डीएस राव और राजेन्द्र शुक्ला पर कार्यवाही का इंतजार

कमिश्नर ने दिये थे कलेक्टर को अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश
स्थानांतरण नीति के विरूद्व स्थानांतरण प्रस्ताव किये थे तैयार

सकायक आयुक्त कार्यालय को कमाई का जखीरा बनाने वाले डीएस का विवादो से गहरा नाता रहा है, जब डीएस राव सहायक आयुक्त बने थे तब सहायक वर्ग-2 राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला के साथ मिल दस्तावेजों को कुरेद कर मनमाने तरीके से 21 शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिये थे, शिकायत के बाद जांच और जांच के बाद कमिश्नर के द्वारा कलेक्टर को अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पत्र भेजे गये, लेकिन वह पत्र कलेक्ट्रेट कार्यालय में कार्यवाही के इंतजार में अभी भी भटक रहा है।

अनूपपुर। सहायक आयुक्त कार्यालय में 2019-20 के क्रियाकलापों और दस्तावेजों में हुए हरे-फेर को देखा जाये तो न जाने कितने गुनाह यहां पर बैठे जिम्मेदारों ने कर दिये होंगे, चंद चंादी की सिक्को की खनक के आगे सारे नियमों और कानूनो को तोडकर जिस तरह से स्थानांतरण किया गया था, उससे साफ जाहिर होता है कि उच्चाधिकारियों का भी हाथ इस व्यवस्था में रहा होगा। तत्कालीन सहायक आयुक्त डी.एस. राव और सहायक वर्ग-2 राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला के द्वारा की गई गडबडियों की शिकायत जब कमिश्नर कार्यालय तक पहुंची तो जांच हुए और जांच में इनकी संलिप्पता भी पाई गई, जिसके बाद कमिश्नर ने कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्यवाही कर पुन: कमिश्नर कार्यालय को अवगत कराने के आदेश दिये थे, लेकिन कार्यवाही तो दूर वह पत्र कहां रूका हुआ है, शायद किसी को पता भी न हो।
यह किया था दोनो ने
मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2019 में जारी स्थानांतरण नीति के विरूद्व स्थानान्तरण प्रस्ताव तैयार कर स्थानांतरण आदेश जारी करने हेतु तत्कालीन सहायक आयुक्त डी.एस. राव एवं शाखा लिपिक सहायक वर्ग-2 राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला के साथ मिलकर 21 कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के लिए पिछली तारीख से नोटशीट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भ्रम में रखा और मनमाने तरीके से पूरे प्रक्रिया को अंजाम दे दिया था।
तीन सदस्यीय दल ने की जांच

परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना पुष्पराजगढ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय दल गठित कर जांच कराई गई थी, परियोजना प्रशासन के पत्र क्रमांक-421, दिनांक-17 मार्च 2020 द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रेषित करते हुए दिनांक-25 अगस्त 2019 को जांच प्रतिवेदन की पृष्ठांकित प्रति उपलब्ध कराई गई थी, जिसका अवलोकन आयुक्त के द्वारा किया गया, जिसमें ऑनलाईन स्वैच्छिक स्थानांतरण हेतु वर्ष 2019-20 में प्राप्त प्रस्ताव को नोटशीट पृष्ठ क्रं-17 एवं 18 में कुल 21 कर्मचारियों का पिछली तारीखों में तैयार किया जाकर राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला एवं तत्कालीन सहायक आयुक्त डीएस राव के द्वारा उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना पाया गया था।
अंधेरे में उच्चाधिकारी
दस्तावेजों में दोनो के हस्ताक्षर मौजूद है, लेकिन कहीं भी किस दिनांक को नोटशीट प्रस्तुत की जा रही है यह अंकित ही नही है, इस कूटरचित कार्य में उच्चाधिकारियों को अंधेरे में रखकर प्रभारी मंत्री से स्थानांतरण आदेश हेतु नोटशीट में अनुमोदन प्राप्त कर कार्यालय आदेश क्रं-3788, दिनांक-13 अगस्त 2019 को प्रभारी मंत्री के हस्ताक्षर से स्थानांतरण सूची जारी करा दी गई थी।
आवक-जावक पंजी से भी छेडछाड
जांच प्रतिवेदन के अनुसार स्थानांतरण नीति हेतु निर्धारित की गई समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी, फिर भी संबंधित लिपिक एवं तत्कालीन सहायक आयुक्त द्वारा कार्यालय के आवक-जावक पंजी में कुछ जावक नंबर छोडकर रखाया गया था और अनुमोदन प्राप्त होने के पश्चात पिछली तारीखों पर छोडे गये जावक नंबरो पर स्थानांतरण आदेश को डिस्पैच कर स्थानांतरण सूची जारी किया गया था, जिसकी पुष्टि जावक शाखा लिपिक के द्वारा दिनांक-23 जनवरी 2020 को अपने कथन में स्पष्ट किया गया है।
अब कार्यवाही का इंतजार
तत्कालीन सहायक आयुक्त डी.एस. राव और सहायक वर्ग-2 राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला के कारनामों पर कमिश्नर ने पर्दा उठाते हुए कलेक्टर को कार्यवाही के लिए पत्र लिखे, जिसमें दोनो के द्वारा पद का दुरूपयोग करते हुए शासन-प्रशासन को अंधेरे में रखा जाकर स्थानंातरण नीति के विरूद्व कलेक्टर के माध्यम से स्थानांतरण सूची में प्रभारी मंत्री से अनुमोदन कूटरचित ढंग से प्राप्त किया है, जिस कारण उक्त कृत्य म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1965 के विपरीत एवं दण्डनीय है, म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के सहपठित नियम-9 के तहत कार्यवाही करना सुनिश्चित कर एवं कार्यवाही से इस कार्यालय को अवगत कराने को कहा गया है, लेकिन अभी भी कार्यवाही का इंतजार है।
इनका कहना है
कल ही शुक्ला जी की कार्यवाही संबंधी दस्तावेज में हस्ताक्षर के लिए कलेक्टर साहब के यहां भेज दिये है, शायद हस्ताक्षर हो भी गये हो और डीएस राव राजपत्रित पद पर है उसमें कार्यवाही कमिश्नर साहब ही करेंगे।
सरोधन सिंह, अपर कलेक्टर अनूपपुर

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