भुनेश्वर ने चंदनिया पंचायत से लिया दोहरा लाभ

पत्नी के नाम पर फर्म खोल शासन को खुलकर लगाया चूना

अनूपपुर। पंचायती राज एक अहम व्यवस्था है। पंचायतों से ही गांवों के विकास की रूपरेखा तैयार होती है। गावों में विकास कार्य करवाने में पंचायतें ही अहम भागीदारी निभाती हैं। यह सही है कि पंचायतों की ओर से करवाए जा रहे कार्यो से गांव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन एक ओर जहां विकास कार्य हो रहे हैं। वहीं पंचायत के जिम्मेदारों की ओर से कई प्रकार के घोटाले भी समय-समय पर उजागर होते रहते हैं। ऐसे में पंचायतों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी हैं।
यह है मामला
जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का खेल किस कदर खेला गया है, यह किसी से छुपा नहीं है, बावजूद इसके जनपद सहित में बैठे जिम्मेदारों ने आंख बंद रखी है, मजे की बात तो यह है कि ग्राम पंचायत में पदस्थ सचिव दोहरा लाभ लेने और नियमों की अवहेलना करने से भी नहीं चूक रहे हैं, बीते वर्षाे में पंचायतों में के रिश्तेदारों के नाम पर फर्म का वाणिज्यकर विभाग में पंजीयन कराकर खुद की पंचायतों को लाखों का भुगतान किया गया है, ऐसा ही मामला पुष्पराजगढ़ की ग्राम पंचायत चंदनिया का है, जहां पंचायत में पदस्थ रहे पूर्व सचिव भुनेश्वर सिंह द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर फर्म खोल लाखों का भुगतान किया है।
ताक पर रखे कायदे
नवंबर 2015 से पहले पंच-परमेश्वर एवं मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र में किए जाने वाले निर्माण कार्य का भुगतान सरपंच-सचिव चैक के माध्यम से सप्लायर फर्म को किया करते थे। सरपंच-सचिव ने इस प्रावधान का लाभ उठाते हुए अपने पुत्र, पुत्री व अन्य संबंधियों के नाम फर्में बनाकर सरकारी भुगतान हड़पना शुरू कर दिया, लेकिन यह मामला संज्ञान में आते ही राज्य शासन ने प्रावधान में बदलाव कर दिया। जिसके तहत सरपंच-सचिव एवं रोजगार सहायक के रिश्तेदार व पुत्र, पुत्री के नाम की सप्लायर फर्म को मनरेगा व पंचपरमेश्वर योजना के तहत भुगतान नहीं हो सकता है। इस पर लगाम लगाते हुए शासन ने प्रत्येक जनपद सीईओ को निर्देश भी जारी किए, लेकिन पुष्पराजगढ़ जनपद में शासन के नियमों को ताक पर रखकर सचिव के परिजन के नाम सप्लायर फर्म को शासन की योजनाओं का भुगतान किया गया है।
शिकायतों पर नहीं होती कार्यवाही
बीते वर्षाे में ग्राम पंचायत चंदनिया में भ्रष्टाचार का खुला खेल-खेला गया है, सूत्रों की माने तो भुनेश्वर सिंह की पंचायतों में ऑफ रिकार्ड ठेके पर चहेतों को सचिव द्वारा काम दिये गये है, अगर पंचायतों में हुए निर्माण कार्य सहित पत्नी की फर्म के खरीदी बिक्री की जांच हुई तो, विभाग से की गई धोखे बाजी सहित भ्रष्टाचार के मामले में जहां सचिव नपते नजर आयेगें, वहीं वाणिज्यकर सहित खरीदी बिक्री में हुई गड़बड़ी के मामले में फर्म संचालक उनकी पत्नी भी फंस सकती है, पूरे मामले में अगर जिला पंचायत से दल गठित कराकर जांच कराई जाये तो, बीते वर्षाे सहित वर्तमान पंचायत पिपरहा में दर्जनों भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं।

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