पदमोह या फिर कर्तव्य परायणता में जुटे सिविल सर्जन

 

कोरोना संक्रमण के बाद भी, क्वारंटीन से कर रहे मार्च क्लोजिंग

 

(Amit Dubey +7000656045)
शहडोल। 11 मार्च को सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार के कोरोना संक्रमण से ग्रसित होने की खबर चर्चा में आई, स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी पुष्टि के बाद श्री परिहार गाइड लाईन के अनुरूप होम क्वारंटीन हो गये। इसके बाद भी इन्होंने अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए अस्पताल की जिम्मेदारियां बखूबी निभाई, हालाकि उन पर यह आरोप भी लगते रहे कि बीमारी के बाद भी पदमोह में डूबे हुए हैं और 31 मार्च की क्लोङ्क्षजग से पहले विभाग के बजट को निपटाने के लिए घर से ही कार्यालय का संचालन और नोटशीट सहित आदेश जारी किये जा रहे हैं।
लगातार जारी हो रहे आदेश
11 मार्च के बाद सिविल सर्जन ने 13 मार्च को शहडोल पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आदेश का हवाला देते हुए 14 मार्च को पुलिस लाईन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में फार्मासिस्ट, ईसीजी टेक्निसियन सहित अन्य कर्मचारियों के मौके पर उपस्थित होने के आदेश जारी किये, यही नहीं 16 मार्च से लेकर 31 मार्च तक चिकित्सकों के समयवार ओपीडी व अन्य आपातकालीन ड्यिुटी रोस्टर भी अपने हस्ताक्षर से जारी किया, इनके अलावा मार्च क्लोजिंग से जुड़ी हुई नोटसीट लगातार निरीक्षण और उसके उपरांत हस्ताक्षर कर जारी की जा रही है।
खतरे में औरों की जिंदगी
कोरोना संक्रमण एक बार फिर पूरे देश सहित प्रदेश व जिले में भी दस्तक दे रहा है, जिले के विभिन्न विभागों के नौकरशाहों सहित अन्य लोग भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं। कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चौपाटी पर भीड़ रोकने के लिए आदेश जारी किए, वहीं पुलिस व प्रशासनिक अमला एक बार फिर हाथ में मॉस्क और जुर्माने की रसीद लेकर लोगों को समझाईश दे रहा है, ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण से ग्रसित होने के बाद भी किसी और को इन दिवसों का प्रभार न देकर कर्मचारियों से सीधे रूबरू होना और फाईलों का निरीक्षण करना अन्य लोगों को भी कोरोना संक्रमण की ओर धकेलने का कारण बन सकता है।
ठण्डे बस्ते में पुत्र मोह का मामला
14 फरवरी को हुई दुर्घटना के मामले में एक की मौत और दूसरे के जिला चिकित्सालय से देवांता भेजे जाने और फिर उसके वापस जिला चिकित्सालय आने का मामला ठण्डे बस्ते में जाता हुआ नजर आ रहा है, मजे की बात तो यह है कि इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार पर आरोप लगे थे और उन्होंने खुद जज बनकर अपने हस्ताक्षर से खुद को क्लीनचिट दे दी और विभागीय पत्र बनाकर जनसंपर्क से मुनादी करवा दी। अचरज की बात तो यह है कि इस मामले में प्रमुख राजनैतिक दलों के मुखिया और जिले के मुखिया के द्वारा कोई पहल नहीं की गई।

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