पर्यटन या कुर्सी के लिए राजधानी में कांग्रेसी कर रहे परेड @ मिलेगी नये को जिम्मेदारी या फिर बने रहेंगे सुभाष

निकाय और आगामी साल में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में एक बार फिर जिलाध्यक्ष को लेकर रस्साकसी का दौर शुरू हो गया है, यदि कांग्रेस में यह गुटबाजी बनी रही तो, आगामी निकाय और अन्य चुनाव में भी भाजपा का रास्ता आसान हो सकता है। बहरहाल आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई घोषणा से बड़ी कांग्रेसियों के बीच पड़ी खाई को पाटने की होगी।

(अनिल तिवारी)

शहडोल। 20 सालों से सत्ता से बाहर रहने और पंचायत से लेकर जिला पंचायत और निकाय से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक में हार का मुंह देखने का कांग्रेस का सबसे बड़ा कारण एक बार फिर दोहराया जा रहा है, बीते विधानसभा चुनावों में हाथ आई सत्ता जाने के बाद इस बार 2023 में होने वाले चुनावों में संभावित जीत को लेकर कांग्रेसी इतने उत्साहित हैं कि अब जिलाध्यक्ष के पद को लेकर उनके बीच छिड़ी रार सडक़ पर नजर आने लगी है। पूर्व जिलाध्यक्ष के ऊपर त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव में लगे आरोपों के बाद उन्हें पद से हटाया गया था, प्रदेश आलाकमान ने सुभाष गुप्ता को एक बार फिर शहडोल की कमान सौंपी तो, दूसरे गुट, कुछ खुले तौर पर और कुछ पर्दे के पीछे गुटबाजी पर उतर आये। इसे आलाकमान के आदेश के खिलाफ जाना कहें या फिर कांग्रेस में अनुशासन का खत्म होना, या फिर कार्यवाहक अध्यक्ष के बाद नये सिरे से अध्यक्ष की घोषणा का इंतजार कहा जाये।

गुटों की भोपाल परेड

सुभाष गुप्ता के कार्यवाहक अध्यक्ष बनने के बाद नामदेव, आजाद, प्रदीप और अन्य गुट खुले और दबी जुबान में विरोध पर उतरे, जिसके बाद शहडोल में कांग्रेस के एक गुट ने पत्रकारवार्ता कर सुभाष गुप्ता और उससे जुड़े कांग्रेस पदाधिकारियों के खिलाफ बयानबाजी की, इधर सुभाष गुप्ता को अध्यक्ष मानने और प्रदेश हाईकमान के आदेश को स्वीकार करने वाले एकगुट ने जिसमें कोतमा विधायक सुनील सराफ, पुष्पेन्द्र पटेल, उमा धुर्वे, अभिषेक द्विवेदी, रविन्द्र तिवारी, अजय अवस्थी, शोभाराम पटेल, पीयूष शुक्ला बीते सप्ताह भोपाल जाकर हाईकमान से मुलाकात भी की। सोशल मीडिया पर इस गुट के फोटो जमकर वॉयरल भी हुए, यह चर्चा अभी थमी भी नहीं कि प्रदीप सिंह, बलमीत सिंह खनूजा, मो. जकरिया, सूफियान खान और पर्दे के पीछे अन्य का एक गुट फिर भोपाल जा पहुंचा। जाहिर है कि इस दूसरे गुट को प्रदेश हाईकमान के द्वारा पूर्व में दिये गये आदेश और कार्यवाहक अध्यक्ष की अगुवाई में कांग्रेस का काम करना स्वीकार नहीं रहा होगा। यह बात भी हो सकती है कि कार्यवाहक अध्यक्ष की तत्कालिक घोषणा के बाद स्थाई तौर पर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाना अभी बाकी है और इसके लिए अलग-अलग गुट अपनी वफादारी और शक्ति प्रदर्शन आलाकमान के सामने करने पहुंच रहा है।
अध्यक्ष अल्पकालिक, गुटबाजी पूर्णकालिक
कांग्रेस के कार्यवाहक की जगह शहडोल अध्यक्ष की नियुक्ति शायद अभी होनी शेष है, इसके लिए अपने कामों का ब्यौरा, वफादारी, शक्ति प्रदर्शन स्वाभाविक है, यह होना भी चाहिए, लेकिन इसके बाद चुने गये अध्यक्ष भले ही कुछ वर्षाे के लिए हो, लेकिन यदि पार्टी के सभी गुट मुखिया का आदेश मानकर गुटबाजी भूल जाये और संगठन के लिए पूर्णकालिक वफादारी दिखा दें तो, निकाय ही नहीं बल्कि भविष्य में अन्य चुनाव भी कांग्रेस आसानी से जीत सकती है। पार्टी से निष्कासन और बहाली तो, कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा में भी कुछ दिनों की कहानी बन चुकी है, ऐसे में पार्टी से निष्कासन के आरोपों की जगह जिताऊ और टीम वाले चेहरे कांग्रेस के लिए फायदे मंद हो सकते हैं।
पूर्व के चुनावों का मूल्यांकन
कांग्रेस आलाकमान भविष्य में क्या निर्णय लेती है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन कांग्रेस का अध्यक्ष किसी की रबर स्टांप या फिर कठपुतली न साबित हो, यह ज्यादा महत्व रखता है। शहडोल ही नहीं बल्कि अन्य जिलो में भी पर्दे के पीछे से गॉड फादर और हवेलियों के आदेश पर कांग्रेस और भाजपा दोनों में ही बिसात बिछती रही है, जो समय आने पर निकाय से लेकर विधानसभा के चुनाव तक में टिकट बटवारे और हार-जीत को पहले से ही तय करते हैं। यही नहीं कांग्रेस को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि जो चेहरे सामने आये हैं या फिर जिन्हें जिले या ब्लाक की जिम्मेदारी दी जा रही है, उनके गृह वार्ड, निकाय, पंचायत तथा अन्य चुनावों में उन्होंने पार्टी को जीत दिलाई भी है या फिर गॉड फादर के इशारे पर पार्टी को धोखा दिया है। आने वाले महीनों में निकाय के चुनाव होने हैं और अगले साल विधानसभा के भी चुनाव हैं, यहां नये अध्यक्ष के साथ ही उसकी टीम प्रदेश के मुखिया के लिए आंख और कान का काम करती है, आज चुने गये

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