मुख्यमंत्री बाल कल्याण कोविड़ 19 योजना को मिली संविधानिक चुनौती

 

 

मध्यप्रदेश शासन की 30 मई 2021 को लॉन्च की गई मुख्यमंत्री बाल कल्याण कॉविड 19 योजना को माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में जनहित याचिका के तहत चुनौती दी गई हैं। याचिकाकर्ता धर्मेश बसेडिया जो की विधि के चौथे वर्ष के छात्र हैं साथ में साकित मालिक विधि पंचम वर्ष छात्र बतलाते हैं कि यह योजना मात्र उन बच्चो के लिए की गई जिनके माता पिता की मौत 01/03/2021 से 30/06/2021 के बीच हुई । याचिकाकर्ता का मानना हैं की योजना अनाथ बच्चो के उत्तम भविष्य के लिए बहुकल्पिय सुविधा प्रदान करती हैं, परन्तु ये अवधि के कारण कई ऐसे मासूम जिनके माता – पिता की मृत्यु कोरोना से दिनांक 01/03/2021 के पूर्व हुई होगी वह इस योजना से वंचित रह जाएंगे। याचिका कर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सिद्धार्थ गुलाटी जी ने बताया हैं कि सरकार के द्वारा बनाई गई यह अवधि उनके भारतीय संविधान में दिए गए अनुच्छेद 14 जो समानता का अधिकार देता हैं एवं एक मौलिक अधिकार हैं के खिलाफ होगी। यदि किसी भी अवधि से एक समान लोगो को एक समान सुविधा नहीं दी जाती हैं, तोह यह उनके कानूनी हक के खिलाफ होगा। मानिन्य सुप्रीम कोर्ट का भी इस समानता के प्रश्न पर एक समान मत हैं। गुलाटी जी बताते हैं कि मध्यप्रदेश में मार्च,2020 से कुल मिलाकर 314 बच्चे हैं जिन्होंने अपने माता पिता को कोरोना कारणवश खो दिया, यह बात स्वयं माननीय सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा बताई गई हैं अतः सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यो से इस डाटा को लेकर कहा था कि आप सभी राज्य उन मासूमों कों खोजे जिन्होंने अपने माता पिता को कॉरोना से खों दिए। यह डाटा अभी भी एक खोज स्तर पर ही हैं, और ऐसी खोज स्तर के वाबजूद सरकार मात्र एक अवधि के कारण उन मासूम बच्चो को बंचित कर रही हैं।
माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मोहम्मद रफीक एवं न्यायाधीश श्री विजय कुमार शुक्ला की पीठ ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए, सरकार को नोटिस जारी किया हैं। इस याचिका की अगली सुनवाई दिनांक 30/06/2021 को होगी जिसमें सरकार अपना बयान देगी।

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