भाजपा में टिकट वितरण को लेकर असंतोष, कई निर्दलीय उतरे मैदान में

गैरों पर करम…. अपनों पर सितम
नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेसी नहीं भारतीय जनता पार्टी में भी टिकट वितरण के बाद असंतोष अंदर ही अंदर फूट रहा है, कार्यवाही के डर से भले ही कोई सामने आकर ना तो पत्रकार वार्ता कर रहा है और न हीं खुलकर बयान दे रहा है, लेकिन दर्जनों ऐसे भी प्रत्याशी हैं, जिन्होंने टिकट न मिलने पर निर्दलीय रूप से ताल ठोक दी है, वहीं आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी लगातार चल रहे हैं, पूर्व अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला कटारे के साथ ही प्रकाश जगवानी आदि के को टिकट न दिए जाने की चर्चाएं भी शहर में उफान पर हैं।
शहडोल। भारतीय जनता पार्टी ने शहडोल नगर पालिका के टिकट वितरण को लेकर सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार और खर्च करने वाले उम्मीदवार की रणनीति पर टिकट वितरण तो कर दी, लेकिन इसके बाद दर्जनों की संख्या में भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतर आए हैं, जो निश्चित ही भाजपा को नुकसान पहुंचाएंगे। दो दशकों के साथ ही लगातार चार पंच वर्षीय भारतीय जनता पार्टी के नगर में सता रही है, जाहिर है सत्ता विरोधी लहर का सामना तो भारतीय जनता पार्टी को करना ही पड़ेगा, कांग्रेस इसका पूरा फायदा उठाने का प्रयास भी करेगी, कांग्रेस के पास नगरीय निकाय चुनावों में खोने के लिए कुछ भी नहीं है, जिले की जयसिंहनगर या फिर बुढार और शहडोल मुख्यालय तीनों ही निकायों में भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है , ऐसे में भाजपा के जिलाध्यक्ष कमल प्रताप सिंह के साथ ही प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे भाजपा की सीटों पर कब्जा बरक़रार रखें, हालांकि टिकट वितरण के दौरान इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि भले ही जिसे टिकट दी जा रही है, वह पार्टी में नया है या नहीं उसने पार्टी के लिए क्या किया है या नहीं, इस बात से अधिक सर्वे और जिताऊ कैंडिडेट का ख्याल रखा गया है। भले ही वह कांग्रेसी, बहुजन विचारधारा का ही क्यों ना हो, दर्जनभर से अधिक भाजपा के बागी उम्मीदवारों ने निर्दलीय और आम आदमी पार्टी का दामन थामा है, डेढ़ दर्जन से अधिक प्रत्याशी आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनाव में पहली बार पार्षद के रूप में उतारे हैं, वही कांग्रेस में भी बीते दिनों जमकर फूट नजर आई, इसका नुकसान कांग्रेस को कितना होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा ।
पूर्व अध्यक्ष के परिवार को नहीं मिली टिकट
भारतीय जनता पार्टी की निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला कटारे के परिवार को एक वार्ड तक की जिम्मेदारी नहीं दी गई, यह पार्टी की आंतरिक गुटबाजी थी या फिर 5 साल के दौरान श्रीमती उर्मिला कटारे के द्वारा नगरपालिका के विकास के लिए किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड था, जो भाजपा के सामने पहुंचा और जिसका नतीजा यह रहा कि उनके पति राजा कटारे के द्वारा वार्ड नंबर 35 से पार्षद पद के लिए टिकट मांगी गई थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दी गई। यहां यह भी विचारणीय है कि श्रीमती उर्मिला कटारे का जब चयन 5 वर्ष पूर्व अध्यक्ष के लिए किया गया था, उस समय वह भारतीय जनता पार्टी से तीन बार जीती हुई पार्षद प्रत्याशी थी, इसलिए उनसे कम से कम यह उम्मीद तो लगाई जा सकती थी कि पार्टी उन्हें एक बार की टिकट तो अवश्य देगी। यह भी बात सामने आई कि जिस दौरान टिकट का वितरण हो रहा था, उस दौरान भी उन्हें इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया, चर्चा तो यह भी है कि पार्टी की पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका के चुनाव में भाजपा के पार्षदों का प्रचार करने की जगह फिलहाल शहर छोड़ कर रिश्तेदारी के नाम पर कहीं बाहर चली गई हैं, सच क्या है या तो वही जाने लेकिन यह चर्चा तो हर चौराहे पर है।
सिंधी समाज को किया दरकिनार
भारतीय जनता पार्टी का परंपरागत वोट माने जाने वाला सिंधी समाज इस बार चुनाव में पूरी तरह से बाहर है, शहडोल ही नहीं बल्कि बुढ़ार और जयसिंहनगर से भी भारतीय जनता पार्टी ने सिंधी समाज के किसी भी नेता को पार्टी से टिकट नहीं दी, ऐसा नहीं है कि सिंधी समाज की ओर से पार्षद पद के लिए एक भी आवेदन नहीं आया हो या फिर नामांकन दाखिल नहीं किया गया हो, शहडोल नगर पालिका के ही पूर्व अध्यक्ष प्रकाश जगवानी ने अपने गृह वार्ड नंबर 8 से टिकट मांगी थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दी गई। इसी तरह अनिल अरोरा, महेश भागदेव, संजय वासवानी जैसे दर्जनों ऐसे नाम है, जो भारतीय जनता पार्टी का झंडा और बैनर एक 2 साल से नहीं बल्कि कई दशकों से उठा रहे हैं, यही नहीं जो लोग आज भाजपा में टिकट बांट रहे थे, संभवत वे भी उन लोगों के बाद ही भाजपा में आए हैं, बहरहाल बुढार में भी वार्ड नंबर एक और वार्ड नंबर 13 से भाजपा की टिकट मांगी गई थी, लेकिन पार्टी ने उन पर भरोसा नहीं जताया, यह भी चर्चा है कि इस बार शहडोल ही नहीं बल्कि बुढार और जयसिंहनगर में भी सिंधी समाज भारतीय जनता पार्टी के द्वारा उन्हें टिकट न दिए जाने और भरोसा न करने के कारण उसका बाई काट कर सकता है।
जाति प्रमाण पत्र के मामले भी उलझे
जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगे यह बताया गया कि प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल के सबसे करीबी माने जाने वाले डॉक्टर जी.डी. सिंह की पत्नी जो पूर्व में न तो भाजपा में थी और न ही वह कभी कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुई, लेकिन उनका उन्हें प्रभारी मंत्री के नजदीकी होने का लाभ मिला, वार्ड नंबर 13 से श्रीमती सुभद्रा सिंह को पार्टी ने टिकट दी है, उनके नामांकन दाखिल करने के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी आपत्तियां पहुंची थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें भी खारिज कर दिया। यह भी आरोप लगे कि उत्तर प्रदेश का जाति प्रमाण पत्र होने के बाद भी उनका जाति प्रमाण पत्र शामिल कर लिया गया, जबकि वार्ड नंबर 13 से सीमा सराफ ने छत्तीसगढ़ का जाति प्रमाण पत्र दिया था पर उनका नामांकन ही नहीं लिया गया, यहां यह बात भी सामने आई कि वार्ड नंबर 9 से प्रभारी मंत्री के भतीजे शिव कुमार पटेल ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय रूप से ताल ठोक दी है और उन्हें गाजर चुनाव चिन्ह भी मिला है, पार्टी उनके ऊपर कार्यवाही करती है या फिर वहां भाजपा के उम्मीदवार को कमजोर कर के अंदर से उनका समर्थन किया जाता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन प्रभारी मंत्री के शहडोल आगमन के दौरान शिव कुमार पटेल के बड़े-बड़े पोस्टर और उनके साथ उनकी बैठकर चर्चा का विषय रही है।
सिल्लू निर्दलीय मैदान में
भारतीय जनता पार्टी से टिकट न मिलने के कारण झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के सदस्य और युवा मोर्चा के नेता सिल्लू रजक वार्ड नंबर 19 से निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में है, पार्टी ने एक तरफ पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को टिकट नहीं दी, वहीं पार्टी के ही लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि वार्ड नंबर 26 से महेंद्र रिछारिया और वार्ड नंबर 33 से महेंद्र झारिया की पत्नी श्रीमती शोभा रिछारिया को टिकट दी है, पार्टी के द्वारा एक ही घर में दो-दो लोगों को टिकट दिए गए, जबकि पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष को गुटबाजी के कारण टिकट से वंचित कर दिया गया जाहिर है इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
दागी भी चुनाव मैदान में
भारतीय जनता पार्टी ने वार्ड नंबर 3 से कारोबारी गोपाल शर्मा की पत्नी को टिकट दी है, उनके ऊपर पूर्व में भी भ्रष्टाचार के दर्जनों आरोप लगे हैं, यही नहीं उनके बड़े भाई और बर्खास्त शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, कांग्रेस ने इस मामले में यह भी आरोप लगाया कि जिस बिल्डिंग में गोपाल शर्मा रहते हैं, वह सरकारी बिल्डिंग है और उस पर कब्जा करके रह रहे हैं, यह मामला भी शिकायत में और जांच में है, लेकिन इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने पुराने कार्यकर्ताओं से परहेज करते हुए उन लोगों को टिकट दी जो पैसा खर्च करके चुनाव जीतकर परिषद में पहुंचे, इस बात का बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया कि पार्टी की चाल चरित्र और पार्टी की विचारधारा इससे धूल दूषित होती है या नहीं, गोपाल शर्मा को लेकर पूर्व में भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा और यह दावे बाजार में होते रहे कि भ्रष्टाचार से कमाई गई दौलत के दम पर गोपाल शर्मा और इसके तरीके कई अन्य नेता टिकट खरीदकर परिषद में पहुंच जाएंगे और फिर पहले शिक्षा विभाग फिर ट्रेवल्स और उसके बाद नगरपालिका में भी इस तरह का भ्रष्टाचार पनपने लगेगा
उपाध्यक्ष को हराने वाले को दी टिकट 
बीते चुनावों में गोपाल रत्नम ने वार्ड नंबर 10 से चुनाव में लड़ा था और भाजपा नेता पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा उर्फ डोली को चुनाव में पटखनी दी थी, इस दौरान भाजपा ने गाजे-बाजे के साथ अपनी पार्टी को हराने वाले प्रत्याशी को पार्टी में लिया था, इस बार भाजपा प्रत्याशी गोपाल रत्नम वार्ड नंबर 19 से चुनाव मैदान में है, उनके खिलाफ सिल्लू रजक मैदान में है, चर्चा है कि गोपाल रत्नम के  वार्ड नंबर 19 से चुनाव लडऩे की घोषणा के बाद वार्डवासियों ने बाहरी प्रत्याशी नहीं चलेगा के नारे लगाये थे। मजे की बात तो यह है वार्ड नंबर 10/13 का कितना विकास हुआ, यह गोपाल रत्नम से ही पूछा जाये, चर्चा है कि वार्ड नंबर जीतने के बाद गोपाल रत्नम दोबारा इस वार्ड में झांकने तक नहीं आये हैं। इस बार उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के ही कार्यकर्ता से है।

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