राज्य स्तर के लिए चयनित हुआ बाल वैज्ञानिक का शोध पत्र

शहडोल। शासकीय हायर सेकेंडरी छतवई के बाल वैज्ञानिक मनोज बंजारा के शोध पत्र का चयन राष्ट्रीय बाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा साइंस सेंटर ग्वालियर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 28 वें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जूनियर वर्ग के लिए हुआ है । विद्यालय की विज्ञान शिक्षिका डॉ निधि शुक्ला के मार्गदर्शन में मनोज बंजारा ने मु य विषय सतत जीवन के लिए विज्ञान के उपविषय ‘सतत जीवन हेतु पारितंत्र’ के अंतर्गत हमारे आदिवासी इलाके में जलीय पारितंत्र तालाब का तापमान का अध्ययन शीर्षक का चुनाव किया व इस विषय पर शोध कार्य किया।
जलवायु में होता है परिवर्तन
इस आदिवासी इलाके में ज्यादातर लोग मत्स्य पालन करके अपनी आजीविका चलाते हैं, यहां जलवायु में लगातार परिवर्तन के कारण तापमान के अधिक बदलाव के कारण पानी का तापमान परिवर्तित होता रहता है। जिससे ऑक्सीजन का स्तर भी घटता रहता है, जिससे सबसे अधिक प्रभाव मछलियों पर पड़ता है और ऑक्सीजन की कमी से मछलियां रोग ग्रस्त हो जाती हैं, कई बार तापमान अत्यधिक ज्यादा होने से भी वे रोग ग्रस्त हो जाती हैं जिस कारण उनकी संख्या में अचानक कमी आने लगती है उनकी प्रजनन दर भी काफी कम हो जाती है। जिसका कारण आम आदमी को समझ नहीं आ पाता।
ग्रामीणों को दी जानकारी
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां जनजाति काफी पिछड़ी निरीक्षण व आर्थिक तंगी से जूझती है। वर्तमान समय में जबकि हमारा देश कोरोना जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है, इसी के साथ बढ़ती आबादी और घटती कृषि योग्य भूमि पर कम समय में अधिक पैदावार करना किसानों के लिए चुनौती है। साथ ही तालाब पारितंत्र जो हमारे जीवन की अमूल्य धरोहर हैं इसकी उपयोगिता साफ-सफाई व रखरखाव के बारे में लोगों को जागरूक किया अपने शोध कार्य के दौरान मनोज ने अपनी मार्गदर्शी शिक्षिका डॉ निधि शुक्ला के साथ ग्राम छतवई के आसपास तालाबों का भ्रमण किया उनकी जानकारी एकत्र की उनके तापमान का अध्ययन किया सर्वे के दौरान ग्रामीणों को उपयोगी जानकारी प्रदान की। व उन्हें इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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