खबर का असर @ देवांता अस्पताल सील ! मरीजो को मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट की कार्यवाही !

(शुभम तिवारी)

शहडोल। जिला मुख्यालय स्थित देवांता अस्पताल के संचालक डॉक्टर बृजेश पांडे और डॉक्टर विष्णु कांत त्रिपाठी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने अनूपपुर जिले के जैतहरी विकासखंड अंतर्गत क्योंटार निवासी संतोष राठौर की शिकायत पर आपराधिक मामला कायम करने के दूसरे दिन शनिवार को अधिकारियों की टीम अस्पताल पहुंची। अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में सीएमएचओ डॉ एमएस सागर और डॉक्टरों की टीम ने मरीज की केस हिस्ट्री के साथ अस्पताल के दस्तावेज खंगाले। इस दौरान देवांता अस्पताल प्रबंधन की कई करतूत सामने आई है। टीम के अनुसार, जांच में देवांता अस्पताल में कई खामियां सामने आई है। अधिकारियों ने अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर ली है। अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त किया जा रहा है।

(देखे live video में कब क्या हुआ  )

 

टीम ने दस्तावेजों को जब्त करते हुए जांच की है। जिसमें महिला मरीज के इलाज में भी लापरवाही के साथ धोखाधड़ी उजागर हुई है, जांच टीम की रिपोर्ट में कई गड़बडिय़ां सामने आने के बाद देवांता अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लाइसेंस निरस्त की प्रक्रिया की जा रही है। जांच रिपोर्ट एडीएम के माध्यम से कलेक्टर डॉ वंदना वैद्य को सौंपी जाएगी। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई होगी। जांच टीम ने अग्रिम कार्रवाई तक के लिए अस्पताल के संचालन पर रोक लगा दी है। इस दौरान जो मरीज भर्ती थे, उन्हे मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट कराया है। जांच टीम के अनुसार, पहले अस्पताल प्रबंधन द्वारा जांच के लिए मरीजों का बिल काट दिया जाता था। बाद में डॉक्टर से संबंधित जांच लिखवाई जाती थी। इस तरह मरीजों से जांच के नाम पर भी मनमाने तरीके से राशि वसूली जाती थी। मनमानी का आलम यह था कि तरीके पहले बिल काटा जाता था फिर बिल को पूरा करने के लिए डॉक्टर उस हिसाब से दवाइयाँ लिखते थे , मृतक महिला के मामले में भी 13 को डायलिसिस का बिल काटा गया जबकि चिकित्सक ने 14 को जांच का परामर्श दिया, यही नही बिल में काट- छांट के भी सबूत मिले है ,अस्पताल में भर्ती करने के बाद महिला की 13 सितंबर को डायलिसिस करनी थी। इसके लिए देवांता अस्पताल प्रबंधन ने 13 को बिल भी काट दिया था लेकिन दो दिन तक डायलिसिस नहीं कराई। बाद में 14 सितंबर को डॉ दीपक पाल से केस शीट पर जांच लिखवाई गई और इसके बाद 15 से डायलिसिस हुई। जांच टीम के घेरे में डॉ दीपक पाल भी हैं। जांच टीम की भनक लगते ही देवांता अस्पताल के प्रबंधक और डॉक्टरों द्वारा रजिस्टर में भी हेरफेर किया गया। जांच टीम ने रजिस्टर जब्त किया है। जिसमें डायलिसिस दिनांक में काट-छांट की गई है। बिल 13 को काट दिया गया था। जबकि डॉ दीपक पाल ने 14 को डायलिसिस लिखी है। बाद में इसे सुधारने का भी प्रयास किया गया है।

सीएमएचओ डॉ एमएस सागर के अनुसार, जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि देवांता अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों से शासन द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त ज्यादा वसूला जा रहा था। मनमाने तरीके से इलाज के नाम पर पैसा लिया जा रहा था। इसके अलावा जिस दिन महिला की मौत हुई है, उस वक्त भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा राशि जमा कराई गई है।

अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा, सीएमएचओ डॉ एमएस सागर, डॉ मुकुंद चतुर्वेदी और डॉ एससी त्रिपाठी दोपहर में देवांता अस्पताल पहुंच गए। ये देर शाम तक अस्पताल में रेकार्ड खंगालते रहे। इस दौरान रेकार्ड निकलवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जांच टीम के पहुंचते ही स्टाफ भी चंपत हो गया। बाद में अपर कलेक्टर वर्मा ने फटकार लगाते हुए एफआइआर कराने की बात कही, जिसके बाद स्टाफ आया। बाद में रेकार्ड देने में भी आनाकानी की जा रही थी। हालांकि फिर भी कई रेकार्ड जांच टीम के हाथ नहीं लग सके हैं। कई दस्तावेज न मिल पाने की वजह से रिपोर्ट में तथ्य नहीं आ सके हैं।
दूसरे अस्पतालों में भी विजिट, डॉ पाल का बयान दर्ज।जांच टीम ने देवांता अस्पताल के डॉ दीपक पाल को भी बुलाया। अधिकारियों ने बयान दर्ज किया है। जिसमें कई अलग-अलग बात सामने आई है। डॉ दीपक पाल दूसरे अस्पताल में भी सेवाएं दे रहे हैं। यहां पर डॉक्टर की सूची में नाम दर्ज था। जबकि इलाज बीएचएमएस (होम्योपैथी) के डॉक्टर कर रहे थे। देवांता अस्पताल प्रबंधक डॉ बीके त्रिपाठी और डॉ बृजेश पांडेय के खिलाफ हाल ही में पुलिस ने धोखाधड़ी सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान प्रबंधक और डॉक्टर दोनों गायब थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों संतोष राठौर की पत्नी पुष्पा राठौर की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी, जिसे अस्पताल संचालकों ने रुपए लेने के फेर में जबरिया मुर्दे को आईसीयू में रखकर उसका भी शुल्क लेने में लगे थे, इसके बाद यह मामला पुलिस तक पहुंचा और पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार गोस्वामी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची तथा बीती रात करीब 7:00 बजे के आसपास संतोष राठौर तथा उसकी पत्नी पुष्पा राठौर को जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था, इसके बाद पुलिस को santosh राठौर ने अस्पताल संचालकों के खिलाफ शिकायत दी, कोतवाली पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 420,384 व 294 , 34आईपीसी के तहत अपराध कायम किया था।

वहीं इस संदर्भ में बीती रात करीब 11:00 बजे के आसपास कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ ने एसडीएम से मिलकर उसे इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्यवाही की मांग की है।

यह थी कांग्रेस की मांग

देवांता हॉस्पिटल मे जैतहरी अनूपपुर निवासी संतोष राठौर अपनी पत्नी को इलाज के के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद भी मृत शरीर के इलाज के नाम पर पैसे की वसूली की गई जिसके विरोध में एसडीएम दिलीप पांडे के निवास पर घटना की रात्रि 10:00 बजे पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया एवं मुख्य बिंदुओं के आधार पर शासन प्रशासन से मांग की गई परिवार जनों के साथ कांग्रेश परिवार के सदस्य उपस्थित रहे , प्रमुख मांगो में (1).देवांता हॉस्पिटल संचालक की विधिवत जांच एवं पदस्थ डायरेक्टर और डॉक्टर की डिग्री डिप्लोमा की जांच।
(2). मृतिका का पोस्टमार्टम अन्य जिले के पदस्थ डॉक्टर की टीम द्वारा की जाए।
3. उक्त मामले मे सभी देवांता हॉस्पिटल के दोषी डॉक्टरो के विरूद्ध एफआईआर कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
4.फर्जी तरीके से इलाज के नाम पर मरीजो को लूटने वाले और मौत बांटने वाले देवांता हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर अस्पताल सील करा दी जाए।

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