बैंकिग कार्य छोड नाबालिको को घुमा रहा कैशियर

भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसला कर करता है शोषण
ना जाने कितनी माशूमों की जिन्दगी की खराब, मर्यादा को किया तार-तार
पुष्पराजगढ के करपा में स्थापित एसबीआई की शाखा में पदस्थ कैशियर की करतूत तब सामने आ गई, जब करपा के ग्रामीणों ने नाबालिकों के साथ बाइक पर सवार होकर घूमते हुए देखा, बैंकिग समय एवं लंच का बहाना बनाकर दूर कही  भ्रमण में निकले एसबीआई का यह कर्मचारी जब पकडा गया तो शरीफ जादे बन गये, भोले-भाले ग्रामीणों का लाभ उठा अपने प्रभाव में नाबालिकों को अपने कमरे तक ले जाने वाला यह कैशियर न जाने कितनो को अपने प्रेम जाल में फंसा कर मर्यादा को तार-तार कर दिया होगा।
अनूपपुर। आदिवासी अंचलों में आज भी शिक्षा व जानकारी का अभाव है, जिसके कारण शिक्षित लोगों का प्रभाव ज्यादातर देखने को मिल ही जाता है, अपने शिक्षा और नौकरी का प्रभाव कोई ऐसे दिखाता होगा, शायद ही आपने कभी सुना होगा, लेकिन करपा में संचालित बैंक के पढे-लिखे कर्मचारी ने भोले-भाले आदिवासियों का  फायदा उठाकर नाबालिक लडकियों को बहला-फुसला कर अपने प्रेम जाल में फंसा का उनका शोषण करते हुए जरा भी अचरज नही की। कुछ जागरूक ग्रामीणों ने जब इन्हे पकडा तो दादागिरी में उतारू हो गये, हांलाकि नाबालिक के परिजनों ने मर्यादा और जानकारी के अभाव में कानून का सहारा नही लिये, जिसके कारण ऐसे लोगों को सबक नही मिल पाया, लेकिन वह दिन दूर नही जब ऐसे लोगों को कानून सबक अवश्य सिखायेगी।
शोषित हो रहे आदिवासी
पुष्पराजगढ के करपा में संचालित शाखा भारतीय स्टेट बैंक पूरे वर्ष भर के दरमियान सुर्खिया में रहा है, अवलोकन करें तो कार्य की शरूआत सुबह की चाय के पश्चात होती है, एकाध घण्टे बाद पेट में चूहे कूदने लगते हैं, कहने को मध्यांतर अर्थात लंच ब्रेक आधे घण्टे का होता है, लेकिन एक कर्मचारी डेढ घण्टे की अंग्रेजी फिल्म पूरी करके ही ऑफिस लौटता है, आते ही चाय की तलब शुरू होती है, यह एक संक्रमण की बीमारी है, अपने साथ सु-बालाओं को समेट लेती है। पाँच बजे नही की सर्वर प्रॉब्लम हो जाती है, नजरें मोबाइल की स्क्रीन और घडी की काँटों में जम सी जाती है। गुटखा तँम्बाखू की भाँती जालिम होता है ऐसे ही इश्क की खुमारी कहें या बीमारी नास्ते के बहाने दफ्तर के बहुमूल्य समय को हजम करता है।
ग्रामीणों में आक्रोष
एसबीआई शाखा करपा के तत्कालीन कैशियर रजनीश सुतार स्टेट को रुपयों हेर-फेर के मामले में महीने भर पहले नप चुके हैं, रजनीश के बाद सुधार के लिये नये बाबू की एंट्री भी हो चुकी है, जिनका नाम सुजीत कुमार नीरज जो की गुमनाम से हैं, लेकिन अपनी कारस्थानी और अदाकारी से जाने भी जाते हैं, जिसकी झलक ऐय्यासी के रूप में देखी जा चुकी है। बैकिंग समय पर बैंक से बाहर निकल कर कही ंदूर नाबालिक लडकियों को बहला कर घमाने के मामले में ग्रामीणों के साथ आपसी खीचातानी भी हुई थी, जिसके ग्रामीणों में काफी आक्रोश भी देखा गया है।
मैनेजर में बंद की आंखे
भारतीय स्टेट बैंक करपा के युवा कैशियर की कारिस्तानी के बाजार गर्म है, जो की बैंकिंग समय पर अपनी पद प्रतिस्ठा को दाँव में लगाते हुए प्रेम सागर में गोता लगाने को आतुर रहता है, आदिवासी क्षेत्र होने के नाते यहां पर छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोग जानकारी के अभाव में कार्यालय पहुंचते है, जहां पीडित शोषित होते रहते हैं। विभाग के उच्चपदों पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारी आँख मूंद कर बैठे हैं। लोगों का शोषण भारतीय स्टेट बैंक करपा में बदस्तूर जारी है।
फुसलाकर फंसाता है प्रेम जाल में 
शाखा करपा में इंट्री के नाम पर हो या खाता खुलाने के नाम पर हर स्तर लोग शोषित होते हैं, इन्ही मजबूरियों का फायदा उठाते हुए करपा शाखा में पदस्थ कैशियर गाँव की भोली-भाली लडकियों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर दैहिक शोषण करता है। घटना 19 सितम्ंबर को समय लगभग 3 बजे की है, सुजीत कुमार नीरज के नाम से पहचाने जाने वाले बाबू के द्वारा नास्ता करने के नाम पर पब्लिक को लेनदेन से रोका जाता है, और गाडी में नाबालिक लडकियों को बैठाकर ऐय्यासी करने 8 किलोमीटर का सफर भी तय करता है। गाँव की नाबालिक लडकियों को बहला फुसलाकर अपने जाल में फांसता है, कभी खाता के नाम पर तो कभी चंद रुपयों के दम पर नाबालिग लडकियों से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, जिसके कारनामे जगजाहिर है।
शाखा को कर रहा बदनाम
स्टेट बैंक करपा के कैशियर को अभी आये महीने भर हुए नही की एंट्री पर एंट्री मार रहें हैं, अक्सर नए बालाओं के साथ देखे जाते हैं, जंगल किनारे तो कभी रूम के न्यारे इनके इन्ही अदाओं के चलते ब्रांच बदनाम है, बाबू की बाबू गिरी दबे तबके लोगों पर आजमाया जाता है, बैंक या बैंकर वह संस्था या व्यक्ति है जो बैंकिग के काम को मुख्य व्यवसाय के रूप में चलाती है, यदि उसका व्यक्तिगत नेचर उसका आर्थिक लेनदेन का काम गौंण है तो बैंकर नही है।
नाबालिगों का कर रहा शोषण
करियर किसी व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, यह किसी भी इंसान की जीवन शैली का नेतृत्व करता है, जिससे समाज में उसकी स्थिति निर्मित होती है लेकिन बैंकिग जैसे विश्वशनीय संस्था से जुडे कुछ लोग नाबालिगों के करियर बर्बाद करने पर उतारू हैं। जँहा हर कोई एक अच्छी जीवन का सपना देखता है वंही हर कोई मजबूत करियर बनाने में सक्षम नही होता जो अच्छी जीवन शैली को सुनिश्चित करता है।
जवाब देने से प्रबंधक का इनकार 
भारतीय स्टेट बैंक करपा कैशियर सुजीत कुमार नीरज रंगे हाथों मीडिया के कैमरे में कैद होता है, सवाल उठता है कि बैंकिग टाइम पर आपको ब्रांच में होना चाहिये था। सवाल पर भडकते हए घुडकी पर उतारू होकर उल्टे मीडिया को ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया जाता है। इस पूरे मामले को जब उजागर किया गया था, हाथ पैर जोडने लगे और फिर बीमार बताकर बाते करने से भी मना कर दिया। वही शाखा प्रबंधक से मौखिक एवं फोन के माध्यम से चर्चा करना चाहा, लेकिन उन्होने किसी भी प्रकार से जवाब देने से मना कर दिया।

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