देवहरा राशन दुकान पर जमकर हो रही कालाबाजारी, सोसायटी अध्यक्ष होने का मदन द्विवेदी उठा रहा फायदा

 

अनूपपुर। जिले के देवहरा ग्राम पंचायत में बड़ा राशन घोटाला सामने आ रहा है। गांव वालों का कहना है की कोरोना काल के दौरान जिम्मेदार आला अधिकारियों और माफियाओं ने मिलकर गरीबों को मिलने वाला राशन जमकर बेच रहे हैं। शासकीय उचित मूल्य की दुकान से राशन वितरण में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। दुकान संचालक मदन द्विवेदी जो कि अनूपपुर जिले के सोसाइटी संघ के अध्यक्ष भी हैं अध्यक्ष होने का पूरा फायदा उठा रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रदेश के मुखिया श्री चौहान द्वारा गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन के दौरान उन्हें 3 महीने का राशन एक साथ मुफ्त में देने का घोषणा किए थे। इसका लंबा फायदा उठाते हुए संचालक द्वारा अपनी झोली भरी जा रही है लॉकडाउन के दौरान सभी हितग्राहियों को 2 किलो शक्कर भी बांटने थे लेकिन राशन की दुकान खोल कर गरीब हितग्राहियों को गेहूं व चावल प्रदाय तो किया जा रहा है लेकिन शक्कर का एक दाना भी हितग्राहियों को प्राप्त नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों को नमक के लिए डोंगरा टोला बुलाया जा रहा है, जबकि उक्त ग्राम की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। अब इस लॉक डाउन के दौरान आप भी समझ सकते हैं कौन गरीब हितग्राही 10 किलोमीटर दूर जाकर नमक अलग से प्राप्त कर पाएगा। इसी प्रकार अगर कोई एक व्यक्ति अपना राशन तय किए हुए तारीख पर नहीं उठा पाता है तो उसका राशन भी हड़प कर ऊंचे कीमत पर बाजार में बेच दिया जा रहा है और यह सब भ्रष्टाचार अनूपपुर जिला सोसाइटी संघ के अध्यक्ष मदन द्विवेदी द्वारा चुनकर रखे गए फर्जी सेल्समैन दीपक तिवारी द्वारा बखूबी किया जा रहा है। अब कोविड-19 के समय गेहूं चावल के साथ शक्कर का वितरण ना करके सभी शक्करों की बोरियों को बाजार में बेच दिया जाएगा और इसका कोई भी हिसाब किताब किसी को भी पता नहीं चल पाएगा क्योंकि जिले स्तर के आला अधिकारी भी अध्यक्ष महोदय के सेवादार की श्रेणी में बखूबी शामिल हैं। इसलिए आज तक कोई भी कार्यवाही इस दुकान पर नहीं हो पाई है जबकि फर्जी व्यक्ति बैठकर पूरा खेल खेल रहा है। यही नहीं पूरे जिले में लगातार कई वर्षों से कालाबाजारी का खेल जमकर चल रहा है, लेकिन पंडित जी के दबदबा के कारण कोई भी आदिवासी या गरीब पात्र व्यक्ति इनके खिलाफ नहीं बोल सकते। कोयलांचल क्षेत्र होने के कारण यहां सैकड़ों व्यक्ति पूरे जिले में बसे हुए हैं जोकि एसईसीएल के कर्मचारी हैं लेकिन हरिजन, आदिवासी व्यक्तियों को अनाज फ्री दिए जाने वाले नियमों को अपना गाइडलाइन बनाते हुए अधिकांशत पूरे जिले में वर्षों से भ्रष्टाचार मचाते हुए अनूपपुर के खाद्य अधिकारी से मिलीभगत कर सभी एसईसीएल कर्मचारियों के नाम से फर्जी कूपन जारी करा कर इनके नाम पर अनाज जारी करवाया जाता रहा है। लेकिन जब से आधार कार्ड लिंक होने का प्रावधान व डिजिटल फिंगर लगने के कारण अचानक खाद्यान्न उठाओ में गिरावट भी आई और इन सभी कार्यों में पारंगत दक्षता हासिल किए हुए देवहरा शासकीय दुकान संचालक मदन द्विवेदी महारत हासिल किए हुए हैं। और ऊपर से लेकर नीचे तक सबको मैनेज करके यह कारनामा को अंजाम देते हैं ।

संचालित दुकान मदन के नाम संचालन कर रहा दीपक

शासकीय उचित मूल्य की दुकान मदन द्विवेदी के नाम पर संचालित है लेकिन ऊंचे रुतबा और इतने दिनों में व्यापारिक केंद्र बनाकर लूटने के कारण बड़ा पैसा आ जाने के कारण संचालित नाम की दुकान पर भी नहीं बैठता है। और इसे व्यापारिक केंद्र बनाकर फर्जी व्यक्ति को उक्त दुकान पर बैठा कर वितरण करवाया जाता है जबकि नियम तो यह कहता है कि जिसके नाम पर संचालित दुकान हो पूरी जिम्मेदारी से करना चाहिए, बाहर का कोई भी व्यक्ति उक्त दुकान पर आकर नहीं बैठ सकता लेकिन सोसाइटी संघ के अध्यक्ष होने के कारण खाद्य अधिकारियों से भी इनका जुगाड़ बना हुआ है और इसी जुगाड़ के बल पर खुद ना बैठते हुए अपने आदमियों को बैठा कर गरीब व्यक्तियों के खाने को लूटने का जुगाड़ भी बराबर बनाए रखते हैं।

फर्जी सेल्समैन बांट रहा राशन

देवहरा शासकीय उचित मूल्य के दुकान में बैठा व्यक्ति दीपक तिवारी सेल्समैन स्वयं ही उचित तरीके से नहीं बैठा है तो वितरण प्रणाली कैसे उचित रह सकता है। मदन द्विवेदी सोसाइटी संघ के अध्यक्ष होने का जमकर फायदा उठाते हुए स्वयं के दुकान पर कभी बैठते तो नहीं है लेकिन अपने राजनीतिक ताकतों से अपने दुकान पर अनूपपुर के खाद्य अधिकारी से सांठगांठ करते हुए दीपक तिवारी नाम के व्यक्ति को सेल्समैन के पद पर बैठा कर रखे हैं बताया जाता है कि दीपक तिवारी फर्जी तरीके से सेल्समैन के पद पर बैठा हुआ है। जिले के वितरण संबंधी महत्वपूर्ण पद पर कब इनकी नियुक्ति हुई यह भी जांच का विषय है, क्योंकि किसी व्यक्ति के सेल्समैन के पद पर भर्ती होने के लिए बाकायदा अखबारों में विज्ञापन निकाल कर सूचना दी जाती है जिसमें बेरोजगारी के दौर में सैकड़ों लोग लगे होते हैं लेकिन जुगाड़ के काम में माहिर सोसाइटी संघ के अध्यक्ष ने ना जाने कौनसी चाबी घुमाई है कि किसी भी लैंप्स मैं नियुक्ति ना होते हुए भी अनूपपुर जिले के सबसे बड़े पंचायतों में शुमार देवहरा के शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर बैठकर काला खेल खेलकर नियुक्ति दिलाई गई है। इस बात को गंभीरता से लेते हुए जिले के कलेक्टर अगर जांच करवाते हैं तो निश्चित रूप से इस विभाग में भारी गोलमाल अपने आप दिख जाएगा ।

कालाबाजारी का नया तरीका अपना रहा सेल्समैन

वितरण प्रणाली में ऑनलाइन होने के बाद अब हितग्राहियों को नए नए तरीके से परेशान करने की नियत और कालाबाजारी करने के लिए नया तरीका अपनाकर वितरण को रोकते हैं और बाद में इसे अपनी कीमत पर तय करके अपात्र व्यक्तियों को बेचते है। इसमें प्रमुख रूप से चावल गेहूं लेने वाले व्यक्ति अगर एक महीना अपना राशन नहीं उठाते हैं तो दूसरे महीना उन्हें नहीं मिलने का कारण तो बता देते हैं की ऑनलाइन हो गया है आप इस महीना नहीं उठा पाए हैं, तो आपका राशन वापस चला गया है और भोले भाले गरीब आदिवासी हितग्राही भी ज्यादा बात ना करते हुए डर के मारे अपनी गलती समझ कर चुपचाप अपना राशन त्याग देते हैं। लेकिन सेल्समैन अपनी चालाकी कर उन्हें दोनों महीना के लिए डिजिटल अंगूठा लगाकर उनका राशन हड़प लेते हैं इसी प्रकार अभी 2 किलो शक्कर को बांटा नहीं गया है सिर्फ गेहूं और चावल देकर वारा न्यारा कर दिया गया है ना किसी हितग्राही ने कोई शिकायत की और ना ही इनके द्वारा कोई बोर्ड लगाकर सूचना दी गई है की शक्कर आपको कब दी जाएगी और जब यही हितग्राही इनके पास बाद में पहुंचेंगे तो यह बड़ी मासूमियत से कह देंगे कि आप अगले महीना नहीं उठाए तो आपका शक्कर वापस चला गया है, और नमक की कालाबाजारी के लिए डूंगरा टोला से आकर ले जाने की बात कहते हैं जबकि ग्राम पंचायत देवहरा वितरण प्रणाली से डोगरा टोला की दूरी लगभग 10 किलोमीटर की निश्चित रूप से होगी। इस प्रकार नए-नए तरीकों से हितग्राहियों को परेशान कर एवं डरा धमका कर इनका राशन हड़प कर लिया जाता है और फिर बाजार के भाव में बेचकर लाखों रुपए कमाते हैं।

इस पूरे प्रक्रिया में पूरा विभाग का सांठगांठ बखूबी चला आ रहा है और लगभग जिले में बैठे आला अधिकारी भी इस बात से अनजान नहीं है लेकिन जब महीनों के हिसाब से इन्हें कमीशन मिल रहा है तो यह लोग भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ कर आंख बंद कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। चाहे इसके लिए सरकार का जितना भी नुकसान हो जाए इन्हें फर्क नहीं पड़ता इन्हें तो बस अपने महीने में कमीशन से मतलब रहता है। इसलिए तो कभी भी पूरे जिले में कोई बड़ी कार्यवाही खाद्य विभाग द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकान के संचालकों पर नहीं किया जाता है। और वर्षों से हजारों कूपन फर्जी तरीके से जारी करा कर उठाव किया जाता है इन पर भी जांच होने से करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आ जाएगा। आज कोरोना काल में आपदा के समय को अपने लाभ का धंधा बना कर 3 महीने के मिलने वाले राशन पर जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं कहीं पर नमक नहीं दिया जा रहा है, तो कहीं शक्कर को रोक लिया जा रहा है इन सब के पीछे जुगाड़ के लिए जाने वाले मदन द्विवेदी का बहुत बड़ा हाथ है, जो कि पूरे जिले में बटने वाले वितरण प्रणाली पर एक विशेष पहचान रखते हैं। ऐसे लोगों की संपत्ति को अगर जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा यही नहीं सूत्रों द्वारा तो यह भी बताया गया की खाद्य विभाग के अधिकारी जो अपना जमीर बेच कर एफसीआई गोदाम से जहां पर 50 बोरी उठाओ पंजी में दर्ज होता तो है, लेकिन निश्चित रूप से 80 बोरी लोड करवाते हैं और जमकर भ्रष्टाचार करते हुए अपना जेब भरते हैं। और बाद में स्टार्ट को पूरा दिखाने के लिए सड़े गले मालों पर दिखा कर कागजी कोरम पूरा कर देते हैं।

कोटेदारों की संपत्ति की होनी चाहिए जांच

शासकीय वितरण प्रणाली में जमकर हो रहे भ्रष्टाचार को संज्ञान में लेते हुए कैबिनेट मंत्री खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग बिसाहू लाल सिंह एवं जिले के संवेदनशील कलेक्टर गंभीरता से इस विषय पर जांच करवाते हैं तो निश्चित रूप से करोड़ों का घोटाला इस कोयलांचल नगरी से उभर कर सामने आएगा क्योंकि यहां पर खाद्य विभाग के अधिकारी एवं दुकान संचालकों के सांठगांठ के कारण हजारों फर्जी कूपन जारी करवा कर वर्षों से अकूत धन कमाया हुआ घोटाला भी सामने आ सकता है। साथ ही दुकान संचालकों की संपत्तियों की भी जांच करवाई जानी चाहिए जिससे गरीबों के राशन से अपने लिए हवेली तैयार करने वाले दुकान संचालकों पर भी कार्यवाही सुनिश्चित हो सके और शासन के रुपयों को बर्बाद करने वाले लोगों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित हो सके ।कोयलांचल क्षेत्र में कोयला, सूदखोरी,अवैध संपत्तियां, का विषय तो हमेशा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा घोटाला इस क्षेत्र में एसईसीएल कर्मचारियों का जाति को देखकर फर्जी कूपन जारी करवाना प्रमुख कारण रहा है । फर्जी कूपन से अनाज प्राप्त कर बेचे जाने का भी बहुत बड़ा धंधा इस क्षेत्र में जोरों पर वर्षों से फल-फूल रहा है । इन सब की संपत्तियां जांच की गई तो एक प्रदेश स्तर का महा घोटाला सामने आ जाएगा।

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