डोंगरिया कला की भूमि पर खेडिय़ा का खंजर नियम से परे पत्थर का उत्खनन ब्लास्टिंग भी है जारी

संतोष कुमार केवट

पांच वर्षो में नही लगाये पौधे, पर्यावरण विभाग की अनदेखी खनिज विभाग द्वारा मंजूर खदानों में नियम कानून ताक पर रखकर पत्थर उत्खनन किया जा रहा है, डोंगरिया कला में खदान ग्रेनाइट की है और पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है, उत्खनन करने खदान की जहां लीज है, उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र से पत्थर निकाला जा रहा है, पत्थर निकालने में सबसे अधिक बारूद का उपयोग हो रहा है, पांच वर्षो में पौधे नही लगाये गये है और पर्यावरण व खनिज विभाग सोशल डिस्टेसिंग मैंटेन कर रहा है।
अनूपपुर। डोंगरिया कला का नाम अब अखबार के पन्नो में इसलिए आ रहा है क्योकि यहां करोडपतियों ने चंद खदाने लेकर नियम विरूद्व कार्य से अरबपति बनने का सपना देख रहे है। यह स्थान उनके नजरो में कुबेर का असली खजाना जैसा लगता है क्योकि जिम्मेदारो ने पांच वर्षो में इस स्थल का निरीक्षण करना तो भूल ही गये। खदान की अनुमति देते समय खदान संचालको को किन-किन नियमों का पाठ पढाया गया था उसे तो याद ही नही है और पर्यावरण विभाग की नजरे बहुत दूर है, शायद इसलिए खदान संचालक अपने आप को डोंगरिया कला का बादशाह मान बैठा और अपने मनमुताबिक गतिविधयों को अंजाम दे रहा है।
ब्लास्टिंग से भूकंप जैसे हालात
लगातार होने वाली ब्लास्टिंग किसी का भी दिल दहलाने वाली साबित हो रही है, कुछ ही दूरी पर गांव में तो हालात बद से बदतर हो गए हैं। उत्खनन की ब्लास्टिंग से गांव में बने मकान और ग्रामवासी अब सुरक्षित नही है, ब्लास्टिंग के बाद भूकंप जैसे हालात बनते हैं। पत्थर उत्खनन के लिए ब्लास्टिंग का कोई निश्चित समय नहीं है, दिन हो या रात, जब चाहे ब्लास्टिंग कर दी जाती है। मशीनों से होल कराकर बारूद भरी जा रही है, जोरदार ब्लास्टिंग का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं। पर्यावरण के साथ गांव वालों के लिए यह उत्खनन खतरनाक साबित हो रहा है। इसके बाद भी खनिज विभाग और प्रशासन गंभीर नहीं है।
मामला खसरा नंबर-451 का
जानकारी के अनुसार ग्राम डोंगरिया कला के खसरा नंबर 451 पर 10 हेक्टेयर में लीज और क्रेशर प्लांट स्थापित है। जिसके संचालक है बिजुरी निवासी बालमुकुंंद खेडिया है, जिनके द्वारा ग्रेनाइट और पत्थर की लीज स्वीकृत कराई गई और लेकिन ग्रेनाइट को छोडकर पत्थर का उपयोग धडल्ले से किया जा रहा है, पूरे कार्य को नियम विरूद्व तरीके से किया जा रहा है। विभाग के द्वारा अगर निरीक्षण कर जांच की जाती है तो सच पूरी तरह सामने आ जायेगा।
क्रेशर सिर्फ कमाई का जरिया
ग्राम डोंगरिया कला के निकट आम जन के हितों की अनदेखी करके चलाई जा रही क्रे्रशर सिर्फ कमाई का जरिया बनी है। खनन नियमों के तहत आमजनों के हितों का ख्याल करना तो दूर की बात के्रशर संचालक द्वारा यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये गए हैं। प्रशासन कार्य के नाम पर खानापूर्ति के अलावा कुछ भी नहीं कर सका है। यह भी आरोप है कि क्रेशर संचालक द्वारा खदान की सीमा के बाहर ब्लास्टिंग कर पत्थर निकालने का काम किया जा रहा है।

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