परिषद में फर्जी नियुक्ति करने वाले सीएमओ खुद निकले नटवरलाल

जुगाड की बैसाखियों से सफाई दरोगा से सीएमओं बने राममिलन
सफाई दरोगा से वर्ग-3, फिर वर्ग-2 और वर्ग-1 तक नोटो ने पहुंचाया
संयुक्त संचालक की जांच में शिकायतों की पुष्टि

शहडोल जिले के जयसिंहनगर परिषद से सफाई दरोगा का सफर तय करने वाले राममिलन तिवारी ने जुगाड की बैसाखियों से पहले अपना पद परिवर्तन करवा लिया और फिर नियमों को किनारे कर राममिलन वर्ग-3 से ऊपर उठते-उठते वर्ग-1 में जांच पहुंचे, जांच हुई तो खुद के साथ आधा दर्जन अधिकारियों को भी ले डूबे।

अनूपपुर। रूपयों और जुगाड के दम पर सफाई दरोगा से मुख्य नगरपालिका अधिकारी तक का सफर तय करने वाले राममिलन तिवारी की जांच और उसके इस गोलमाल कारनामें की अंतिम स्क्रीप्ट खुद उसी मकबूल खान संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, संभाग शहडोल ने लिखी, जिसके बाद बीते माहों में राममिलन ने मिलकर जैतहरी नगर परिषद में अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारी की फर्जी पदोन्नती की थी। विधानसभा में राममिलन तिवारी की नियुक्ति और फिर पद परिवर्तन से लेकर पदोन्नती तक का मामला गूंजा तो अधिकारियों ने हाथ खडे कर दिये, जांच रिपोर्ट आई तो सफाई दरोगा राममिलन तिवारी ने अपने साथ एन.के. जैन, व्ही.एस. त्रिवेदी, अशोक शुक्ला, केपी त्रिपाठी, ओपी दुबे, एच.एम. चौबे सहित अन्य को भी कार्यवाही की जद में ला दिया।
यह निकला जांच में
राममिलन तिवारी के पद परिवर्तन और पदोन्नति के संदंर्भ में जब विधानसभा में प्रश्न पूछे गये तो वर्षो से किये गये भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से हुई पूरी प्रक्रिया के तार खुलकर सामने आ गये। अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 6 जुलाई को संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, सागर संभाग को सौपी गई जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि राममिलन तिवारी जिनकी प्रथम नियुक्ति सफाई दरोगा के पद पर थी, उसका सहायक वर्ग-3 पर पद परिवर्तन तथा सहायक वर्ग-2 एवं सहायक वर्ग-1, जिला चयन समिति में की गई पदोन्नतियां नियमापूर्ण नही है। अत: पद परिवर्तन से लेकर पदोन्नति की समस्त कार्यवाहियां निरस्त की जाये, यही नही इस पूरी प्रक्रिया में शासन के नियमों के विपरीत हुए इस खेल में आधा दर्जन अधिकारियों के भी उत्तरदायित्व तय किये गये है।
1987 में बने थे सफाई दरोगा
16 फरवरी 1987 में राममिलन तिवारी जयङ्क्षसहनगर निकाय में सफाई दरोगा के पद पर पदस्थ हुए थे, 16 जून 1992 को इनका स्थानांतरण नगर परिषद अमानगंज जिला पन्ना के लिए हुआ था, 6 जुलाई को उन्होने पदभार गृहण किया और 13 वर्षो तक इसी पद पर रहने के बाद 10 अगस्त 2005 को तत्कालीन उप संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास सागर एन.के. जैन के माध्यम से इनका पद परिवर्तित हो गया और इस खेल में व्ही.एस. त्रिवेदी तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी, अमानगंज, अशोक शुक्ला आदि ने अपनी भूमिका निभाते हुए प्रस्ताव बनाकर स्वच्छता पर्यवेक्षक की स्वच्छता संवर्ग से लिपकीय संवर्ग वर्ग-3 पद पर पद परिवर्तन की अनुशंसा की। प्रेसीटेंड इन कांउसिल ने संकल्प पारित किया और श्रीमान का पद परिवर्तित हो गया।
वर्ग-3 से 2 का सफर
जुगाड के खेल में माहिर राममिलन तिवारी लिपकीय संवर्ग में सहायक ग्रेड-3 के पद से 9 अगस्त 2007 को नगर पंचायत अमानगंज की प्रेसीटेंड इन कांउसिल की संकल्प से पदोन्नति पाकर सहायक ग्रेड-2 में पहुंच गये, इसके लिए पुन: एन.के. जैन, के.पी. त्रिपाठी, वीरेन्द्र सिंह आदि ने अनुंशसा पत्र पर हस्ताक्षर किये, जबकि मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के मध्यप्रदेश नगरपालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ता) नियम 1967 में स्पष्ट प्रावधान है कि उच्च श्रेणी लिपिक के लिए निम्र श्रेणी लिपिक को 3 वर्ष का अनुभव होना चाहिए, लेकिन इस किनारे करते हुए दो वर्षो में ही अनुमोदन कर पदोन्नति दे दी गई।
और फिर वर्ग-1 में दी दस्तक
रूपयों और जुगाड के दम पर अधिनियम को अपने हिसाब से तोड-मरोड कर लागू करने व करवाने में माहिर राममिलन तिवारी का सफर यही नही रूका, 16 अक्टूबर 2007 को वर्ग-3 से वर्ग-2 में पदोन्नति पाने वाले सफाई दरोगा ने नगर पंचायत अमानगंज की प्रेसीडेंट इन कांउसिल को मोहरा बनाते हुए 2 नवंबर 2015 को प्रस्ताव पारित कराकर खुद की पदोन्नति वर्ग-2 से वर्ग-1 में करवा ली। इस खेल में भी एन.के. जैन, एच.एन. चौबे, ओ.पी. दुबे जैसे पुराने खिलाडी शामिल थे।
और अब विदाई का इंतजार
जैतहरी नगर परिषद के सीएमओ पद पर रहते हुए राममिलन तिवारी ने लाखों के भ्रष्टाचार किये, यही नही अपनी सेवा में आधा दर्जन कर्मचारियों को लगाने वाले कथित सीएमओं ने अनूपपुर नगरपालिका में प्रभार के दौरान जम कर खेल खेला। जैतहरी और अनूपपुर प्रभार के दौरान की गई खरीदियों खासकर कोरोना काल के दौरान इनके मार्फत हुए भुगतानों की जांच की जाये तो लाखों रूपए के गडबडझाले सामने आ जायेंगे, बहरहाल 6 जुलाई को भोपाल से खुले इनके काले कारनामों के चिट्ठे कब कार्यवाही तक पहुंचेंगे अब इसका इंतजार है।
इनका कहना है
संयुक्त संचालक की जांच रिपोर्ट सही नही है, इससे कोई फर्क नही पडता, शासन स्तर पर मुझे इस मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है, सब कुछ नियमों के तहत् हुआ है।
राममिलन तिवारी, सीएमओ
नगर परिषद जैतहरी
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सभी बिन्दुओं पर दस्तावेज और अधिनियम के तहत् जानकारी लेकर उनका अवलोकन किया गया, पद परिवर्तन से लेकर पदोन्नति सब नियमों के विपरीत हुआ है, हमने रिपोर्ट सौप दी है, आगे वरिष्ठ कार्यालय से कार्यवाही होगी।
मकबूल खान, संयुक्त संचालक
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शहडोल संभाग

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