धोनी शहर में ही कर रहा एक का अस्सी

सट्टे के कारोबार पर नहीं लग पा रहा अंकुश

(शुभम तिवारी+8770354184)
शहडोल। नगर में इन दिनों सट्टे का अवैध कारोबार जोर शोर से चल रहा है। एक रुपए को अस्सी रुपया बनाने के चक्कर में खासकर युवा वर्ग अधिक बर्बाद हो रहे हैं। चर्चा है कि कृष्णा होटल के पीछे धोनी सट्टे के इस खेल को बढ़ावा देन ग्राहकों को मुफ्त में स्कीम देखने सट्टे नंबर वाले चार्ट उपलब्ध करा रहा हैं। इसका गुणा भाग कर ग्राहक सट्टे की चपेट में बुरी तरह से फंस कर पैसा इस अवैध कारोबार में गंवा रहा है। अगर पुलिस चुस्त है तो, सट्टा का यह कारोबार पुलिस की नाक के नीचे और विभाग की जानकारी में ही फल-फूल रहा होगा। अब देखना यह है कि इस कारोबार पर फिर पूर्णत: अंकुश लग पाता है या नहीं। या फिर छोटे एजेंटों को पकड कर बड़े खाईवालों को बचाने का प्रयास किया जाता है।
खाईवालों तक नहीं पहुंचती वर्दी
राजनैतिक पहुंच और पुलिस से सांठ-गांठ के चर्चे किसी से छुपे नहीं हैं, खबर है कि धोनी अवैध कारोबार को बाकायदा कृष्णा होटल के पीछे से शहर में संचालित कर रहा है। पुलिस और धोनी की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ऊपर अधिकारियों को दिखाने ये खाईवाल अपने गुर्गों के नाम प्रकरण बनवा देता है, ऊपर बैठे अफसरों को लगता है पुलिस कार्रवाई कर रही है। जबकि वास्तव में ये सांठगांठ का एक पहलू होता है। सवाल ये है कि जब पुलिस अगर सटोरियों के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो, फिर उनसे पूछताछ कर खाईवालों तक क्यों नहीं पहुंच पाती।
ब्याज पर उठाते पैसा
शहर में फल-फूल रहे सट्टा कारोबार सहित अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कप्तान से सख्त निर्देश दिये थे, बावजूद इसके कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत धोनी जैसे कई और सट्टोरिये लोगों को बर्बाद करने में लगे हैं, कामकाज की उम्र में युवा वर्ग धोनी के चंगुल में फंस रहे हैं, परिवार व परिजनों से राशि उधार लेने के बाद सट्टे में लगाकर कर्ज तले दब जाते हैं, कई लोग तो टेढ़का, दीपक जैसे लोगों से ब्याज पर राशि लेकर जीवन भर इस कर्ज को उतारने में ही फंसे रहते हैं, सट्टा खेलने वालों से परिवार के सदस्य भी मानसिक रूप से परेशान रहते हैं।
गिरोह के हौसले बुलंद
सट्टा व्यापार के लालच में फंसकर कई लोग अपनी किस्मत आजमाते है। बाद में इसमें फंसकर अपना सबकुछ भी गवां बैठते है। पुलिस इस अवैध कारोबार में को संचालित करने वालों पर कार्यवाही न कर उनके गुर्गाे पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, सरगना पर कार्यवाही न होने की वजह से इस गोरखधंधे पर पूरी तरह अंकुश नही लग पा रहा है और अवैध कारोबार में लिप्त गिरोह के लोगो के हौंसले बुलंद हैं। शहर में यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक लोग फोन पर अपना नंबर बताते लिखवाते हैं और नंबर आने पर इन्हीं सट्टा खाईवाल एजेंटों के माध्यम से पैसे का लेन-देन किया जाता है।
सट्टा माफिया हो रहे मालामाल
सट्टा का यह खेल जीरो से लेकर नौ नंबर तक चलता है और नेट पर एक ही नंबर आता है, जिससे नौ नंबरों का रुपये उन्हें सीधा-सीधा बच जाता है, जिससे खिलाडी का वह नंबर फंसता है, वह इसमें खुश हो जाता है कि उसे 1 के 80 मिल गये, लेकिन अन्य बाकी खिलाडियों के रुपये जिनके नंबर नहीं फंसते उनका सीधा रुपये सट्टा माफियाओं की जेब में जाता है। अब इस कारोबार का जाल पूरे शहर में फैल रहा है। ऐसा नहीं है कि पुलिस सट्टे, जुएं के इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगा सकती। कुछ पुलिस अधिकारी ऐसे भी आएं जिन्होंने सट्टे के कारोबार को पूरी तरह बंद करा दिया था।

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