सीएम के सपनों पर बीटीआर प्रबंधन की करारी चोंट

रोजगार में आदिवासी को पीछे छोड दबंगों का कब्जा

बफर से सफर की शुरूआत में अधिकारियों ने रसूखदारों को दिया

महत्व

ताला। आदिवासी बाहुल्य जिले में रोजगार के किल्लत के बीच एक सुनहरी किरण तो दिखी लेकिन उसमें भी बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में वर्षों से जमें अधिकारी द्वारा चहेतों को और रसूखदारों को नियम और कायदों की भेंट चढ़ाते हुए लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है। बफर से सफर की शुरूआत करने वाले सुबे के मुखिया ने बाघों की नगरी में इस योजना के पीछे आदिवासियों को रोजगार मुहैया कराने का दावा किया था और इसके भर्ती में पूरे पारिदर्शिता के साथ जरूरतमंदों और योग्य व्यक्तियों को रोजगार से लाभान्वित करने का दम भरा था लेकिन उनके सपनों को बीटीआर में बैठे जिम्मेदार कुचलने का प्रयास कर रहे हैं। अपनी मनमर्जी चलाते हुए अधिकारी अयोग्य लोगों को चंद कौडी के दामों में रोजगार बेचने की कवायद में हैं। स्थानीय स्तर पर बफर व प्रभावित क्षेत्र के लोगों को गाइड व टाइगर रिजर्व के अन्य कार्यों में रोजगार मुहैया होगा, किंतु बीटीआर में सपनों को कागजों में प्रबंधन ने दिखाते हुए उक्त योजना का लाभ दबंग और आर्थीक रूप से मजबूत व अयोग्यों को दिया जा रहा है।
यह है मामला
बीटीआर में बीते माह से बफर से सफर की शुरूआत की गई जिसमें स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इसमें श्री चौहान ने कहा कि स्थानीय स्तर पर जो आदिवासी समाज के लोग पिछड़े हुए हैं उन्हें रोजगार मुहैया कराते हुए उनके भविष्य को संभारने के बेहतरी के लिए है लेकिन बीटीआर में बैठे अधिकारी सीएम के सपनों को कुचलने में जुटे हैं। हाल ही में 2020 के दिसम्बर माह में गाइड प्रशिक्षण हेतु लगभग 267 फार्म लिए गए, जिसमें विभागीय जानकारी अनुसार महज 8 लोगों ने उक्त प्रशिक्षण पास किया। गाइड भर्ती में पार्क के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा 8 प्रशिक्षाणर्थी पास किए हुए अभ्यार्थियों को अतिरिक्त गाइड का हवाला देकर उन्हें झांसे में रख उनकी भर्ती रोक दी गई। जबकि 10 प्रशिक्षाणर्थियों के कम से कम अंक प्राप्त किए इसमें इनके द्वारा उत्र्तीण अंक भी नहीं लाए गए उनका साक्षात्कार लेकर बतौर गाइड भर्ती करने के लिए प्रभारी उपवन संचालक ने निर्देशित कर दिया। वहीं 10 प्रशिक्षणार्थी की जगह बाकी 257 अभ्यार्थियों के अंक ठीक होने अर्थात जिनके द्वारा योग्यता परीक्षा उत्र्तीण कर ली गई उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा और 10 लोगों को महत्व दिया जा रहा है। जिस के संबंध में संलिप्त अन्य अभ्यर्थियों के द्वारा आपत्ति बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नाम से दिया गया बीटीआर के प्रभारी उप वन संचालक मार्च में सेवा निवृृत्त हो रहे हैं जिस पर लोगों का कहना है कि जाते जाते साहब अपने चहेतों से दक्षिणा लेकर उन्हें बतौर आशीर्वाद खैरात की तरह रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
रसूखदारों की भेंट चढ़ी गाइड भर्ती की प्रक्रिया
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटकों का तो तेजी से बढ़ावा हुआ, किन्तु गाइड भर्ती में इजाफा नहीं हुआ, शायद स्थानीय रसूखदारों की सही सेटिंग न होने के कारण गाइड भर्ती नहीं हुई, अब सीएम के द्वारा बफर क्षेत्र में शुरू किए गए पर्यटक क्षेत्र के बढ़ावा और स्थानीय रोजगार की प्रतिपूर्ति पर अधिकारी और रसूखदारों की मिलीभगत से गाइड भर्ती में घोटाले की गंध आने लगी। स्थानीय लोगों की मानं तो पार्क में फिलहाल महज 70 गाइडों का कब्जा रहा। उपरोक्त गाइडों के बीच में यदि कोई प्रभावित क्षेत्र या बेरोजगार लोगों को प्रबंधन के द्वारा जोडऩे का प्रयास हुआ भी तो रसूखदारों के अडंगे की भेंट चढ गई और गाडिय़ां कम होने का कारण लगा दिया गया जबकि कुछ वर्ष पहले गाडिय़ों और टिकटों की मात्रा में इजाफा किया गया। कुछ गाइडों को प्रभावित क्षेत्र के ग्रामों से लाकर जोड़ा गया तो गाइड यूनियन के द्वारा उच्च न्यायालय में बिना प्रशिक्षण के गाइड संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटकों को भ्रमण करा रहे हैं का कारण देकर याचिका दायर कर दिया गया साथ ही उल्लेख किया गया कि शासन के द्वारा कोई भी ऐसा आदेश नहीं है की और गाइड भर्ती किए जाएं। जिस पर उच्च न्यायालय ने कोर क्षेत्र में पर्यटक भ्रमण कराने हुेतु प्रशिक्षण के बगैर प्रवेश करने वाले गाइडों पर रोक लगा दिया, जो मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।
राज्यपत्र को किया दरकिनार
यदि भारत सरकार के नियमों को पढा जाए तो 26 मई 2018 के राज्यपत्र में स्पष्ट लेख है कि केवल गाइड प्रशिक्षण दिलवाकर पार्क निर्धारण वाहन क्षमता के डेढ़ गुना लोगों को भर्ती कर रोजगार दिया जाएगा। लेकिन प्रबंधन अपने चहेतों को लाभ देने के फेर में गरीब आदिवासियों को पीछे छोड रहा है जबकि वे योग्य हैं लेकिन अयोग्यों के रसूख के आगे नतमस्तक प्रबंधन राज्य पत्र के शर्तों के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान के बफर से सफर के घोषणाओं की खिल्ली उडा रहा है।
फर्जी कारनामों के मास्टर माइंड शुक्ला
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रभारी उपवन संचालक अनिल शुक्ला के द्वारा बीटीआर में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। फिर चाहे मामला रिर्सोट निर्माण के अनापत्ति प्रमाण पत्र का हो, इको सेंस्टविक जोन के अंतर्गत रेत खदानों के एनओसी से लेकर पार्क क्षेत्र में गाइड भर्ती तक का रहा हो। पूर्व में भी नियम को ताक में रख उच्च अधिकारियों को गुमराह कर तीन श्रमिकों की भर्ती इनके द्वारा की गई थी जिसमें कमियां पाते हुए तत्कालिन उप वन संचालक सिद्धार्थ गुप्ता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। खबर है कि कुटिल बु़िद्ध रखने वाले अनिल शुक्ला के एसडीओ से लेकर उप वन संचालक के प्रभार का लेखा जोखा निकालकर निष्पक्ष जांच की जाए तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन उपवन संचालक देवांशु शेखर व समान्य वन मण्डल के डीएफओ राम सिंह के घोटाले से भी बड़े घोटाले पर से पर्दा उठ सकता है।

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