मिल सकता है। नियमों के मुताबिक खरीफ की फसल के लिए एक हेक्टेयर भूमि पर 21 हजार रुपए वहीं रबी की फसल के लिए एक हेक्टेयर भूमि पर 28 हजार रुपए का ऋण स्वीकृत किया जाता है। यह ऋण पाने की न्यूनतम पात्रता है। इसी हिसाब से जैसे-जैसे भूमि का रकबा बढ़ता जाता है, ऋण की राशि बढ़ती जाती है। इसे एक निर्धारित अवधि में जमा करना होता है। उसके बाद 14 फीसदी ब्याज वसूल किया जाता है।
6 माह से नही देखी कैशबुक
बनसुकली सहित करकी में प्रबंधक की मनमानी के चलते किसान परेशान रहते हैं, खबर है कि 6 माह से अधिकारियों को कैश बुक देखने को नहीं मिली, विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो ऋण वसूली संबंधी रसीदों को कब किसानों को दिया गया और बैंक शाखा में कब जमा किया गया इसकी जांच अगर वरिष्ठ कार्यालय द्वारा की जाये तो, पूरा मामला खुलकर सामने आ सकता है, जहां प्रबंधक के पुत्र को स्टे पर विभाग ने किसानों का शोषण करने के लिए छोड़ दिया है, वहीं कई बार शिकायतों के बाद भी सत्यनारायण को भी गंभीर आरोपों के बाद भी वित्तीय अधिकार समाप्त नहीं किया जा रहा है, जिससे विभाग के जिम्मेदारों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
इनका कहना है…
मुझ पर जो आरोप लगे हैं, वह गलत है, आज ही मैनें 20 किसानों को ऋण दिलवाया है, एक-दो की अलग बात है।
सत्यनारायण गुप्ता
समिति प्रबंधक
करकी
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खाते में पैसा न होने पर किसानों के चेक पास नहीं किये गये हैं, दर्जनों किसान आज भी ऋण के लिए घूम रहे हैं, सत्यनारायण गुप्ता के कारनामें किसी से छुपे नहीं है, बाकी वरिष्ठों के संज्ञान में सबकुछ है, वह ही जाने।
निर्मल पाण्डेय
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित
शाखा, जयसिंहनगर

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