रेलवे परिसर में सागौन के दर्जनों वृक्षों का कत्लेआम

जिम्मेदारों को नहीं है इसकी खबर,लचर व्यवस्था के चलते लोगों हौसले बुलंद

शहडोल। रेल संपत्ति के संरक्षको व जिम्मेदारों का ढुलमुल रवैया व तानाशाही से रेल प्रशासन के साख पर बट्टा लगाया जा रहा है आलम यह है की कोरोना संक्रमण काल में जिम्मेदार जहां एक ओर अपने को सुरक्षित रखने के लिए सारे जद्दोजहद कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अपनी रेल सेवा भाव व मूल कर्तव्य को भूलकर रेल संपत्ति को बलि का भेंट चढ़ा रहे हैं। जानकारी के अनुसार रेल मुख्यालय शहडोल से लगभग 200 मीटर की दूरी पर डालमिया लकड़ी टाल व जगन्नाथ मंदिर के पास आरक्षित रेल भूमि पर लगे बेशकीमती सागौन के दर्जनों वृक्षों को धड़ल्ले से काटा जा चुका है, जिसकी भनक व जानकारी जिम्मेदारों को अब तक नहीं है। वर्षों पूर्व रेल प्रशासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर आरक्षित भूमि पर सैकड़ों सागौन के पौधे रोपे गए थे, जिन्हें संबंधित विभाग द्वारा देखरेख किया जाना था किंतु विभाग के लचर व्यवस्था के कारण लोगों का हौसला इतना बड़ा है कि सारे नियमों को ताक पर रखकर व जिम्मेदारों को चुनौती देकर दर्जनों वृक्षों को महज अपने स्वार्थ के लिए अंधाधुन तरीके से कांटा जाकर सिर्फ ठूँठ छोड़ दिया गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस स्थान पर सैकड़ों रेल कर्मियों के निवास सहित कुछ रेल कार्यालय भी स्थित है साथ ही यहां से रेल सड़क भी गुजरता है जहां से रोजाना दिन-रात लोगों की आवाजाही होती रहती है, ऐसे में वन संपदा की हानि निश्चित ही जिम्मेदारों के अडिय़ल रवैया को बताती है की रेल संपत्ति कितना सुरक्षित व जिम्मेदार कितने सजग हैं।
जिम्मेदार नहीं देते ध्यान
लोगों का कहना है की रेल कॉलोनी पर लगे हरे-भरे वृक्षों को बेपरवाहो द्वारा आए दिन काटा जाता है जिससे पर्यावरण का दोहन होता है और यह सब रेल प्रशासन के उदासीनता की वजह से होता है क्योंकि संबंधित विभाग व रेल पुलिस के जवानों द्वारा रेलवे कालोनि में कभी भी पतासाजी व भ्रमण नहीं किया जाता है।
खंडहर में तब्दील रेलवे क्वार्टर
नॉर्दन रेलवे कॉलोनी में इसका नजारा ज्यादा देखा जा सकता है यहां जब से रेल प्रशासन द्वारा रेलवे क्वार्टरों को ढाया गया है, तब से यह स्थान खंडहर में तब्दील हो चुका है, जहां रोजाना कुछ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा तो लगा ही रहता है साथ ही यह जगह सुनसान होने की वजह से लोगों द्वारा हरे भरे वृक्षों को आड़े हाथो लिया जा रहा है तथा किसी के विरोध पर उल्टे उन्हें ही नियम कानून का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
नियमों को नहीं परवाह
जहां एक और कोरोना संक्रमण काल में ऑक्सीजन की कमी से हजारों मरीजों की मौतें हुई थी, वही रेल प्रशासन है कि पर्यावरण संरक्षण को धता बताकर समाज व देश की नैतिक जिम्मेदारी से दूर रहकर संवैधानिक अधिनियमों को भी ताक पर रख कर अपनी सेवाएं दे रहा है।
क्या प्रशासन करेगा कार्यवाही
देखना यह होगा कि क्या रेल प्रशासन का कोई जिम्मेदार अमला इस पर वाकई कोई रोक लगा सकेगा क्या सागौन के उन वृक्षों को अवैध तरीके से काटे जाने पर कोई ठोस कार्यवाही करेगा या फिर बचे हुए अन्य वृक्षों की भी अवैध कटाई तक सिर्फ और सिर्फ जुमलेबाजी कर वाहवाही बटोरता रहेगा।

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